जिला एवं सत्र न्यायधीश और जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के अध्यक्ष पी.पी. रांटा ने कहा है कि पैरा लीगल वॉलंटियर्स आम लोगों व न्यायिक व्यवस्था के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करके सबको न्याय दिलाने और कानूनी जागरूकता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पी.पी. रांटा रविवार को देव सदन में जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की ओर से पैरा लीगल वॉलंटियर्स के लिए आयोजित एक कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे थे।उन्होंने कहा कि आम लोगों को न्याय दिलाने और उनमें कानूनी जागरूकता लाने के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण ने एक बहुत ही सरल व्यवस्था लागू की है। इसमें पैरा लीगल वॉलंटियर्स की अहम भूमिका है। पंचायत स्तर पर तैनात ये वॉलंटियर्स जहां लोगों को जागरूक कर सकते हैं, वहीं इन्हीं के साथ नियुक्त किए गए रिटेनर वकीलों के माध्यम से वे लोगों की कानूनी मदद भी कर सकते हैं।
रांटा ने बताया कि महिलाओं, बच्चों, एससी-एसटी, विकलांगों, आपदा प्रभावितों तथा सालाना एक साल से कम आय वाले लोगों को मुफ््त कानूनी सहायता का प्रावधान है। सभी पैरा लीगल वॉलंटियर्स इस सुविधा और अन्य कानूनी अधिकारों के बारे में लोगों को अवश्य जानकारी दें।इस अवसर पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश कंवर पवनजीत सिंह ने कहा कि बहुत से मामले लोक अदालतों और मध्यस्थता केंद्रों के माध्यम से भी निपटाए जा सकते हैं। अब महीने के हर दूसरे शनिवार को लोक अदालतें लगाई जाती हैं। इनकी प्रक्रिया बहुत ही आसान है। इनमें कोई कोर्ट फीस भी नहीं लगती है और मामलों का निपटारा भी तुरंत हो जाता है। ऐसे मामलों को सामने लाने में पैरा लीगल वॉलंटियर्स एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कुल्लू अमन सूद ने बताया कि आम लोगों की सुविधा के लिए न्यायिक परिसरों में फ्रंट ऑफिस भी स्थापित किए गए हैं। वॉलंटियर्स कानूनी मदद के लिए आम लोगों को फ्रंट ऑफिस में ला सकते हैं। इस मौके पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी लाहौल-स्पीति गौरव महाजन ने भी मुफ््त कानूनी सहायता, महिलाओं व बच्चों के अधिकारों, मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम व कई अन्य अधिनियमों की जानकारी दी।