शिरोमणी अकाली दल ने आज मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से कहा है कि वह वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल तथा स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू समेत सभी अयोग्य मंत्रियों को मंत्रीमंडल से बाहर कर दें। पार्टी ने कहा कि यदि ऐसा न किया गया तो राज्य में वित्तीय तथा स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बद से बदतर हो जाएगी।यहां एक प्रेस बयान जारी करते हुए श्री एनके शर्मा ने कहा कि ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री ने साढ़े तीन साल के बाद यह महसूस कर लिया है कि उसका वित्तमंत्री सबसे अयोग्य है। उन्होने कहा कि नही तो राज्य के लिए वित्तीय नीतियां बनाने तथा राज्य की आर्थिकता को लाईन पर लाने वाले तरीके ढ़ूंढने के लिए मुख्यमंत्री को विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाने की कोई आवश्यकता नही थी। उन्होने कहा कि यह सब वित्तमंत्री की जिम्मेदारी होती है, पर ऐसा लगता है कि कैप्टन अमंरदिर सिंह ने महसूस कर लिया है कि मनप्रीत बादल इस काम के योग्य नही है। इसीलिए मुख्यमंत्री ने यह जिम्मेदारी अब पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह तथा मोंटेक सिंह आहलूवालिया को दे दी है। किसी भी वितमंत्री की योग्यता पर इससे बड़ा प्रश्न चिन्ह नही लग सकता। मनप्रीत बादल को अपना पद छोड़ देना चाहिए तथा किसी योग्य व्यक्ति को राज्य की आर्थिकता को बुरे हालातों से बाहर निकालने की अनुमति दी जानी चाहिए।पूर्व मुख्य संसदीय सचिव ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिद्धू को भी तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होने कहा कि बलबीर सिद्धू के नेतृत्व में कोविड से निपटने में पंजाब का देश भर में सबसे खराब रिकॉर्ड है। उन्होने कहा कि राज्य में कोविड से हुई मृत्यु दर सबसे ज्यादा यानि 6 फीसदी है जबकि इसके पड़ोसी राज्य हरियाणा में यह दर सिर्फ एक फीसदी है। उन्होने कहा कि ऐसा लगता है कि स्वास्थ्य मंत्री कोविड की रोकथाम की बजाय राज्य में अपना शराब का कारोबार पुनः प्रारंभ करने में रूचि रखता है। उन्होने कहा कि मोहाली राज्य में अवैध शराब की बिक्री का गढ़ बन चुका है। ऐसा लगता है कि बलबीर सिद्धू कोविड संकट से निपटने की बजाय शराब की होम डिलीवरी में ज्यादा दिलचस्पी रखता है।श्री शर्मा ने कहा कि बलबीर सिद्धू को शर्म आनी चाहिए कि यह बात अच्छी तरह जानते हुए कि श्री हजूर साहिब से श्रद्धालुओं तथा राजस्थान में कोटा के छात्रों को लाने के लिए शीघ्र प्रयास किए जा रहे थे, स्वास्थ्य मंत्री ने 15 दिनों तक कुछ नही किया। उन्होने कहा कि श्रद्धालुओं तथा छात्रों को क्वारंटाइन के आदेश 27 अप्रैल को जारी किए गए जबकि वह दो दिन पहले राज्य में पहुंच चुके थे तथा उन्हे घर भेज दिया गया था। उन्होने कहा कि यही वह व्यक्ति हैं, जो कोविड पॉजीटिव के तौर पर सामने आ रहे हैं। इस बड़ी लापरवाही के लिए बलबीर सिद्धू को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए तथा उसे बर्खास्त कर देना चाहिए।