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हिमाचल में भारी बारिश से 2900 करोड़ रुपये का नुकसान:मुख्यमंत्री

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5 दरिया न्यूज

शिमला , 16 Aug 2013

Last updated on: Aug 16, 2013, 00:00 IST

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में इस मॉनसून के दौरान भारी बारिश से अब तक सार्वजनिक एवं निजी सम्पत्ति को 2900 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जबकि बारिश का मौसम अभी भी जारी है। मुख्यमंत्री आज यहां भारी बारिश के दृष्टिगत निजी एवं सार्वजनिक सम्पत्ति को हुए नुकसान की समीक्षा के लिए आयोजित राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।वीरभद्र सिंह ने कहा कि इस वर्ष प्रदेश में मॉनसून के शीघ्र आगमन से 15 से 17 जून तक 576 से 1358 प्रतिशत असामान्य वर्षा दर्ज की गई, जो भारतीय मौसम विभाग के डाटा के अनुसार सामान्य बारिश से कहीं अधिक है। भारी बारिश से किन्नौर जिले में सर्वाधिक नुकसान हुआ, जहां 17 जून को 193.5 मिलीमीटर वर्षा रिकार्ड की गई, जो ऊंचाई वाले क्षेत्रों मे भारी बर्फबारी व एक दिन में सामान्य 0.7 मिलीमीटर वर्षा से कहीं अधिक थी। सिरमौर जिले में एक दिन में 1.8 मिलीमीटर सामान्य वर्षा के मुकाबले 17 जून को 136.8 मिलीमीटर वर्षा रिकार्ड की गई, जबकि राज्य के विभिन्न भागों में मूसलाधार बारिश दर्ज की गई। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों, सड़क सीमा संगठन एवं अन्य एजेंसियां द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति को सामान्य बनाने के लिए युद्धस्तर पर सराहनीय कार्य किया गयास। राज्य आपदा राहत कोष के अन्तर्गत त्वरित राहत के तौर पर 129.24 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिसमें से 57.57 करोड़ रुपये उपायुक्तों तथा 71.76 करोड़ रुपये विभिन्न विभागों को जारी किए गए। भारत सरकार को 1972 करोड़ रुपये के नुकसान का ज्ञापन प्रस्तुत किया गया तथा केन्द्रीय दल ने भी नुकसान का आकलन करने के लिए राज्य का दौरा किया। 14वें वित्तयोग के दल ने भी हाल ही में किन्नौर जिले का दौरा किया है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमण्डल की स्वीकृति के पश्चात् कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में 15 से 17 जून तक सामान्य तौर पर विशेषकर किन्नौर जिले में हुए नुकसान के लिए विशेष राहत पैकेज प्रदान किया गया। प्रदेश के किन्नौर जिले तथा अन्य प्रभावित क्षेत्रों में वरिष्ठ अधिकारियों, चिकित्सा दलों एवं बागवानी विशेषज्ञों को तैनात किया गया तथा इन क्षेत्रों में आवश्यक खाद्य आपूर्ति भी सुनिश्चित बनाई गई। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी बारिश एवं भू-स्खलन के दृष्टिगत 43 लोंगों की जानें गई, जिसमें सर्वाधिक 23 व्यक्तियों की किन्नौर में मृत्यु हुई। इसके अलावा शिमला में सात, सिरमौर में पांच, कांगड़ा में चार, मण्डी में दो तथा चम्बा तथा हमीरपुर जिलों में प्रत्येक में एक-एक व्यक्ति की मृत्यु हुई। उन्होंने कहा कि 24145 पशुधन का नुकसान हुआ, जो 5.51 करोड़ रुपये है। 5092 मकानों/गौशालाओं/श्रमिक के वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में कृषि एवं बागवानी क्षेत्रों में व्यापक नुकसान दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि 20573 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ तथा 50 प्रतिशत से अधिक फसलों को नुकसान हुआ, जो 200.37 करोड़ रुपये है। किन्नौर जिले में मटर एवं राजमाह की फसल को सर्वाधिक नुकसान हुआ है। बागवानी फसल को कुल 301.11 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जबकि उद्यानों को 4.51 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसी प्रकार, 81458 हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी