हरियाणा विधानसभा चुनाव में इस बार मतदाताओं ने राजनीतिक परिवारों से ताल्लुक रखने वाले उम्मीदवारों को बहुत ज्यादा तवज्जो नहीं दी। विरासत की राजनीति करने वाले कुछ लोग हारे, तो कुछ ने विजय का परचम लहराया। पूर्ण बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी (भजपा) सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। जिन प्रमुख मुद्दों पर भाजपा ने हरियाणा में चुनाव लड़ा था, उसमें से एक यह भी था कि यहां विरासत की राजनीति को खत्म किया जाए। भले ही भाजपा को जनता ने यहां बहुमत सौंप दिया हो, लेकिन राजनीतिक परिवारों से ताल्लुक रखने वाले उम्मीदवारों को भी उन्होंने पूरी तरह मायूस नहीं किया। कुल मिलाकर उनके लिए चुनाव परिणाम मिला-जुला रहा। वर्ष 2005 में सत्ता से बाहर होने के बाद फिर से वापसी के प्रयास में लगी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) को फिर पांच वर्षो तक विपक्ष में बैठना पड़ेगा। 2009 में 31 सीटें जीतनेवाली इनेलो 19 सीटों पर सिमटकर रह गई है।रविवार को चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल के परिवार की पार्टी इनेलो के पास खुशियां मनाने का कोई कारण नहीं है। इनेलो अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला (देवी लाल के पुत्र) के परिवार के दो सदस्य उनके छोटे बेटे अभय चौटाला तथा पुत्रवधू नैना चौटाला (अजय चौटाला की पत्नी) ने जीत दर्ज की है, जबकि ओम प्रकाश चौटाला के पोते दुष्यंत चौटाला (अजय तथा नैना चौटाला के पुत्र) जींद जिले के उचाना कलां सीट से चुनाव हार गए हैं। हिसार लोकसभा क्षेत्र से सांसद 26 वर्षीय दुष्यंत चौटाला कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता सिंह से पराजित हुए। सिंह समाज सुधारक सर छोटू राम के परिवार से आते हैं। एक बार फिर सत्ता में आने से चूकने से निराश इनेलो के नेता अभय चौटाला ने कहा, "मैं सिरसा जिले के लोगों का आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने यहां की पांचों विधानसभा सीटें जीतने में इनेलो की मदद की।"
पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के परिवार में भी दो लोग चुनाव जीतने में कामयाब रहे। भजन लाल के छोटे बेटे और हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) के अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई और उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई ने क्रमश: आदमपुर तथा हांसी विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की, वहीं भजन लाल के बड़े बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्र मोहन नालवा सीट से चुनाव हार गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री बंसी लाल के परिवार से उनके बेटे रणबीर सिंह महेंद्रा बधरा विधानसभा सीट से चुनाव हार गए। लेकिन बंसी लाल की पुत्रवधू किरण चौधरी आराम से चुनाव जीतने में कामयाब रहीं। विवादित पूर्व मंत्री और चुनाव के पहले हरियाणा लोकहित पार्टी बनाने वाले गोपाल कांडा तथा उनके भाई क्रमश: सिरसा तथा रानिया से चुनाव हार गए हैं। चंडीगढ़ के एक राजनीतिक परिवार से संबंध रखने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा अंबाला सिटी सीट से चुनाव हार गए हैं। शर्मा की पत्नी शक्ति रानी भी कालका विधानसभा सीट से चुनाव में पराजित हो गई हैं।