लोक निर्माण मंत्री नईम अख्तर ने आज अभियंताओं डोडा से काष्तीगढ़ तक मुख्य सड़क पर काम की गति में तेजी लाने और अगले वर्श नवंबर के अंत तक इसे पूरा करने के लिए निर्देश दिया।मंत्री ने काष्तीगढ़ के दूरदराज गांव में जन शिकायत निवारण शिविर के दौरान लोगों की मांगों और शिकायतों को सुनने के बाद इन निर्देशों को जारी किया।विधायक डोडा शक्ति राज परिहार, मुख्य अभियंता पीडब्लूडी (आरएंडबी) सुधीर शाह, उपायुक्त डोडा भवानी रकवाल, जम्मू व कश्मीर परियोजनाएं निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक सैय्यद नईम अहमद, अधीक्षक अभियंता पीडब्ल्यूडी (आरएंडबी) सर्किल डोडा नियाज बांडे, अभियंता पीडब्ल्यूडी (आरएंडबी), पीएमजीएसवाई और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी शिविर में मौजूद थे। स्थानीय लोगों ने सड़क संपर्क, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा से संबंधित समस्याओं के बारे में मंत्री को बताया। उन्होनें गांनिका कोटली से किडल तक सड़क का निर्माण, बार्सी से तपनिल तक लिंक रोड, गांव में डिग्री कॉलेज की स्थापना और पीएचसी, कस्तीगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन की मांग की।
सभा को संबोधित करते हुए मंत्री ने बताया कि बनार मोहर से शामती, सरस से गगुआ और कलसू मोहर से हरसिंनाग तक महत्वपूर्ण सड़कों पर काम शुरू किया गया है और निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजनाओं को पूरा करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने अभियंताओं को मरसू पुल पर काम शुरू करने के लिए अपेक्षित औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए कहा।डोडा में गर्म मिश्रण संयंत्रों की कमी के कारण काम की धीमी रफ्तार पर चिंता व्यक्त करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार काष्तीगढ़ में एक इकाई स्थापित करने की संभावना पर विचार करेगी। उन्होंने लोगों से सरकारी संपत्ति को अपनी संपति की तरह समझ कर और समय पर सड़क परियोजनाओं को पूरा करने में अभिंताओं के साथ सहयोग करने का आग्रह किया।विधायक डोडा शक्ति राज परिहार ने अपने संबोधन में कहा कि गठबंधन सरकार ने राज्य के सभी हिस्सों के न्यायसंगत विकास के लिए कई तरह के कदम उठाए हैं और सड़क नेटवर्क में सुधार के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो कि किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए पूर्व-आवश्यकता है। ।दिन में, मंत्री ने षिवा के माध्यम से नाषला से कान्हल तक 4 किमी लम्बी सड़क की नींव रखी, जो कि नाबार्ड के तहत 287 लाख रुपये की लागत से पूरा होगी। उन्होंने निर्माणाधीन पॉलिटेक्निक कॉलेज, बीओली का भी निरीक्षण किया जो 13 करोड़ रुपये की लागत से जेकेपीसीसी द्वारा निष्पादित किया जा रहा है।