सरकार, हिमाचल प्रदेश को सभी राज्यों में सबसे स्वस्थ प्रदेश बनाना चाहती है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ”मुख्यमन्त्री निरोग योजना“ स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित की जा रही है।यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, विपिन सिंह परमार ने सोमवार को ननाओं में जनसस्याओं को सुनने के उपरांत लोगों को दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश का हर व्यक्ति स्वस्थ्य रहे, इसके लिए लोगों का सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण किया जायेगा। इसमें रक्त, सूगर, रक्तचाप परीक्षण के अलावा दृष्टि जाँच तथा अन्य लैब परीक्षण करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे आरम्भिक अवस्था में ही सम्भावित समस्याओं के बारे में पता लग जाएगा तथा शीघ्र निदान एवं चिकित्सा मिलने से लम्बी अवधि तक रहने वाली बीमारियों से बचाव होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रदेश में 200 वैलनैस सेंटर आरंभ किये जायेंगे।श्री परमार ने कहा कि सरकार प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर है तथा प्रदेश के लोगों को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए कटिबद्ध है।उन्होंने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में, निजी अस्पतालों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है और इसके लिए ”स्वास्थ्य में सहभागिता योजना“ आरंभ की गई है। इस योजना में चुने हुए ग्रामीण क्षेत्र में एलोपैथिक निजी अस्पताल स्थापित करने पर 1 करोड़ तक के निवेश पर 25 प्रतिशत उपदान तथा तीन वर्षों तक 5 प्रतिशत ब्याज उपदान दिया जाएगा।स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश के जरूरतमंद, गरीब लोग जो गम्भीर बीमारियों से पीड़ित हैं को चिकित्सा सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से ”मुख्यमन्त्री चिकित्सा सहायता कोष“ का गठन किया गया है और इसके लिए 10 करोड़ का बजट में प्रावधान किया भी गया है। इससे पहले श्री परमार ने ननाओं सैंकड़ों लोगों की समस्याओं को सुना और इनका मौके पर निपटारा किया।रविवार देर सायं स्वास्थ्य मंत्री ने सुलह विधान सभा क्षेत्र के सालन में जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने यहां लोगों को आश्वासन दिया कि पुनर्सीमांकन के पश्चात सुलह हलके में शामिल हुई इन पंचायतों में लोगों की सुविधा के लिए एक स्वास्थ्य संस्थान खोला जायेगा, जिससे इस क्षेत्र के आसपास की लगभग 10 पंचायतों के लोगों को लाभ होगा। उन्होंने इस क्षेत्र में सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने का आश्वासन दिया।