पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा (सीयू पंजाब) द्वारा राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) के सहयोग से शनिवार को “महिलाओं पर प्रभाव डालने वाले साइबर कानून” विषयक क्षेत्रीय कानून समीक्षा परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड तथा लद्दाख के 35 से अधिक विधि विशेषज्ञों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भाग लिया।
इन विशेषज्ञों ने साइबर कानून से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करते हुए डिजिटल क्षेत्र में महिलाओं के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा के लिए संशोधन प्रस्तावित किए। इस परामर्श कार्यक्रम में ऑनलाइन उत्पीड़न, पहचान चोरी, और ए.आई.-आधारित डीपफेक जैसे खतरों एवं चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इसके साथ ही इसमें सीमित डिजिटल साक्षरता, साइबर अपराधों की कम रिपोर्टिंग जैसी क्षेत्रीय समस्याओं को भी रेखांकित किया गया। इस कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में राजीव गांधी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटियाला के कुलपति प्रो. जय शंकर सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की।
लद्दाख विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. के. मेहता सम्मानित अतिथि के रूप में, जबकि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्री पी. एस. गिरवर राव मुख्य वक्ता के रूप में सम्मिलित हुए।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. जय शंकर सिंह ने महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों से निपटने के लिए कानूनी ढांचे और प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया।
सम्मानित अतिथि प्रो. एस. के. मेहता ने सार्वजनिक-निजी सहयोग, डिजिटल प्लेटफार्मों पर साइबर अपराधों की अनिवार्य रिपोर्टिंग और महिलाओं के लिए सुरक्षित ऑनलाइन स्थान बनाने हेतु मजबूत डिजिटल साक्षरता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता श्री पी. एस. गिरवर राव ने उभरती प्रौद्योगिकियों द्वारा उत्पन्न कानूनी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी जैसे कानूनों में संशोधन की आवश्यकता पर बल दिया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सीयू पंजाब के कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने विश्वविद्यालय विधि विभाग और एनसीडब्ल्यू के सामूहिक प्रयासों की सराहना की तथा लैंगिक समानता को बढ़ावा देने एवं प्रभावी कानूनी सुधार लाने के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दोहराया।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम महिलाओं के लिए इंटरनेट को एक सुरक्षित स्थान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। इस परामर्श कार्यक्रम में चार पैनल चर्चाएं आयोजित की गई जिसमें विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं द्वारा महिलाओं को प्रभावित करने वाले साइबर कानूनों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने कानूनी ढांचे को मजबूत करने हेतु विशिष्ट संशोधनों और सिफारिशों को साझा किया। चर्चाओं में महिलाओं का अशोभनीय चित्रण (निषेध) एक्ट, 1986, महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न. (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 और अन्य कानूनों में संशोधन शामिल थे।
परामर्श कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रो. मीनाक्षी सिन्हा और कश्मीर विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ लॉ के डीन प्रो. मोहम्मद हुसैन के संबोधन के साथ हुआ।
दोनों वक्ताओं ने महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और समान डिजिटल वातावरण बनाने हेतु शिक्षा जगत, नीति निर्माताओं और नागरिक समाज के बीच सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
सुश्री लालदिनपुई साइलो ने कार्यक्रम के मुख्य निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए सख्त कानूनी प्रावधान, डिजिटल प्लेटफार्मों के लिए अनिवार्य रिपोर्टिंग और कानून प्रवर्तन के लिए क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों के महत्व को भी रेखांकित किया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. योगलक्ष्मी के.एन. के स्वागत भाषण के साथ हुई।
तदुपरांत कार्यक्रम समन्वयक और स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज के डीन प्रो. दीपक चौहान ने कार्यक्रम का विषय प्रस्तुत किया। प्रो. वी.के. गर्ग ने अतिथियों का स्वागत किया, और एनसीडब्ल्यू के वरिष्ठ विश्लेषक श्री बिनू पीटर ने परामर्श कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की सह-समन्वयक डॉ. स्मृति राय और डॉ. छवि गर्ग ने आमंत्रित वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। अंत में डॉ. सुखविंदर कौर और डॉ. रविंदर कौर ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस कार्यक्रम मैं विधि विभागाध्यक्ष और शिक्षकों ने सहभागिता की। इस परामर्श कार्यक्रम ने अकादमिक सहयोग को प्रोत्साहित किया और महिलाओं की बेहतर ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए साइबर कानूनों में सुधार हेतु समाधान प्रदान किए।