गर्मी अपने चरम पर है, बरसात के मौसम के बाद उमस भी होने लगेगी। अब पंखे की हवा आपको सुकून नहीं दे पाएगी। अगर आप अपने कमरे के लिए AC खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो आपको ये जानकारी होनी चाहिए कि आपके लिए कौनसा AC सही रहेगा। मार्केट में दो तरह के AC उपलब्ध है। इन्वर्टर AC और नॉन इन्वर्टर AC. तो आइए जानते हैं दोनों में क्या फर्क है और हमें कौनसा खरीदना चाहिए। आज AC के बाजार में नई तकनीक का बोलबाला है। कंपनियां भी नए फीचर्स में उलझा कर आपको उनके प्रोडक्ट की ओर आकर्षित भी कर रही होंगी। AC खरीदते वक्त लोगों का पहला सवाल बिजली की खपत जानने के लिए होता है।
दुकानदारों से सबसे पहले ये कहा जाता है कि वो AC दिखाइए जो कम बिजली की खपत करे। इसी मांग को पूरा करते हुए AC कंपनियों ने बीते कुछ साल में Inverter AC का प्रचार तेज कर दिया है। अब आपके मन में सवाल उठता ही होगा कि इन्वर्टर AC नॉन इन्वर्टर AC से कितना अलग होता है। सबसे पहली बात यह कि इस इन्वर्टर को आप अपने पावरबैकअप वाले इन्वर्टर मानने की गलती न करें। AC में इन्वर्टर टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रिक वोल्टेज, करंट और फ्रीक्वेंसी को कंट्रोल करने वाला छोटा सा कंट्रोलर होता है। यह इन्वर्टर AC को कंप्रेसर में पावर की सप्लाई में बदलाव कर कूलिंग या हीटिंग को कंट्रोल करने की सुविधा देता है।
इन्वर्टर AC की सबसे खास बात-
वहीं नॉन-इन्वर्टर AC में सिर्फ तापमान को एडजेस्ट करने के लिए कंप्रेसर को ऑन या ऑफ करने का ऑप्शन होता है। वे सिर्फ तय कूलिंग पावर के साथ आते हैं। यह कमरे के आसपास के टेंपरेचर के आधार पर AC कंप्रेसर को ऑन या ऑफ कर सकता है। अब दोनों में अंतर की बात की जाए तो कूलिंग और हीटिंग को मैनेज करने के लिए AC के कंप्रेसर को ऑपरेट करते हैं और हैंडल करते हैं। इन्वर्टर AC के पास अपनी ऑपरेटिंग कैपेसिटी में बदलाव करने का ऑप्शन होता है, जबकि नॉन-इन्वर्टर AC सिर्फ एक तय कैपेसिटी पर ही काम कर सकते हैं। मॉडर्न इन्वर्टर AC R32 रेफ्रिजरेंट का इस्तेमाल करते हैं जो न सिर्फ बेहतर कूलिंग कैपेसिटी प्रदान करते हैं, बल्कि कम हानिकारक एमिशन भी छोड़ते हैं। जो सेहत पर ज्यादा प्रभाव नहीं डालता है।
महंगे होते हैं लेकिन बिल बहुत कम आता है-
इन्वर्टर AC आमतौर पर नॉन-इन्वर्टर एसी से महंगे होते हैं। हालांकि, लंबे समय में उनकी ऑपरेटिंग कॉस्ट कम है, क्योंकि वे जरूरत के हिसाब से हाई और लो दोनों कैपेसिटी पर काम कर सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1.5-टन का इन्वर्टर AC 0.3-टन और 1.5-टन के बीच काम कर सकता है। जबकि नॉन-इन्वर्टर AC हमेशा 1.5-टन पर काम करेगा। ऐसे में तापमान के अनुसार एडजस्ट होने में बिजली की काफी बचत होती है। नॉन-इन्वर्टर AC में कंप्रेसर को फिर से ऑन करने में बिजली काफी खर्च होती है।
आवाज ना के बराबर-
इन्वर्टर AC में कंप्रेसर अधिक टिकाऊ होते हैं और नॉन-इन्वर्टर एसी के मुकाबले में लंबे समय तक चलते हैं। वहीं दूसरा फायदा यह है कि इन्वर्टर एसी में नॉन-इन्वर्टर एसी के मुकाबले कम आवाज होती है। हाईटेक इन्वर्टर एसी में एक ऑप्शन के तौर पर स्लीप मोड या क्वाइट मोड भी होता है, जबकि नॉन इन्वर्टर AC में ऐसा को फीचर नहीं होता है।
इसलिए सही मायनों में अगर देखा जाए तो इन्वर्टर AC लेने में ही फायदा। हालांकि इन्वर्टर AC के लिए आपको थोड़ी ज्यादा कीमत चुकानी होगी लेकिन बिजली का बिल इतना कम आएगा कि आपके पैसे जल्दी कवर हो जाएगें।