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कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा राम विलास पासवान के साथ मुलाकात

31000 करोड़ रुपए के अनाज खाते के मसले के हल के लिए वित्त मंत्री के साथ सांझी मीटिंग करने के लिए कैप्टन अमरिन्दर सिंह का सुझाव पासवान द्वारा मंजूर

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5 Dariya News

नयी दिल्ली , 27 Jun 2019

Last updated on: Jun 27, 2019, 00:00 IST

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा 31000 करोड़ रुपए के लम्बित पड़े अनाज खाते के मसले के हल के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ सांझी मीटिंग करने की की गई अपील को स्वीकार कर लिया है।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज दोपहर यहाँ केंद्रीय मंत्री के साथ मीटिंग की। इसके बाद एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि श्री पासवान ने केंद्रीय बजट सत्र के बाद मीटिंग करने की सहमति दी है।केंद्रीय मंत्री ने अतिरिक्त भंडारण क्षमता सृजन करने के लिए भी पंजाब को इजाज़त देने की सहमति दी जिससे राज्य इस रबी सीजन के दौरान फ़सल को भंडार करने की बड़ी कमी की समस्या से निपटा जा सके। प्रवक्ता ने बताया इस सम्बन्धी अपेक्षित कार्यवाही आरंभ की जायेगी।कैप्टन अमरिन्दर सिंह गेहूँ के खरीद सीजन के दौरान राज्य में भारीे बेमौसमी बारिश से गेहूँ के दानों को पहुँचे नुक्सान के लिए खरीद के मापदण्डों में ढील हासिल करने में भी सफल हुए।इस मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने 31000 करोड़ रुपए के अनाज खाते के मसले को भी उठाया जो पिछली सरकार से विरासत में मिला था। यह मामला नीति आयोग के मैंबर रमेश चंद के नेतृत्व वाली कमेटी को भेजा हुआ है। श्री रमेश चंद 15वें वित्त आयोग के मैंबर हैं। यह कमेटी पंजाब सरकार के कजऱ्े सम्बन्धी उन सभी पक्षों का अध्ययन करेगी जो भारतीय खाद्य निगम/खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के हवालों से सी.सी.एल के रूप में एकत्रित हुआ है। मुख्यमंत्री ने इस मसले के जल्दी हल के लिए श्री पासवान के निजी दख़ल की भी माँग की।गेहूँ के दानों को पहुँचे नुक्सान के सम्बध में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि भारत सरकार ने 9 जि़लों को 8 मई, 2019 से मापदण्डों में ढील की इजाज़त दी थी जबकि इस समय तक तो बहुत सी खरीद मुकम्मल हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने भारत सरकार को 26 अप्रैल 2019 को पत्र लिखकर राज्यभर में सीजन के दौरान गेहूँ की खरीद की समुची मात्रा के लिए ढील माँगी थी और भारत सरकार को यह ढील 26 अप्रैल से दी जानी चाहिए जबकि इसी तारीख़ से भारतीय खाद्य निगम के निरीक्षण के लिए सबसे पहले माँग की गई थी।अनाज के भंडारण की गति धीमी होने पर चिंता ज़ाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने श्री पासवान को बताया कि राज्य सरकार को अनाज के लिए भंडारण करने के बड़ी कमी का सामना करना पड़ रहा है। 

उन्होंने बताया कि प्रांतीय एजेंसियों द्वारा इस समय 160 लाख मीट्रिक टन गेहूँ और 160 लाख मीट्रिक धान की फ़सल का भंडारण किया गया जबकि 96 लाख मीट्रिक गेहूँ खुले में पड़ी है और एक साल से अधिक समय पहले खऱीदी 10.5 लाख मीट्रिक गेहूँ अभी तक खुले में भंडारण की हुई है। राज्य से अनाज को उठाने की गति धीमी होने के नतीजे के तौर पर राज्य को अगले साल गेहूँ के वैज्ञानिक ढंग से भंडारण के लिए बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।आढ़तियों और प्रशासन की राशि की अदायगी को रोकने का जि़क्र करते हुए मुख्यमंत्री ने श्री पासवान को यह राशि तुरंत जारी करने की अपील की। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बताया कि पंजाब राज्य खेती उत्पादन मंडी एक्ट 1961 के उपबंधों के अंतर्गत इस राशि की अदायगी आढ़तियों को की जाती है और प्रशासनिक राशि का प्रयोग अनाज भंडारण के रख-रखाव के साथ-साथ वेतन की अदायगी और अन्य खर्चों के लिए की जाती है।सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को लागू करने में राज्य के नाकाम रहने पर भारत सरकार ने इस राशि की अदायगी रोकी हुई है। यह प्रणाली भारत सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य की अदायगी किसानों के बैंक खातों में ऑनलाईन भेजने को देख सकने की इजाज़त देती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने 10 लाख से अधिक किसानों में से 6 लाख किसानों की जानकारियां इस प्रणाली के अंतर्गत अपलोड कर दी गई हैं और सरकार इस प्रणाली को लागू करने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने बताया कि यह लम्बा समय लेने वाली प्रक्रिया है और 20 हज़ार से अधिक आढ़तियों को इस प्रणाली का प्रशिक्षण देने की ज़रूरत है क्योंकि फ़सल की अदायगी आढ़तियों के द्वारा की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि हरियाणा ने तो अभी तक इस प्रणाली को लागू ही नहीं किया।निगरानी और रख-रखाव की राशि रोकने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने श्री पासवान को वहन किये असली खर्चों के आधार पर राज्य को इस राशि की अदायगी तुरंत करने की माँग की। उन्होंने बताया कि साल 2007 के बाद खुले में गेहूँ के भंडारण के लेखों में 750 करोड़ रुपए रोके हुए हैं चाहे कि इससे पहले इन दरों की अदायगी की जाती रही है। इसी तरह राज्य ने निगरानी और रख-रखाव के एवज़ में 608 करोड़ रुपए का ख़र्च वहन किया है। इसके विपरीत भारत सरकार ने आरज़ी तौर पर 300 करोड़ रुपए जारी किये और बाकी राशि इस मसले के स्पष्टीकरण को लेकर रोक लगा दी।इस मौके पर मुख्यमंत्री के साथ राज्य के खाद्य और सिविल सप्लाईज़ मंत्री भारत भूषण आशु, संसद मैंबर परनीत कौर, चौधरी संतोख सिंह और गुरजीत सिंह औजला, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, प्रमुख सचिव तेजवीर सिंह और विशेष प्रमुख सचिव गुरकिरत कृपाल सिंह उपस्थित थे। 

 

Tags: Ram Vilas Paswan , Amarinder Singh

 

 

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