पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने कहा है कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल एजुकेशन गारंटी स्कीम (ई.जी.एस) व अन्य केन्द्र प्रायोजित स्कीमों के तहत काम कर रहे शिक्षा वलंटियरों के वेतन तय करने के मामले में लोगों को धोखा दे रही है। बाजवा ने कहा है कि शिक्षा वलंटियरों के वेतन तय करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है, न कि केन्द्र की। उन्होने कहा के बादल यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि ई.जी.एस. व ई.टी.टी. अध्यापकों को दिए जाने वाले मेहनताने में बढ़ोतरी न होने के लिए केन्द्र सरकार जिम्मेदार है। जबकि केन्द्र पंजाब सरकार को एस.एस.ए व आर.एम.एस. के तहत ठेके पर काम करने वाले अध्यापकों के वेतन तय करने के मामले में पहले ही जानकारी दे चुका है।
उन्होंने कहा कि तत्कालीन केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने ८ नवंबर, २०११ में बादल द्वारा लिखे पत्र के जवाब में कहा था कि यदि राज्य सरकार ठेके पर काम कर रहे अध्यापकों का मेहनताना बढ़ाना चाहती है, तो न सिर्फ केन्द्रीय स्कीमों बल्कि राज्य सरकार के अधीन भी ठेके पर काम करने वाले सभी अध्यापकों के संबंध में उचित फैसला लिया जाना चाहिए। बाजवा ने कहा कि मानव संसाधन मंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि यदि राज्य सरकार ठेके पर काम करने वाले अध्यापकों का मेहनताना बढ़ाना चाहती है या फिर उनको पक्का करना चाहती है, तो राज्य सरकार उचित आदेश जारी कर सकती है। राज्य का स्कूल शिक्षा विभाग भी एस.एस.ए व रमसा के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड के पास इन आदेशों को विचारने हेतु भेज सकता है। यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह प्रस्ताव को वाॢषक वर्क प्लान व सालाना बजट का हिस्सा बनाए। बाजवा ने कहा कि बादल इस मुद्दे पर अध्यापकों को धोखा दे रहे हैं। उन्होंने बादल को अध्यापकों के वेतन बढ़ाने को कहा है। उन्होंने कहा कि शर्मनाक बात है कि अकाली-भाजपा सरकार ई.जी.एस. अध्यापकों को २५०० रुपए प्रतिमाह दे रही है। जबकि गैर हुनरमंद वर्करों को ९००० रुपए प्रतिमाह दिया जाता है।