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डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2025 पर विज्ञान बजट में 926% की वृद्धि पर प्रकाश डाला

डॉ. जितेंद्र सिंह की ओर से साझा किए एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत के 5352 वैज्ञानिक शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिक मस्तिष्क में शामिल हैं

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5 Dariya News

नई दिल्ली , 28 Feb 2025

Last updated on: Feb 28, 2025, 00:00 IST

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान विभागों के लिए बजट में भारी बढ़ोतरी को विज्ञान प्रौद्योगिकी और नवाचार की प्रगति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए बताया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2025 समारोह में अपने भाषण के दौरान उन्होंने इसे नवाचार और विज्ञान के प्रति प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का संरक्षण बताया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में विभिन्न विभागों के लिए बजट आवंटन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) को 2013-14 में ₹2777 करोड़ का आवंटन प्राप्त हुआ, जो 2024-25 में बढ़कर ₹28,509 करोड़ हो गया, जो 926% की बढ़ोतरी दर्शाता है। 

इसी प्रकार, विज्ञान और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) का बजट 2013-14 में ₹2013 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹6658 करोड़ हो गया, जो 230% की बढ़ोतरी दर्शाता है। अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) का बजट 2013-14 में ₹5615 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹13,416 करोड़ हो गया, जिसके आधार पर 139% की बढ़ोतरी हुई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस वर्ष के राष्ट्रीय विज्ञान दिवस को उत्सवपूर्ण उत्साह के साथ मनाने के लिए मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान को याद किया। भारतीय भौतिक विज्ञानी सी. वी. की ओर से रमन प्रभाव की खोज का सम्मान करने के लिए भारत में प्रत्येक वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है।

रमन ने 1928 में यह खोज प्रकाश प्रकीर्णन के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि थी, जिसके लिए सी. वी. रमन को 1930 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इलेक्ट्रिक वाहन समाधानों के लिए डीएसटी की नई पहल की शुरुआत की, जिसका नेतृत्व भारी उद्योग मंत्रालय और एसीएमए के सहयोग से घटक निर्माण के लिए स्टार्टअप की ओर से किया जाता है।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "भारत ने विकसित भारत@2047 बनने के लिए अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक उत्कृष्टता के लिए एक वैश्विक केंद्र के तौर पर भारत को स्थापित करने के लिए एक साहसिक और परिवर्तनकारी यात्रा शुरू की है"।

भारत की वैज्ञानिक यात्रा के पिछले दशक पर विचार करते हुए, मंत्री ने इस विषय पर जोर दिया कि नवोन्मेषी, युवाओं के नेतृत्व वाले डीप-टेक स्टार्टअप के बढ़ते आधार के साथ भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में बदल गया है। ये स्टार्टअप न केवल घरेलू चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं, बल्कि संचार, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, संपोषित ऊर्जा, स्वास्थ्य देखभाल एडवांसमेंट और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसे वैश्विक मुद्दों के लिए समाधान भी तैयार कर रहे हैं।

डॉ. सिंह ने साझा किया कि 31 दिसंबर की कटऑफ तारीख वाले सर्वेक्षण के अनुसार पता चला कि 5352 भारतीय वैज्ञानिक मस्तिष्क शीर्ष 2 प्रतिशत में शामिल हैं। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए डॉ. सिंह ने कहा, "केवल दस वर्षों में, भारत 80वें से 39वें स्थान पर पहुंच गया है और दुनिया के सबसे नवोन्मेषी देशों में अपनी जगह पक्की कर ली है”।

डॉ. सिंह ने भारत की अभूतपूर्व वैज्ञानिक सफलताओं पर प्रकाश डाला जो राष्ट्रीय गौरव का स्रोत रही हैं, विशेष रूप से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान -3 की सफल लैंडिंग - जिससे यह असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाला, भारत पहला देश बना। उन्होंने 30 दिसंबर, 2024 को इसरो के एसपीएडीईएक्स मिशन के सफल प्रक्षेपण पर भी प्रकाश डाला, जो अंतरिक्ष यान के मिलन, डॉकिंग और अनडॉकिंग में एक अग्रणी परियोजना है।

डॉ. सिंह ने इस विषय पर जोर दिया कि भारत क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार और क्वांटम क्रिप्टोग्राफी पर ध्यान केंद्रित करते हुए वैश्विक क्वांटम प्रौद्योगिकी परिदृश्य में अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार है। डीप-टेक में भारतीय युवाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप वैश्विक चुनौतियों के लिए समाधान विकसित करने में सबसे आगे हैं।

