आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने कांग्रेस सरकार द्वारा पंजाब विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र को लोकदिखावा करार देते हुए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से पूछा कि विधानसभा के विशेष सत्र में पंजाब और पंजाब वासियों के हितों के लिए क्या विशेष किया है? ‘आप’ के वरिष्ठ एवं नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि चन्नी सरकार ने विधानसभा के विशेष सत्र के नाम पर केवल ड्रामा ही किया और इस ड्रामे पर कांग्रेस सरकार ने पंजाब के करोड़ों रुपये बर्बाद किए हैं। पार्टी मुख्यालय में शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अपना अंतिम विधानसभा सत्र जरूर किया लेकिन पंजाब को बर्बाद करने वाले फैसले और समस्याएं आज भी जस की तस हैं। कांग्रेस के पौने पांच वर्षों के राज में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी, प्राइवेट बिजली खरीद समझौते, बेरोजेगारी समेत नशा, केबल, रेत और ट्रांसपोर्ट माफिया आदि मुद्दों के संबंध में कांग्रेस ने केवल राजनीति ही की है, लेकिन असल में पंजाब और पंजाबियों के हितों के लिए कोई भी ठोस फैसला नहीं किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से लेकर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समेत अन्य नेता प्राइवेट बिजली समझौते रद्द करने की बातें करते रहे। लेकिन अब चरणजीत सिंह चन्नी की अगुवाई वाली सरकार और नवजोत सिंह सिद्धू की अगुवाई वाली कांग्रेस ने बिजली समझौते रद्द न करके केवल बिजली दरों को संशोधित करने की बात कहकर महज खानापूर्ति की है।
हरपाल सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने विशेष सत्र के नाम पर संविधान और लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई हैं, क्योंकि पंजाब विधानसभा के सत्र महीनों के होते हैं। लेकिन पहले अकाली-भाजपा सरकार ने सत्र महीनों से घटाकर दिनों के किए और अब कांग्रेस सरकार ने दिनों से भी कम करके चंद घंटे के कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह और अब चरणजीत सिंह चन्नी लोक मुद्दों का सामना करने से बच रहे हैं। इतना ही नहीं सत्र के दौरान दल-बदलू कानून को पांव तले मसलकर विरोधी विधायकों को दल-बदल के लिए उत्साहित किया गया है। पंजाबी भाषा संबंधी लाए गए बिल का ड्राफ्ट अंग्रेजी भाषा में पेश करके कौन-सी मातृभाषा की सेवा की गई। बीएसएफ मामले पर निंदा कर काम चला लिया गया। इस तरह यह विशेष सत्र पंजाब के लोगों के हितों पर खरा नहीं उतरा। हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब की समस्याओं पर खुले मन से विचार करने के लिए विधानसभा सत्र कम से कम 15 दिनों का और चैनलों पर सीधा प्रसारण करना चाहिए था। लेकिन चन्नी सरकार ने मीडिया के कैमरों पर पाबंदी लगाई रखी। उन्होंने सवाल किया कि चंद घंटों के सत्र के दौरान शोर-शराबे में 2-4 मिनट की बहस के साथ पंजाब के बड़े मामले कैसे हल हो सकते हैं? जबकि बेरोजगारी, किसानी-कर्जे, हजारों आउटसोर्सिंग कर्मचारी, मुलाजिम और पेंशनर, सरकारी कॉलेजों के गेस्ट फैकेल्टी टीचरों समेत कपास और एनआरएचएम मुलाजिमों के ज्वलंत मुद्दे सरकार से जवाब मांगते हैं। सुखपाल खैहरा के संबंध में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए चीमा ने कहा कि खैहरा परिवार को ‘आप’ सुप्रीमो पर झूठे आरोप लगाने के बजाय सच लोगों के सामने रखना चाहिए ,क्योंकि कभी सुखपाल खैहरा इस केस के लिए अकाली दल, कभी कांग्रेस और कभी भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हैं।चीमा ने कांग्रेस सरकार पर पंजाब के मुद्दों से भगने के आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश के लोक मुद्दों पर जिस प्रकार की खानापूर्ति कांग्रेस सरकार और पार्टी द्वारा की गई है, पंजाब के लोग भी ऐसी खानापूर्ति 2022 में कांग्रेस पार्टी की करेंगे।
13 नवंबर को आप करेगी मुख्यमंत्री के आवास का घेराव: चीमा
नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि आम आदमी पार्टी 13 नवंबर को चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के सरकारी आवास का घेराव किया जाएगा, क्योंकि चन्नी सरकार ने आम घरों के बेटे-बेटियों को छोडक़र मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के दामाद तरूणबीर सिंह लहल को सरकारी नौकरी देने समेत प्रदेश के ज्वलंब मुद्दों को विधानसभा के सत्र के दौरान अनसुना किया है। उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान विपक्षी दल की आवाज को दबाया गया और पत्रकारों को सदन में जाने से रोका गया। इसलिए अब आम आदमी पार्टी सडक़ पर आकर पंजाब के मुद्दों को पत्रकारों और लोगों के सामने रखेगी।