हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष बी.बी.एल. बुटेल ने कृषि शोध एवं तकनीकी क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि भूमि व जल स्त्रोतों पर बढ़ते दबाव के दृष्टिगत विश्व भर में अनाज की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।श्री बुटेल प्रथम सितम्बर से 6 सितम्बर, 2013 तक जोहन्सबर्ग में आयोजित की जा रही 59वीं राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। वह भारत के राज्यों के सभी पीठासीन अधिकारियों में पहले अध्यक्ष हैं, जो कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देने की तकनीकी एवं शोध हंस्तातरण में सांसदों की भूमिका विषय पर विचार-विमर्श में भाग ले रहे हैं।
श्री बुटेल ने कहा कि हरित क्रांति व विकास में कृषि शोध व विस्तार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कृषि महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो न केवल खाद्य एवं पौष्टिक सुरक्षा व सतत् विकास को सुनिश्चित बनाता है बल्कि गरीबी उन्मूलन में भी सहायक है। उन्होंने कहा कि सांसदों द्वारा मीडिया में दिए गए वक्तव्य, सदन में उठाए गए प्रश्नों व चर्चा में भाग लेने इत्यादि से कृषि संबंधी महत्वपूर्ण मामले सामने आए हैं। सदस्यों द्वारा सरकार की विभिन्न कार्यक्रमों व नीतियों के कार्यन्वयन संबंधी बहुत से प्रश्न भी उठाए गए हैं। सांसदों को सुनिश्चित बनाना होगा कि वे कृषि विश्वविद्यालय व प्रशिक्षण केन्द्रों की शिक्षा संबंधी पहल का दोबारा निर्धारण करे और कृषि स्नातकों के लिए रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों को लेकर आएं और संबंध विषयों के बारे में उन्हें जानकारी दें कि वे किस प्रकार अपने ‘एग्रीक्लिनिक’ और कृषि व्यापार आरम्भ कर सकें।
अध्यक्ष ने कहा कि लगभग सभी विकासशील देशों में कृषि शोध व विकास के लिए बजट का निर्धारण बहुत कम है, जबकि कृषि शोध से छोटे किसान उत्पादकता बढ़ाने की क्षमता को विकसित कर सकते हैं। सांसदों को कृषि शोध व विकासात्मक गतिविधियों के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित बनाना चाहिए। सांसदों को क्षेत्रीय नेटवर्किंग और देशों में आपसी सहयोग के लिए नीति फ्रेमवर्क सुनिश्चित बनाना चाहिए और अन्तरराष्ट्रीय व्यापार संबंधी शोध व तकनीकी विकासात्मक मांगों की जरूरतों को आपसी सहयोग से पूरा कर सकते हैं।