Thursday, 23 July 2026

 

 

खास खबरें अपनों का दर्द बांटने आठ किलोमीटर पैदल चलकर ग्रांउंड जीरो पहुंचे केवल सिंह पठानिया सीमा पार से चल रहे तस्करी मॉड्यूल से जुड़े दो व्यक्ति 6 आधुनिक पिस्तौल, 1 किलो हेरोइन, 10 हजार रुपये की ड्रग मनी सहित गिरफ्तार सरकार छात्रों की भावनाओं से भली-भांति परिचित है, छात्र अपने आंदोलन के राजनीतिक अपहरण से सावधान रहें : सुनील जाखड़ वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा सामाजिक सुरक्षा विभाग को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए न्यूनतम 60 लाख रुपये का जीवन बीमा सुनिश्चित करने के निर्देश पंजाब सरकार का हर खेत तक नहरी पानी पहुंचाने का अभियान युद्धस्तर पर जारी खाद्य सुरक्षा से पोषण सुरक्षा की ओर बढ़ रहा पंजाब 'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान को और प्रभावी बनाने पर दिया जोर ट्राइडेंट लिमिटेड का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन शामचुरासी हलके के हर जरूरतमंद तक सुविधाएं पहुंचाना हमारी प्राथमिकता : डॉ. रवजोत सिंह विद्यार्थियों के खिलाफ एनएसए लगाना निंदनीय : अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग अंतर्राष्ट्रीय मिंजर मेले में एंटी चिट्टा अभियान के तहत प्रस्तुत होंगे नुक्कड़ नाटक: मुकेश रेपस्वाल श्री मणिमहेश यात्रा के दौरान यात्रियों का पंजीकरण रहेगा अपरिहार्य : मुकेश रेपस्वाल मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत कुलजीत सिंह रंधावा ने रवाना की 88वीं, 89वीं और 90वीं बस मोहिंदर भगत ने लुधियाना में बागवानी विकास केंद्र के निर्माण कार्य में तेजी लाने के दिए निर्देश मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना : कुलवंत सिंह की देखरेख में मोहाली विधानसभा क्षेत्र से 86वीं, 87वीं और 88वीं बस रवाना शिक्षा क्रांति अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की बदली तस्वीरः ब्रम शंकर जिंपा नीट पेपर लीक: विद्यार्थियों के आंदोलन से घबराई कांग्रेस-भाजपा, ‘आप’ पर लगा रही है बेबुनियाद आरोप: बलतेज पन्नू मान सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत ₹2,150.73 करोड़ जारी किए मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत 50.3 लाख से अधिक ई-स्वास्थ्य कार्ड जारी - डॉ. बलबीर सिंह विकसित भारत 2047 के लिए शिक्षा प्रणाली के निर्माण में केंद्र और राज्य समान भागीदार हैं: धर्मेंद्र प्रधान स्कूल छोड़ने वाले 80 हजार बच्चों की वापसी, गुजरात सरकार ने शुरू किया बड़ा अभियान

 

बिहार विधानसभा चुनाव : क्या कांग्रेस बचा पाएगी अपनी सीट? किस दल पर भरोसा जाताएगी कदवा की जनता

Election Special
Listen to this article

Web Admin

Web Admin

5 Dariya News

नई दिल्ली , 02 Aug 2025

Last updated on: Aug 05, 2025, 12:41 IST

बिहार के कटिहार जिले की कदवा विधानसभा चर्चित सीटों में से एक है। यह सीट ना सिर्फ राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही है, बल्कि अपने सामाजिक-सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य के कारण भी लगातार सुर्खियों में रही है। कदवा की राजनीति अक्सर बदलते समीकरणों के साथ आगे बढ़ी है। वर्ष 2000 में यहां राजद, 2005 में जदयू और 2010 में भाजपा ने जीत दर्ज की थी।

इसके बाद 2015 और 2020 में कांग्रेस के शकील अहमद खान ने लगातार दो बार जीत हासिल कर कांग्रेस को यहां मजबूत स्थिति में पहुंचाया। अगर इस बार एंटी इनकंबेंसी फैक्टर प्रभावी नहीं हुआ, तो कांग्रेस फिर से यहां अच्छी स्थिति में रह सकती है, हालांकि मुकाबला बेहद कड़ा होने वाला है।कदवा विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास भी काफी दिलचस्प है। 

इसकी स्थापना 1951 में हुई थी, लेकिन 1962 के बाद परिसीमन के चलते इसे हटा दिया गया। करीब 15 वर्षों के अंतराल के बाद 1977 में यह सीट फिर से अस्तित्व में आई। इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी राजनीतिक रुख तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है। महानंदा और बरंडी नदियों के जलोढ़ मैदानों में बसे इस क्षेत्र में हर साल बाढ़ का संकट गहराता है। यहां की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है, जिसमें धान, मक्का, जूट और केले की खेती होती है। 

यहां की पहचान मखाना और मछली उत्पादन से भी है, लेकिन बार-बार की बाढ़ ने लोगों की आजीविका पर असर डाला है।जातीय समीकरणों की बात करें तो यह इलाका पूरी तरह से विविधता से भरा है। यहां अति पिछड़ा वर्ग की आबादी लगभग 30 फीसदी है, जबकि मुस्लिम मतदाता 32 फीसदी के करीब हैं। इसके अलावा ओबीसी 17 फीसदी, अनुसूचित जाति 9 फीसदी, अनुसूचित जनजाति 5 फीसदी और सामान्य वर्ग केवल 5 फीसदी है।

2020 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार कदवा में कुल 2,81,355 मतदाता थे, जिसमें से सिर्फ 60.31 प्रतिशत ने मतदान किया, जो कि हाल के वर्षों में सबसे कम मतदान प्रतिशत था। मुस्लिम बहुल इलाका होने के बावजूद, धार्मिक आधार पर मतदान का सीधा असर नहीं दिखा है, अब तक यहां से 6 हिंदू और 8 मुस्लिम विधायक चुने जा चुके हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के शकील अहमद खान को 71 हजार वोट मिले थे, जबकि जदयू को 38 हजार और एलजेपी को 31 हजार वोट मिले थे। 

एलजेपी की मौजूदगी ने जदयू के वोट काटे और यह कांग्रेस के लिए फायदेमंद रहा। अगर एलजेपी मैदान में नहीं होती, तो जदयू और कांग्रेस के बीच मुकाबला कहीं अधिक नजदीकी होता।2025 में यह देखना रोचक होगा कि क्या जदयू फिर से उम्मीदवार उतारेगी या भाजपा सीट पर दावेदारी करेगी, और क्या एलजेपी दोबारा तीसरा कोण बनेगी या गठबंधन की राजनीति में कोई बड़ा फेरबदल होगा।

अब सवाल यह है कि जनता का रुख इस बार किस ओर होगा? कांग्रेस के शकील अहमद खान ने पिछले दो कार्यकाल में ऐसा क्या किया है कि जनता एक बार फिर उन्हें मौका देगी? एनडीए की ओर से अगर किसी लोकप्रिय और स्थानीय मुद्दों से जुड़े चेहरे को उतारता है, तो यह मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है।

 

Tags: Election Special

 

 

related news

 

 

 

Photo Gallery

 

 

Video Gallery

 

 

5 Dariya News RNI Code: PUNMUL/2011/49000
© 2011-2026 | 5 Dariya News | All Rights Reserved
Powered by: CDS PVT LTD