शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री प्रिया सेठी ने आज कहा कि महिला वकीलों की समाज में विशेशकर घरेलु हिंसा तथा बाल दुर्व्यवहार के मामलों से निपटने में एक महत्वपूर्ण भूमिका है।बार एसोसिएशन जम्मू द्वारा आयोजित एक बैठक को सम्बोधित करते हुए मंत्री ने महिला वकीलों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि कानूनी पेशे में महिला प्रवेश एक उल्लेखनीय परिवर्तन है, जो समाज में समय के साथ अनुभव किया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के बाद मै अधिक महिलाओं को कानूनी पेशे में शामिल होते देख रहीं हुं तथा उनमें से ज्यादातर ने समय के दौरान अपनी योग्यता साबित की है।उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे में नारीवाद का यह प्रभाव कोई नई बात नही है। कई लड़कियां कानून विद्यालयों में अच्छे वकील, न्यायधीश या कारपोरेट वकील बनने के लिए शामिल हो रही हैं। उन्होंने कहा कि वकीलों के बीच महिलाओें का प्रतिशत अभी तक उत्साह जनक नही है। उन्होंने कहा कि एक समाज में यहां पर लिंग भेदभाव होता है तथा घरेलु हिंसा के मामले भी हैं और कहा कि राश्ट्रीय अपराध रिकार्ड व्यूरो का दर्जा बताता है कि बलात्कार के मामले में लम्बित मुकदमा 83 प्रतिशत है तथा महिलाओें को चाहिए कि इन पीडितों के लिए न्याय की तलाश के लिए वे कानून को अपने पेशे के रूप में चुनने के लिए आगे बढ़ें।इससे पूर्व महिला वकीलों की मांग में मंत्री ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से उच्च न्यायालय के पास एक उपयुक्त स्कूल की तलाश करने के लिए कहा यहां पर एक क्रैच खोला जा सके। वकीलों ने इसके उपरांत मंत्री को मांगों का एक ज्ञापन पेश किया तथा उचित स्नानघरों, लाकरों, आदि की मांग की।मंत्री ने जायज मांगों को सुनते हुए कौर टीम को प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा तथा कहा कि वह अपने सीडीएफ से वित सहायता उपलब्ध करवाएंगी।