केरल से कांग्रेस के लोकसभा सदस्य शशि थरूर ने पार्टी के प्रवक्ता पद से हटाए जाने पर सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि वह 'एक निष्ठावान कार्यकर्ता' की तरह पार्टी का फैसला स्वीकार करते हैं। तिरुवनंतपुरम के सांसद थरूर ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मसले पर कोई और टिप्पणी नहीं करेंगे और वह इसे इस प्रकरण का पटाक्षेप मानते हैं। उन्होंने कहा, "मैंने पार्टी की ओर से प्रेस को जारी विज्ञप्ति देखी है और कांग्रेस पार्टी के एक निष्ठावान कार्यकर्ता की तरह पार्टी अध्यक्ष के इस फैसले को स्वीकार करता हूं जिसमें मुझे प्रवक्ता के दायित्व से मुक्त किया गया है।"थरूर ने कहा कि उन्होंने पार्टी की केरल इकाई की ओर से उनके खिलाफ भेजी गई शिकायत की वह प्रति अभी तक नहीं देखी है, जिसके आधार पर आलाकमान ने यह कार्रवाई की है।
उन्होंने कहा, "मैंने केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी का शिकायती पत्र अभी तक नहीं देखा है। यदि मुझे जवाब देने का एक मौका दिया जाता तो मैं उसका स्वागत करता और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का ध्यान हाल के अपने बयानों और सम-सामयिक राजनीतिक मुद्दों पर लिखे अपने आलेखों की ओर आकृष्ट करता, मगर अब मैं इस अध्याय को बंद मानता हूं और इस पर आगे मुझे कोई टिप्पणी नहीं करनी है।"पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में मानव संसाधन राज्यमंत्री रहे थरूर ने यह भी कहा कि वह 'लोगों की सेवा' के लिए राजनीति में हैं और यह काम वह करते रहेंगे। दक्षिणी दिल्ली के एक होटल के कमरे में रहस्यमयी मौत की शिकार हुई सुनंदा पुष्कर के पति ने कहा, "पार्टी ने मुझे जब कभी जैसा भी दायित्व सौंपा, मैंने आनाकानी किए बगैर उन्हें निभाया और मैं अच्छी तरह जानता हूं कि पार्टी को दायित्व दूसरे को सौंपने का परमाधिकार है।"उल्लेखनीय है किराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व प्रचारक और भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के कारण कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को अनुशासन समिति की सिफारिश पर थरूर को पार्टी प्रवक्ता पद से हटा दिया। अनुशासन समिति के तीन सदस्यों में मोतीलाल वोरा, ए.के. एंटनी और सुशील कुमार शिंदे शामिल हैं।