मुख्य सचिव, अटल डुल्लू ने श्रीनगर स्मार्ट सिटी लिमिटेड और जम्मू स्मार्ट सिटी लिमिटेड के कामकाज सहित कई मामलों पर चर्चा करने के लिए आवास और शहरी विकास विभाग की एक बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में प्रमुख सचिव वित्त, आयुक्त सचिव एच-यूडीडी, कश्मीर/जम्मू के संभागीय आयुक्त, संबंधित विभागों के अधिकारियों के अलावा एसएससीएल/जेएससीएल के सीईओ भी षामिल हुए।
इस बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट किया कि श्रीनगर और जम्मू के दोनों शहरों में स्मार्ट सिटी मिशन के कार्यों के निष्पादन के लिए स्थापित दोनों विशेष प्रयोजन वाहन को यहां अपना सुचारू कामकाज जारी रखने के लिए आत्मनिर्भर बनाया जाना चाहिए। अटल डुल्लू ने कहा कि एसएससीएल और जेएससीएल के रूप में इन दोनों एसपीवी ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान करोड़ों रुपये के कार्यों को क्रियान्वित किया है।
उन्होंने बताया कि उन्होंने इस मिशन को लागू करते हुए इस दौरान दोनों शहरों में कई राजस्व उत्पन्न करने वाली संपत्तियां भी बनाई हैं। मुख्य सचिव ने इन एसपीवी के अधिकारियों को एक ऐसे व्यावहारिक मॉडल के साथ आने के लिए प्रेरित किया जो आने वाले समय में उनके कामकाज को आत्मनिर्भर तरीके से सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने उन्हें राजस्व सृजन के संदर्भ में पाइपलाइन में मौजूद परिसंपत्तियों के साथ मौजूदा परिसंपत्तियों की क्षमता देखने और आने वाले वर्षों के लिए स्थिरता की सटीक तस्वीर पाने के लिए साल दर साल किए जाने वाले आवर्ती व्यय की गणना करने का निर्देश दिया। उन्होंने उन्हें इस उद्देश्य के लिए अन्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में अपनाए गए मॉडलों का अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने उनसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी मोड के तहत शुरू की जाने वाली कुछ व्यवहार्य परियोजनाओं को आदर्श बनाने के लिए भी कहा, जो उनकी सभी परिचालन लागतों को कुशलतापूर्वक पूरा करने के लिए पर्याप्त राजस्व उत्पन्न करने में सहायता करेगी। इससे पहले मुख्य सचिव ने पीएम ई-बस सेवा के तहत केंद्रीय सहायता से प्राप्त होने वाली 100 और ई-बसों को सुरक्षित करने के लिए एक मॉडल विकसित करने में हुई प्रगति का भी मूल्यांकन किया।
आयुक्त सचिव, एचएंडयूडीडी, मनदीप कौर द्वारा बताया गया कि केंद्र सरकार 12 मिनी बसों के लिए 24 रुपये प्रति किमी, 9 मिनी के लिए 22 रुपये प्रति किमी और 7 मिनी बसों के लिए 20 रुपये प्रति किमी की दर से सुनिश्चित दूरी के लिए अपनी सहायता देने जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि ’बिहाइंड द मीटर पावर’ बुनियादी ढांचे के लिए 100 प्रतिषत सहायता प्रदान करने के अलावा, डिपो बुनियादी ढांचे को 20 करोड़ रुपये तक बढ़ाने की 90 प्रतिषत लागत भी केंद्र द्वारा ही वहन की जाएगी।
बैठक में जम्मू-कश्मीर के शहरी क्षेत्रों की बेहतर योजना और विकास के लिए टाउन प्लानिंग संगठन के पुनर्गठन के संभावित मॉडल पर भी चर्चा हुई। यह बताया गया कि विभाग आने वाले समय में सभी 78 नगर निकायों को टाउन प्लानिंग के दायरे में लाने पर विचार कर रहा है ताकि उन्हें अपने निवासियों के लिए अच्छे जीवन स्तर को सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया जा सके।