मंडी संसदीय उपचुनाव का बिगुल बज चुका है। कांग्रेस से प्रतिभा सिंह का नाम लगभग तय हो चुका है, जबकि भाजपा से कौन होगा प्रत्याशी, इसका सभी को इंतजार है। पार्टी में जयराम ठाकुर से हटकर दो नाम आगे आए हैं, जिनमें युवा तुर्क अजय राणा व पार्टी के ही नेता रामस्वरूप शर्मा शामिल हैं। चर्चा है कि इन दोनों में से ही किसी नेता का नाम फाइनल होगा। हालांकि जयराम ठाकुर को मनाने की पूरी कवायदें चली हैं। बहरहाल, मंडी उपचुनाव वर्ष 2014 में होने वाले आम चुनावों के लिए ट्रेंड सेंटर बनेगा, जो भी दल इसमें हावी रहेगा, उसके लिए प्रचार की राहें सरल होंगी। हिमाचल की भौगोलिक स्थिति कुछ ऐसी है कि यहां किसी भी चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों से हटकर स्थानीय मुद्दे हावी रहते हैं। जाहिर है इस उपचुनाव में भी पांच माह पुरानी सरकार के लिए कोई बड़े मुद्दे चुनौती नहीं रहेंगे। आरोप-प्रत्यारोप की सियासत जरूर गरमा सकती है। वैसे अभी तक मंडी संसदीय क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है। यहां से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जीत कर केंद्रीय कैबिनेट में इस्पात मंत्री बन चुके हैं। उनसे पहले उनकी धर्मपत्नी प्रतिभा सिंह भी यहां से सांसद रह चुकी हैं। भाजपा विपक्ष में रहकर यह चुनाव लड़ेगी। भाजपा के स्टार प्रचारक प्रतिपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. धूमल रहेंगे, जबकि कांग्रेस की तरफ से उपचुनाव की कमान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के हाथ रहेगी। उपचुनाव में पुरुष व महिला मतदाताओं की संख्या में कोई ज्यादा अंतर नहीं है। यहां 566946 पुरुष मतदाता और 546140 महिला मतदाता वोट डालेंगे। जिस भी दल को जनजातीय क्षेत्रों का ज्यादा सहारा रहेगा, वह जरूर हावी रह सकता है।