केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि दस्तावेजों के स्वसत्यापन के प्रावधान का सरकारी फैसला एक क्रांतिकारी फैसला है। यहां एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए और बाद में सवाददाताओं से बात करते हुए सिंह ने कहा कि स्वसत्यापन 65 से अधिक साल पुरानी स्थापित प्रणाली की विदाई है।उन्होंने कहा कि राजपत्रित अधिकारी से सत्यापन कराने की व्यवस्था की जगह स्वसत्यापन की व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक महत्वपूर्ण जनहितकारी कार्य है।उन्होंने कहा कि स्वसत्यापन से संबंधित अधिसूचना जल्द जारी कर दी जाएगी, लेकिन सरकार ने अपनी मंशा जता दी है। अधिसूचना के बारे में उन्होंने कहा, "हमने कोई समय सीमा नहीं तय की है। हम इसे जल्द जारी करना चाहेंगे।"उन्होंने कहा कि परिपत्र विभिन्न विभागों को भेजा गया है और सरकार राज्यों की राय भी जानना चाहती है।
केंद्र ने सभी विभागों और राज्य सरकारों से कहा है कि एफीडेविट की जगह स्वसत्यापन की व्यवस्था की जाए। स्वसत्यापन प्रणाली में मूल दस्तावेज सिर्फ आखिरी चरण में दिखाने होंगे।भाषण के दौरान मंत्री ने कहा कि सरकार हर स्तर पर शासन में सुधार करना चाहती है।सम्मेलन का आयोजन प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के साथ मिलकर किया है। यह दो दिन तक चलेगा।सम्मेलन में 22 देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इसमें लोक प्रशासनिक सुधार में सर्वोत्तम उदाहरण, लोक सेवा आपूर्ति में सुधार, सरकार में ज्ञान प्रबंधन को बढ़ावा देना जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।