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पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में "कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में सार्वजनिक पुस्तकालयों के बदलते स्वरूप" विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया

Central University of Punjab, CUPB, Bathinda, Prof Raghvendra P Tiwari
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5 Dariya News

बठिंडा , 02 Aug 2025

Last updated on: Aug 05, 2025, 11:09 IST

पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग ने शुक्रवार को "कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में सार्वजनिक पुस्तकालयों के बदलते स्वरूप" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। यह संगोष्ठी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी के संरक्षण में आयोजित की गई तथा इसका प्रायोजन राजा राममोहन राय पुस्तकालय प्रतिष्ठान, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत सूचना एवं संचार अध्ययन विद्यापीठ के डीन तथा पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. भवनाथ पाण्डेय के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने बताया कि आज के समय में पुस्तकालयों को एआई आधारित तकनीकों से जोड़ना बहुत जरूरी है ताकि वे आधुनिक और उपयोगकर्ता-केंद्रित बन सकें।

जयपुर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलपति और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. रोशन लाल रैना ने आभासी पटल पर सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के पुस्तकालयों को एआई तकनीक को अपनाने की सख्त जरूरत है ताकि वे अधिक प्रभावी और उपयोगकर्ता अनुकूल बन सकें। उन्होंने पुस्तकालय कर्मियों को फिर से प्रशिक्षित करने, नई तकनीकों को अपनाने, और डेटा आधारित सेवाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

वहीं बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग की प्रो. शिल्पी वर्मा ने सम्मानित अतिथि के रूप में सम्मिलित हुई। उन्होंने बताया कि कैटलॉगिंग, डिजिटल संग्रहण, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और चैटबॉट्स जैसी तकनीकों से पुस्तकालयों में बड़ा बदलाव आ रहा है। साथ ही उन्होंने एआई के नैतिक पहलुओं पर भी चर्चा की।

प्रो. रूपक चक्रवर्ती (पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़) ने मेटाडेटा प्रबंधन और स्मार्ट सूचना खोज प्रणाली में एआई के उपयोग से जुड़े केस स्टडी प्रस्तुत किए और कहा कि नैतिक दिशानिर्देशों का पालन भी जरूरी है।समापन सत्र में, टीएस सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी की लाइब्रेरियन डॉ. नीजा सिंह ने विशेष रूप से ग्रामीण पुस्तकालयों में एआई को समावेशी रूप से अपनाने की वकालत की।

सीयू पंजाब के प्रति-कुलपति प्रोफेसर किरण हजारिका ने इस पहल की सराहना की और पुस्तकालयों को भविष्य के लिए तैयार करने तथा 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण में योगदान देने के लिए शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और प्रौद्योगिकीविदों के बीच सहयोग का आग्रह किया। इस मौके पर उन्होंने प्रो. सोनल सिंह और डॉ. भवनाथ पाण्डेय द्वारा संपादित पुस्तक "फेस्टश्रिफ्ट" का भी विमोचन किया।

संगोष्ठी में ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें प्रतिभागियों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए और कैटलॉगिंग, वर्चुअल सेवाओं और सूचना पहुंच में एआई के प्रयोग पर चर्चा की। संगोष्ठी का समापन आयोजन सचिव डॉ. ऋषभ श्रीवास्तव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने वक्ताओं, प्रतिभागियों, प्रायोजकों और विभाग के शोधार्थियों तथा छात्रों के योगदान को विशेष रूप से स्वीकार किया। 

इस अवसर पर डॉ. सुखदेव सिंह, श्री सोमेश राय, डॉ. फ्लोरेंस गुइटे सहित विश्वविद्यालय के अन्य संकाय सदस्य भी उपस्थित थे। इस संगोष्ठी में देश भर से प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, पुस्तकालय विज्ञान विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने भाग लिया।

 

 

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