देश के सफलतम सुपर सोनिक ब्रह्मोस मिसाईल के रचयिता डॉ सुधीर मिश्रा आज लवली प्रोफैशनल यूनिवर्सिटी पहुंचे जहां उन्होंने एलपीयू के 554 वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं को उनकी अभूतपूर्व प्राप्तियों के लिए स मानित किया। यह अवसर था एलपीयू कैंपस में आयोजित ' अनुसंधान समारोह तथा एलपीयू के इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के साथ विस्तृत बातचीत का। उल्लेखनीय वैज्ञानिक व मिनिस्ट्री ऑफ डिफैंस के डीआरडीओ में ब्रह्मोस के डायरैक्टर जनरल, डॉ सुधीर मिश्रा ब्रह्मोस ऐरो स्पेस, जो कि भारत व रूस का एक संयुक्त अभियान है, के सीईओ और मैनेजिंग डायरैक्टर भी हैं। अपनी शिक्षा के लिए कभी भी किसी विदेशी यूनिवर्सिटी में न जाने वाले डॉ मिश्रा देश की बेहतरीन शिक्षा पद्धति में यकीन रखते रहे और उन्होंने आज सबके सामने इस बात कोउजागर कर दिखाया है। डॉ मिश्रा ने एलपीयू के विद्यार्थियों को प्रेरित किया और उन्हें सदैव साकारात्मक व विश्वास से भरे रहते हुए अपने अन्दर उसी तरह की ऊर्जा व आकर्षण बनाए रखना चाहिए जैसे कि वे आज दिख रहे हैं।
इस इवैंट की मुख्य बात
कैंपस में ही 'सैंटर फार स्पेस रिसर्च विद स्पेस मिशन कंट्रोल फैसिलिटी का उद्घाटन डॉ मिश्रा के कर-कमलों द्वारा किया जाना रही। इसके अन्दर विद्यार्थी सैटेलाईटस से जुड़ी विभिन्न बातों का अध्ययन कर सकेंगे और अपनी वैज्ञानिक गतिविधियों को जारी रखेंगे। सभी को संबोधित करते हुए डॉ मिश्रा ने नए विचारों से धन की अर्जना करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा-'वर्तमान में अधिकतर सेवाएं ज्ञान, नवीनता और नई टैकनोलॉजी के प्रति हैं। जब कोई धन पैदा करने की बात करता है तो यह किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं है। नए विचारों में क्षमता होनी चाहिए कि धन की अर्जना हो। रिसर्च केवल रिसर्च के लिए ही पर्याप्त नहीं है। धन की अर्जना समूचे समाज को सहायक होती है और इसके प्रति ज्ञान की आवश्यकता होती है। मै समझता हूं कि एलपीयू और देश में इस प्रकार के सभी तत्व मौजूद हैं। मैं प्रसन्न हूं कि एलपीयू ने इस ओर बेहतरीन प्रयास किया है।उन्होंने भविष्य की डिफैंस टैकनोलॉजी के बारे में भी बात की।वास्वत में, एलपीयू में ही आयोजित 106वीं इंडियन साईंस कांग्रेस जहां प्रधानमंत्री मोदी जी ने 'जय अनुसंधान का नारा दिया था उसी को समर्पित 'अनुसंधान समारोह एलपीयू में आयोजित किया गया है जहां एलपीयू के 554 वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को पुरस्कृत किया गया। इसके प्रति लगभग 60 लाख रुपए की राशि वितरित की गई।डॉ मिश्रा का स्वागत करते हुए एलपीयू के चांसलर श्री अशोक मित्तल ने सांझा किया कि एलपीयू में उद्घाटित हुआ सैंटर एक रिसोर्स सैंटर की भांति कार्य करेगा और वह न केवल एलपीयू अपितु अन्य यूनिवर्सिटियों, कालेजों, स्कूलों और पड़ोसी देशों के लिए भी एक लैब की तरह कार्य करेगा। मैं चाहता हूं कि अगले वर्ष ही एलपीयू की ओर से एक सैटेलाईट ऑरबिट में जाए। एलपीयू के रिसर्च डिवीजन की हैड प्रो डॉ गीता ने बताया कि एलपीयू के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं में बड़ी इच्छा है कि वे इंटरनैशनल स्पेस सैंटर से क युनिकेट कर सकें और अपनी रिसर्च के प्रति बहुत सारे चित्र प्राप्त कर सकें।