शिरोमणी अकाली दल के वरिष्ठ नेता सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया ने आज केंद्र सरकार से नई अधिसूचना के माध्यम से रदद किए गए तीनों कृषि काूननों के तत्वों को फिर से पेश करने की कोशिश करने के बजाय आंदोलन करने वाले किसानों से बातचीत कर उनकी मांगों को स्वीकार करने की अपील की है।
यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए अकाली नेता ने कहा कि कृषि विपणन पर नए राष्ट्रीय ढ़ांचे के मसौदे ने किसानों के बीच यह आशंका पैदा कर दी है कि भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार फिर से कृषि विपणण को निजी कंपनियों को सौंपना चाहती है।
उन्होने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी किए एक मसौदा अधिसूचना में सभी इच्छुक पार्टियों से 15 दिनां के भीतर अपने सुझाव देने के लिए कहा गया है। यह प्रधानमंत्री की उस आश्वासन की भावना के खिलाफ है जो उन्हे तीनों काले कानूनों को रदद करते समय किसान समुदाय को दिए गए आश्वासन दिया गया था कि इस मामले में कोई भी अगला निर्णय उनके सलाह मशवरे से ही लिया जाएगा।
यह कहते हुए सरदार मजीठिया ने कहा कि मसौदा प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब किसान दिल्ली में आंदोलन कर रहे थे और उन्हे केंद्र सरकार के सामने अपनी मांगे रखने के लिए दिल्ली जाने से रोका जा रहा है। उन्होने कहा,‘‘ मैं केंद्र सरकार से आग से न खेलने की अपील करते हुए कहा कि आमरण अनशन पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की हालत खराब है और स्थिति को और खराब नही किया जाना चाहिए।
उन्होने कहा कि सरकार को इस मामले में आगे बढ़ने से पहले किसान नेताओं और किसान समुदाय के साथ मसौछा अधिसूचना पर चर्चा करनी चाहिए। उन्होने कहा कि किसानों से किए गए वादे को लागू किया जाना चाहिए ताकि एमएसपी को कानूनी गारंटी बनाया जा सके।’’
वरिष्ठ अकाली नेता ने कहा कि मसौदा अधिसूचना ने संघीय स्वायतता पर गंभीर सवाल उठे हैं। उन्होने कहा,‘‘ भले की कृषि और विपणन राज्य के विषय हैं, लेकिन केंद्र सरकार एक ही राष्ट्रीय नीति लागू करना चाहती है, जो सभी में फिट बैठता हो। इससे राज्यों के अधिकार विशेषकर पंजाब जैसे राज्यों के अधिकार कमजोर होगें, कृषि विपणन का मजबूत बुनियादी ढ़ांचा और अनाज खरीदने के लिए खरीद प्रणाली है।’’
उन्होने कहा कि विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि मसौदा नीति में अनाजों के अंतरराष्ट्रीय विपणन के साथ-साथ निर्यात शुल्क और निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के मुददे पर भी बात नही की गई, जिससे पिछले कई सालों के दौरान किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
पंथक एकता के बारे में सवाल के जवाब में सरदार मजीठिया ने कहा कि वे पंथ में एकता के लिए डटकर खड़े हैं और कहा कि अकाली दल के सभी पृथक दलों को फिर से एकजुट होना चाहिए। उन्होने कहा कि पंजाब की आवाज उठाने के साथ-साथ इसके लोगों की क्षेत्रीय आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए यह बेहद जरूरी है।
उन्होने कहा कि इससे राज्य के लंबित मुददों का समाधान करने में मदद मिलेगी, जैसे की नदी जल की सुरक्षा, चंडीगढ़ को पंजाब में स्थानांतरित करना, वाघा सीमा को व्यापार के लिए खोलना, किसानों की समस्याओं का समाधान और साम्प्रदायिक सदभाव सुनिश्चित करना शामिल है।