आज ही के दिन यानी 21 मई 1991 को एक ऐसा धमाका हुआ जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। मकसद था देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को मारना। ये शायद अब तक का सबसे बड़ा आत्मघाती हमला था। आतंकी अपने मनसूबों में कामयाब भी हुए। तमिलनाडु के श्रीपेरम्बदूर में लिट्टे उग्रवादियों ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी थी। पूरा देश रोया क्योंकि जनता का राजीव गांधी से लगाव एक अलग लेवल पर जा पहुंचा था। इस हमले में 18 अन्य लोगों ने भी अपनी जान गवां दी थी। आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 31वीं पुण्यतिथि है। पूरा देश आज अपने उस नेता को याद कर रहा है जिसे आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है। आइए हम भी याद करें..
सबसे पहले बात करते हैं राजीव गांधी के सुपुत्र राहुल गांधी की। उन्होंने एक अलग अंदाज में अपने पिता को याद किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करके लिखा- कि उनके पिता दूरदर्शी नेता थे जिनकी नीतियों ने आधुनिक भारत को आकार देने में मदद की। राहुल ने लिखा- मेरे पिता एक दयालु और उदार शख्सियत थे। वो मेरे और प्रियंका दोनों के लिए एक अद्भुत पिता थे, जिन्होंने हमें क्षमा और सहानुभूति के साथ जीना सिखाया। मुझे उनकी बहुत याद आती है हम दोनों ने साथ में जो समय बिताया है, उसे याद करता हूं। इस वीडियो को प्रियंका गांधी ने भी रिट्वीट किया है। राहुल गांधी ने ट्विटर पर जो वीडियो शेयर किया, उसमें राजीव गांधी को कहते सुना जा रहा है कि भारत एक पुराना देश है लेकिन एक युवा राष्ट्र है। मैं जवान हूं और मेरा भी एक सपना है। मैं एक भारत का सपना देखता हूं। मजबूत, स्वतंत्र, आत्मनिर्भर और सबसे आगे। मानव जाति की सेवा में मैं प्रतिबद्ध हूं।
वो तुम्हें भी मार देंगे-
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रधान सचिव रहे पीसी अलेक्जेंडर ने एक किताब लिखा। जिसके चर्चे पूरे देश में हुए। उन्होंने अपनी किताब में लिखा था- 31 अक्टूबर 1981 को इंदिरा गांधी की हत्या से कुछ घंटों के भीतर ऑल इंडिया मेडिकल इंस्टीट्यूट के गलियारे में मैंने सोनिया गांधी को राजीव गांधी से लड़ते देखा। राजीव उन्हें बता रहे थे कि पार्टी चाहती है कि मैं प्रधानमंत्री पद की शपथ लूं। सोनिया ने कहा-किसी कीमत पर नहीं, वो लोग तुम्हें भी मार डालेंगे। राजीव का जवाब था-मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है, मैं वैसे भी मारा जाऊंगा। इस बातचीत के करीब 7 साल बाद राजीव गांधी की हत्या हुई और उनके ये शब्द सच साबित हो गए।
सोनिया से मुलाकात-
भारत में कंम्यूटर क्रांति के निर्माता कहे जाने वाले राजीव गांधी की सोनिया गांधी से पहली मुलाकात का किस्सा बेहद दिसचस्प है। सोनिया गांधी से उनकी मुलाकात कैंब्रिज में हुई थी जब वे इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने गए थे। सोनिया उस समय कैंब्रिज की सबसे सुंदर महिल थी। यहीं सोनिया ने राजीव को देखा। वो शांत और सुंदर थे। साथ ही बेहद विनम्र भी। दूसरों से अलग। एक दिन जब सोनिया वहां लंच कर रही थी तब राजीव उनके कॉमन मित्र क्रिस्टियन वॉन स्टीगलिज के साथ दाखिल हुए। वहीं से उनका एक-दूसरे से परिचय हुआ। सोनिया ने अपनी बॉयोग्राफी में कहा था कि- उन्हें पहली ही नजर में राजीव से प्यार हो गया। ऐसा ही राजीव के लिए भी था, क्योंकि राजीव ने ये बात उन्हें बताई भी थी।
उन्होंने कॉमन फ्रेंड क्रिस्टियन से पहले ही उनका सोनिया से परिचय कराने को कहा था। इसके बाद उनमें दोस्ती हुई। जैसी कि नेहरू-गांधी परिवार में लंबे पत्र लिखने की परंपरा रही है। राजीव भी कुछ इसी मिजाज के थे। वो अपनी मां इंदिरा गांधी को जब भी पत्र लिखते थे, तब उन्हें कैंपस, पढ़ाई, लाइफ, रूटीन सारी बातें लिखते थे। जल्दी ही उनके पत्रों में सोनिया भी शामिल हो गईं। वो अपनी मां से उनका जिक्र करने लगे। कुछ समय बाद इंदिरा गांधी सोनिया से मिलने गई और उन्हें सोनिया भा गईं। 1968 में राजीव सोनिया ने शादी कर ली।
राजनीति में एंट्री-
12वीं पास करने के बाद राजीव गांधी ने कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में बीटेक में दाखिला लिया। इसके बाद 1966 में उन्होंने लंदन के इम्पीरियल कॉलेज में मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए एडमिशन लिया, लेकिन दोनों ही जगह उनका मन नहीं लगा। 1966 में राजीव गांधी भारत लौट आए और दिल्ली फ्लाइंग क्लब में ट्रेनिंग लेने के चार साल बाद उन्होंने पायलट के तौर पर एयर इंडिया में काम शुरू कर दिया। साफ शब्दों में कहें तो पूरा परिवार राजनीति में होने के बाद भी राजीव गांधी की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन एक विमान हादसे में छोटे भाई संजय गांधी की मौत के बाद अचानक उन्हें राजनीति में आना पड़ा। उन्होंने 16 फरवरी 1981 को अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया।
वो अमेठी से लोकसभा का चुनाव जीत कर सांसद बने। 31 अक्टूबर 1984 को अंगरक्षकों द्वारा प्रधानमन्त्री इन्दिरा गांधी की हत्या कर दी गई। देश में माहौल बहुत खतरनाक हो गया। हालात ऐसे हो गए थ कि राजीव गांधी को उसी दिन प्रधानमंत्री पद की शपथ लेनी पड़ी और वहीं अगले आम चुनावों में सबसे अधिक बहुमत पाकर प्रधानमन्त्री बने रहे। अमिताभ बच्चन के साथ राजीव गांधी की सबसे गहरी दोस्ती थी। वो स्कूल में साथ ही पढ़ते थे। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राजीव गांधी का बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन से तब से याराना था, जब वो चार साल के हुआ करते थे। अमिताभ बच्चन जब स्ट्रगल कर रहे थे, उस वक्त राजीव गांधी उनसे मिलने मुंबई गए। जब भी राजीव गांधी मुंबई आते थे तो अमिताभ उनको रिसीव करने जाते थे और पूरे समय साथ रहते थे।