कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (सीएसई) और इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) डिपार्टमेंट, सीईसी - सीजीसी लांडरां द्वारा आज 5वां इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन कम्प्यूटेशनल मेथड्स इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आइसीसीएमएसटी - 2025) आयोजित किया गया।
यह दो दिवसीय आयोजन, साइंस एंड टेक्नोलॉजी के ब्रॉडर एरियाज में आर एंड डी ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के साथ-साथ इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च एंड इनोवेशन को प्रोत्साहित करने के लिए सीजीसी के निरंतर प्रयासों को रेखांकित करता है।
सम्मेलन के पहले दिन 300 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। देश और विदेश के विभिन्न प्रमुख तकनीकी संस्थानों से जुड़े 15 प्रतिष्ठित एक्सपर्ट्स, दो दिनों तक वर्चुअल माध्यम से समृद्ध विचार-विमर्श और प्रस्तुतियों में भाग लेंगे। सम्मेलन की कार्यवाही के साथ-साथ, रिसर्च योगदान को प्रदर्शित करने वाला सोवेनेयर भी विशिष्ट अतिथियों द्वारा रिलीज़ किया गया।
सम्मेलन के उद्घाटन समारोह की शोभा बढ़ाने चीफ गेस्ट के रूप प्रो. (डॉ.) पद्मकुमार नायर, ऑनरेबल वाईस चांसलर, थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पटियाला तथा गेस्ट ऑफ़ ऑनर के रूप में डॉ. अमित कुमार मिश्रा, सीनियर डायरेक्टर (आईटी)/ साइंटिस्ट - एफ, नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर, मिनिस्ट्री ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी उपस्थित हुए।
डॉ. राजदीप सिंह, कैंपस डायरेक्टर, सीजीसी लांडरां, डॉ. सुखप्रीत कौर, एचओडी(विभागाध्यक्ष), सीएसई, डॉ. अमनप्रीत कौर, एचओडी (विभागाध्यक्ष), आईटी, सीईसी-सीजीसी लांडरां, सीजीसी के डायरेक्टर्स ने सभी विशिष्ट अतिथियों और प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया।
अपने संबोधन में डॉ. अमित कुमार मिश्रा ने कांफ्रेंस के आयोजन के लिए सीजीसी की सराहना की। उन्होंने कहा कि आइसीसीएमएसटी 2025 केवल एक अकादमिक इवेंट नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा इकोसिस्टम है जो सूचना के आदान-प्रदान, आइडियाज और इनोवेटिव थिंकिंग को बढ़ावा देता है।
डॉ. मिश्रा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एआई एक समान अवसर प्रदान करने वाला उपकरण है, जिसे हमें सक्रिय और गतिशील रूप से अपनाना चाहिए ताकि प्रोडक्टिविटी और परिणामों को बेहतर बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि एआई लोगों या नौकरियों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उन लोगों की जगह ले सकता है जो इसे अपनाने या उपयोग करने में पीछे रह जाते हैं।
उद्घाटन समारोह में बोलते हुए डॉ. पद्मकुमार नायर ने एआई के युग में कंप्यूटिंग के विकास पर एक विचारोत्तेजक दृष्टिकोण के साथ अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने तकनीकी मांगों में हो रहे तेज़ बदलाव को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि एआई, बिग डेटा और आईओटी जैसे तकनीकी क्षेत्र उन भूमिकाओं की जगह ले रहे हैं जो केवल बड़े डेटा सेट से सरल नियम निकालने तक सीमित थीं और अब ऐसी भूमिकाएं सामने आ रही हैं जिनमें छोटे, कॉग्निटिव काम्प्लेक्स और एथिकली चुनौतीपूर्ण डेटा से गहरी अंतर्दृष्टि निकालना आवश्यक होता है।
फ्यूचर लीडर्स को ऐसे परिदृश्यों में तेज़, विचारशील और प्रभावशाली निर्णय लेने के लिए तैयार रहना होगा। डॉ. नायर ने इस चुनौती को सहानुभूति और उत्कृष्टता के मूल्यों से जोड़ा और प्रतिभागियों से नवाचार के लिए मल्टीडिसकीप्लीनरी दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि सहानुभूति उत्कृष्टता की जननी है और उत्कृष्टता का अर्थ है, पूर्व की तुलना में कार्य को बेहतर ढंग से करने की मानसिकता, जो इंटेलेक्चुअल ह्युमिलिटी पर आधारित होती है। भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान और परमाणु सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में क्षमताओं को उजागर करते हुए, उन्होंने छात्रों को अलग तरीके से सोचने, साहसिक कदम उठाने और स्थापित ढर्रे से हटने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि विचलन ही अक्सर सच्चे नवाचार की शुरुआत होती है, जो राष्ट्रीय प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।
इसके अतिरिक्त, पहले दिन के दौरान प्रमुख स्पीकर डॉ. डेविड्स, इम्पीरियल कॉलेज लंडन, यूके और डॉ. कलैवानी चेल्लप्पन, एसोसिएट प्रोफेसर, यूकेएम, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मलेशिया ने भी वर्चुअल माध्यम से अपने विचार साझा किए।
आइसीसीएमएसटी 2025 की कार्यवाही में से 152 शोधपत्रों का चयन किया गया है, जिन्हें टेलर एंड फ्रांसिस (सीआरसी प्रेस) द्वारा प्रकाशित स्कोपस - इंडेक्स्ड श्रृंखला में शामिल किया जाएगा, जिससे इन अनुसंधान निष्कर्षों की दृश्यता और प्रभावशीलता में और अधिक वृद्धि होगी।
पहले दिन के चार समानांतर तकनीकी सत्रों में, शोधार्थियों ने विशेषज्ञों के एक पैनल के समक्ष अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इन सत्रों में मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, साइबर सुरक्षा और ब्लॉकचेन तकनीकों में हालिया प्रगति और चुनौतियों सहित विविध विषयों पर चर्चा की गई।