डॉ. सिंह ने इस वर्ष की विषय-वस्तु यानी "विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय युवाओं का सशक्तिकरण" पर जोर देते हुए इसे अपने युवा वैज्ञानिकों में भारत के बढ़ते निवेश का दर्पण बताया। उन्होंने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस को देश के युवाओं को समर्पित किया और युवाओं को क्षमता निर्माण में सक्षम बनाने और उन्हें 2047 के निर्माता बनने के लिए तैयार करने का प्रयास किया।

उनकी उपस्थिति में, निधि-आईटीबीआई के समावेशी प्रौद्योगिकी बिजनेस इन्क्यूबेटरों में नौ नए संस्थानों को शामिल किया गया, जिनमें से 50 संस्थान पहले से मौजूद थे।

नेशनल इंजीनियरिंग कॉलेज, कोविलपट्टी, तमिलनाडु

जीआईटीएएम, विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश

भारतीय प्रबंधन संस्थान, जम्मू, जम्मू एवं कश्मीर

श्री श्री विश्वविद्यालय, कटक, ओडिशा

संस्कृति विश्वविद्यालय, मथुरा, उत्तर प्रदेश

एम्स, पटना, बिहार

सोना कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, सेलम, तमिलनाडु

असम डाउन टाउन विश्वविद्यालय, असम

संगम विश्वविद्यालय, भीलवाड़ा, राजस्थान

डीएसटी के एसएचआरआई सेल की ओर से विकसित खाद से हरित संक्षारण अवरोधक पर आईआईटी कानपुर और एचएबी बायोमास प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया। इस उत्सव में सीएसआईआर-एनबीआरआई और नागपुर के अंकुर सीड्स के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भी हुआ। 

डॉ. सिंह ने 31वीं एनसीएसटीसी की चयनित परियोजनाओं का सार-संग्रह भी जारी किया। आज पीयूआरएसई के अंतर्गत 9 और विश्वविद्यालयों को विविध वैज्ञानिक विषयों और विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों पर 75 करोड़ रुपये का सहयोग दिया गया।

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय

तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, उत्तराखंड;

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक, हरियाणा

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़

राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विद्यापीठ; महाराष्ट्र

तेजपुर विश्वविद्यालय; असम

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश

एक अन्य ऐतिहासिक पहल में, डॉ. सिंह ने विशेष तौर पर अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए ₹1,000 करोड़ का उद्यम पूंजी कोष साझा किया। कैबिनेट की ओर से मंजूर किए गए, इस कोष का लक्ष्य भारत के लगभग 300 अंतरिक्ष स्टार्टअप के बढ़ते आधार को प्रोत्साहन देना है, जिससे भारत को अंतरिक्ष उद्योग में अग्रणी के रूप में स्थापित किया जा सके।

सरकार ने मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं को बढ़ाने पर केंद्रित एक राष्ट्रीय कार्यक्रम मिशन मौसम के लिए 2,000 करोड़ रुपये भी आवंटित किए हैं। इसके अतिरिक्त, ₹50,000 करोड़ के कोष के साथ अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान कोष (एनआरएफ) का शुभारंभ यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी छलांग है कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति अनुसंधान उत्कृष्टता और नवाचार से प्रेरित है।

डॉ. सिंह ने भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को विकसित करके 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रहा है कि नवाचार प्रयोगशाला से जमीन तक पहुंचे, जिससे स्थानीय समुदायों को लाभ हो और साथ ही भारत को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान के विभिन्न विभागों और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग के महत्व पर जोर दिया। सरकार का प्रयास वैज्ञानिक नवाचार हेतु एक योग्य वातावरण बनाने पर केंद्रित है, यह सुनिश्चित करते हुए कि अनुसंधान और विकास सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप हो।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर ए. के. सूद; डीजी-सीएसआईआर और डीएसआईआर सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी; आईएनएसए के अध्यक्ष प्रोफेसर आशुतोष शर्मा; डीएसटी सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर; डीबीटी सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले; इसरो चेयरमैन और अंतरिक्ष विभाग के सचिव श्री. वी. नारायणन के साथ एनसीएसटीसी की प्रमुख डॉ. रश्मि शर्मा ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। 

भारत के 22 राज्यों के राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषदों के वरिष्ठ अधिकारी, स्कूल और कॉलेज के छात्र ऑनलाइन मोड में विज्ञान दिवस समारोह में शामिल हुए।

 

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