पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कर्ज़े के जाल में फंसे किसानों की सहायता न करने पर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर बरसते हुए कहा है कि यदि केंद्र ने किसानों के प्रति अपना व्यवहार न बदला तो पंजाब सहित देश के अन्य राज्यों में किसानों की आत्महत्याओं की घटनाएँ नहीं रुकेंगी।पंजाब सरकार की कजऱ् राहत स्कीम के तीसरे चरण की शुरुआत करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि राज्य अपने तौर पर किसानों को कजऱ्े के संकट में से नहीं निकाल सकते और इसलिए केंद्र को चाहिए कि वह किसानों की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा किसानों के लिए किये जा रहे यत्न अपर्याप्त हैं इसलिए केंद्र सरकार किसानों का कजऱ् माफ करे।मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार को विरासत में 2.08 लाख करोड़ का कजऱ् मिला था, जिस कारण वह पंजाब सरकार के सीमित साधनों में से जो अधिक से अधिक हो सकता था, वह किसानों के लिए कर रहे हैं। उन्होंने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की माँग करते हुए कहा कि वह इस मामले पर अनेकों बार प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को मिलकर माँग कर चुके हैं परन्तु वह किसानों की गंभीर स्थिति को समझने में नाकाम रहे हैं।मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि इस चरण के अंतर्गत सहकारी बैंकों के 1.42 लाख किसानों को 1009 करोड़ की कजऱ् राहत दी जायेगी। उन्होंने कहा कि तीसरे चरण के मुकम्मल होने के उपरांत चौथे चरण के अंतर्गत व्यापारिक बैंकों के 18000 किसानों को कजऱ् राहत स्कीम अधीन कवर किया जायेगा। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार की तरफ से किसानों को कजऱ्े से राहत प्रदान करने के लिए छोटे और सीमांत किसानों के लिए 2 लाख रुपए प्रति किसान कजऱ् राहत स्कीम की शुरुआत की गई है।इस मौके पर जलसे को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से सहकारी बैंकों के 3.18 लाख सीमांत किसानों को 1815 करोड़ रुपए की कजऱ् राहत स्कीम के अंतर्गत लाभ पहुँचाने के अलावा व्यापारिक बैंकों के 1.04 लाख छोटे किसानों को 1689 करोड़ की कजऱ् राहत प्रदान की जा चुकी है। तीसरे चरण के दौरान रोपड़ जिले के कुल लाभार्थीयों में से 2413 किसानों ने आज 17.74 करोड़ के कजऱ् राहत सर्टिफिकेट प्राप्त किये।
पंजाब सरकार की तरफ से फसलों के अवशेष को आग लगाने के प्रचलन को रोकने के लिए किये गए विशेष प्रयासों बारे जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री पंजाब ने बताया कि 'तंदुरुस्त पंजाब मिशन के अंतर्गत राज्य सरकार की तरफ से पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी के सहयोग से किसानों को फसलों के अवशेष को आग लगाने से होने वाले बुरे प्रभावों से अवगत करवाने के लिए विशेष मुहिम चलाई गई है। उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि की 27500 आधुनिक मशीनों की निजी खरीद पर 50 प्रतिशत और सहकारी ग्रुपों की तरफ से खरीद पर 80 प्रतिशत सब्सिडी देने पर 250 करोड़ रुपए की राशि ख़र्च की गई है। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अगले साल फसलों के अवशेष के सभ्य संभाल के लिए 40000 मशीनों की खरीद पर 400 करोड़ रुपए ख़र्च किये जाएंगे।मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके अलावा साल 2018 के खरीफ की फ़सल सीजन के दौरान आवश्यकता अनुसार खादों का प्रयोग करने के लिए किसानों को प्रेरित करने सम्बन्धी मुहिम चलाई गई जिसके परिणाम स्वरूप युरिया और डी.ए.पी.खादों के प्रयोग में क्रमवार एक लाख और 46 हज़ार मीट्रिक टन की कमी संभव हो सकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राज्य में नकली बीजों और खेती कीटनाशकों की बिक्री को रोकने के लिए 24 घंटे निगरानी रखने के लिए वचनबद्ध है।मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने फसलों के अवशेष को आग न लगाने के कारण खेत की जुताई और उसे तैयार करने में आ रहे अतिरिक्त ख़र्च की भरपायी के लिए कोई मुआवज़ा भी नहीं दिया। उन्होंने इस प्रोपगंडे को भी सिरे से खारिज किया कि दिल्ली में प्रदूषण के लिए पंजाब के किसान जि़म्मेदार हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण सड़कों के बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने के लिए पंजाब सरकार की तरफ से 30 जून तक 61000 किलोमीटर ग्रामीण लिंक सड़कों में से 2000 करोड़ की लागत से 16000 किलोमीटर ग्रामीण लिंक सड़कों को मज़बूत करने के अलावा ग्रामीण लिंक सड़कों पर पुलों की मुरम्मत पर 200 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार की तरफ से किसानों को उनकी फसलों के बढिय़ा मंडीकरण की सहूलतें प्रदान करने के लिए पंजाब मंडी बोर्ड को सभी अनाज और सब्ज़ी मंडियों की मुरम्मत और सुधार के लिए 700 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे चरण के दौरान जून, 2020 तक 14000 किलोमीटर ग्रामीण लिंक सड़कों को 1400 करोड़ रुपए की लागत से मज़बूत किया जायेगा। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त सड़कों की मुरम्मत पर दिसंबर, 2020 तक 750 करोड़ रुपए और ग्रामीण लिंक सड़कों के पुलों की मुरम्मत और नवीनीकरन पर भी दिसंबर 2020 तक 200 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे जिस पर कार्य शुरू हो चुका है।किसानों को मानक बासमती चावल पैदा करने के लिए जागरूक करने बारे पंजाब सरकार की तरफ से किये जा रहे अहम प्रयासों बारे बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को बासमती फ़सल में सुधार के लिए खेती कीटनाशकों के प्रयोग बारे जागरूक किया जा रहा है जिससे वे अंतरराष्ट्रीय स्तर की बासमती पैदा करके बढिय़ा मूल्य लेने के योग्य हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि बासमती का पिछले साल 2600 -3600 प्रति क्विंटल के मुकाबले इस साल 3600 -4000 प्रति क्विंटल मूल्य मिला है। मंडी बोर्ड की तरफ से शुरू की गई ई-नाम प्रोजैक्ट की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ई-नाम 19 मंडियों में किसानों को उनकी फसलों का ऑनलाईन बोली के द्वारा बढिय़ा मूल्य दिलाने के लिए शुरू की गई है और भविष्य में इस स्कीम के अंतर्गत 16 अन्य मंडियों का नवीनीकरण किया जायेगा।किसानों को उनकी पिछली चार फसलों की निर्विघ्न खरीद और इस साल भी गेहूँ की सुचारू खरीद का भरोसा देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले सीजऩ के दौरान भी उनकी फसलों की निर्विघ्न ढंग से खरीद की जाएगी।इस अवसर पर मुख्य तौर पर पंजाब विधानसभा के स्पीकर राणा के.पी. सिंह, कैबिनेट मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, जि़ला कांग्रेस के प्रधान बरिन्दर सिंह ढिल्लों, पूर्व विधायक लव कुमार गोलडी, सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव सरवजीत सिंह, सहकारिता विभाग के सचिव विकास गर्ग, कृषि विभाग के सचिव काहन सिंह पन्नू, रूपनगर डिवीजऩ के कमिशनर आर.के. कौशिक, डिप्टी कमिशनर सुमित जारंगल और एस.एस.पी स्वप्न शर्मा उपस्थित थे।