पंजाब के भूमि और जल संरक्षण विभाग ने जिला कपूरथला में आते फगवाड़ा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के ट्रीटेड पानी की सिंचाई के लिए सुचारू उपयोग के लिए पुरस्कार जीता है।इस सम्मान समारोह का आयोजन विज्ञान भवन, नई दिल्ली में चल रहे 6वें इंडिया वाटर वीक-2019 के दौरान किया गया था, जिसका उद्घाटन 24 सितंबर को भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद द्वारा किया गया था। यह पुरस्कार केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, जल शक्ति मंत्री श्री रतन लाल कटारिया और श्री यू.पी. सिंह, सचिव जल संसाधन विभाग, भारत सरकार की उपस्थिति में दिये गये। राज्य सरकार की ओर से यह पुरस्कार मुख्य भूमि पाल पंजाब श्री धर्मेंद्र शर्मा द्वारा प्राप्त किया गया। राष्ट्रीय जल मिशन द्वारा घोषित कुल 23 पुरस्कारों में से पंजाब के भूमि और जल संरक्षण विभाग को ‘जल संरक्षण, विकास और सुरक्षा के लिए नागरिक और राज्य स्तरीय उद्यमों को बढ़ावा देना’ श्रेणी के तहत यह मूल्यवान पुरस्कार दिया गया है।प्रोजैक्ट संबंधी बात करते हुए मुख्य भूमि पाल, धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि 2017 में फगवाड़ा एसटीपी से ट्रीटेड पानी के संचार के लिए लगभग 12 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क पूरा किया गया। इस एसटीपी का डिस्चार्ज 28 एमएलडी है और ट्रीटेड पानी से 260 किसान परिवारों के लगभग 1050 एकड़ क्षेत्र की सिंचाई हो रही है।सतही जल संसाधनों की कमी के कारण सिंचाई जरूरतों को पूरा करने के लिए यह क्षेत्र पूरी तरह से भूजल पर निर्भर है, जिससे भूजल का स्तर कम हो गया है। इस प्रोजैक्ट से पूरा साल एसटीपी का ट्रीटेड पानी उपलब्ध होने के कारण किसानों की भूजल पर निर्भरता कम हुई है।मुख्य भूमि पाल श्री धर्मेंद्र शर्मा ने यह भी बताया कि पंजाब इस तरह के प्रोजैक्ट शुरू करने वाला अग्रणी राज्य है और राज्य के विभिन्न शहरों और कस्बों के1700 एमएलडी गंदे जल को एसटीपी प्लांटों में ट्रीट करके लगभग 60,000 हेक्टेयर भूमि को गैर-पारंपरिक सिंचाई जल स्रोत उपलब्ध कराने की क्षमता है। इस दिशा में एसटीपी प्लांटों में 280 एमएलडी ट्रीटेड पानी को 8500 हेक्टेयर रकबे की सिंचाई के लिए 40 स्थलों पर बुनियादी ढांचे का निर्माण पहले ही पूरा कर लिया है। राज्य सरकार ने हाल ही में 25 कसबों के लिए इस तरह के सिंचाई ढांचे के निर्माण के लिए एक नया प्रोजैक्ट को मंजूरी दी गई है।उल्लेखनीय है कि नेशनल वाटर मिशन जलवायु बदलाव के राष्ट्रीय एक्शन प्लान (एनएपीसीसी) के 8 मिशनों में से एक है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य ‘जल का संरक्षण, व्यर्थ प्रयोग को कम करना और एकीकृत जल संसाधनों के विकास और प्रबंधन के द्वारा राज्यों के मध्य और उनमें पानी का उचित वितरण सुनिश्चित करना है।’