फसल को नुकसान हुआ, जहां 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान दर्ज किया गया है, जबकि सेब की फसल को विशेष किन्नौर जिले में सर्वाधिक नुकसान हुआ है। लोक निर्माण विभाग की सम्पत्ति को 1218.71 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है तथा 4377 सड़कें क्षतिग्रस्त हुई, जिनमें 996 किलोमीटर लम्बे राज्य उच्च मार्ग, 1564 किलोमीटर लम्बे प्रमुख जिला मार्ग, 18816 किलोमीटर लम्बे ग्रामीण मार्ग, 42 पुल तथा 2250 कल्वर्ट शामिल हैं। वांगतू से समधो तक क्षतिग्रस्त राष्ट्रीय उच्चमार्ग-22 को 40 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई एवं जलापूर्ति योजनाओं को 256.78 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि 1527 जलापूर्ति योजनाएं, 627 सिंचाई योजनाएं, 22 मलनिकासी योजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं, जबकि 84 बाढ़ नियंत्रण कार्य प्रभावित हुए हैं। वीरभद्र सिंह ने कहा कि विद्युत आपूर्ति एवं अन्य अधोसंरचना को 472.35 करोड़ रुपये का कुल नुकसान हुआ है, जिसमें ट्रांसफार्मर, एचटी एवं एलटी लाइनें, उप-केन्द्र और एचपीएसईबी एवं एचपीपीसीएल की परियोजनाएं भी शामिल हैं।उन्होंने कहा कि पंचायत भवनों, सामुदायिक केन्द्रों एवं गांवों के पैदल मार्गों इत्यादि सामुदायिक सम्पत्तियों को 165 करोड़ रुपये से अधिक नुकसान हुआ है। मत्स्य क्षेत्र में 5 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है, जबकि सांगला में ट्राउट फार्म भी क्षतिग्रस्त हुआ है। स्वास्थ्य क्षेत्र में 3 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान दर्ज किया गया है। उन्होंने सभी विभागों से शीघ्र राहत एवं जीर्णोंद्वार कार्य सुनिश्चित बनाने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य एवं राजस्व मंत्री श्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि विभिन्न आपदाओं एवं प्राकृतिक आपदाओं के लिए राज्य संवेदनशील होने के दृष्टिगत उन्होंने हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय आपदा राहत फोर्स (एनडीआरएफ) स्थापित करने का मामला भारत सरकार से उठाया है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री ने पूर्ण केन्द्रीय वित्त पोषण से एनडीआरएफ उपलब्ध करवाने पर सहमति व्यक्त की है। उन्होंने राजस्व अधिकारियों से राज्य में एनडीआरएफ स्थापित करने के लिए भूमि चिन्हित करने के निर्देश दिए।

सम्बन्धित विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा प्रधान सचिव तथा दीपक परियोजना (बीआरओ) के कर्नल जे.एस. साहनी ने इस अवसर पर नुकसान एवं जीर्णोंद्धार कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।

मुख्य सचिव श्री एस. रॉय, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री दीपक सानन एवं श्री विनीत चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री वी.सी. फारका, प्रधान सचिव एवं वित्तायुक्त (राजस्व) श्री तरूण श्रीधर, लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिव श्री नरेन्द्र चौहान, प्रधान सचिव ऊर्जा श्री एस.के.बी.एस. नेगी, विशेष सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबन्धन डॉ. अमनदीप गर्ग, लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ श्री प्रदीप चौहान, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ श्री आर.के. शर्मा, कृषि विभाग के निदेशक श्री जे.सी. राणा, बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. गुरदेव सिंह, पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. बी.एस. कौल, एचपीपीसीएल के प्रबन्ध निदेशक श्री डी.के. शर्मा, अतिरिक्त सचिव राजस्व श्री मान सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

 

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