हिमाचल हाई कोर्ट ने आरटीआई कार्यकर्ता का सामाजिक बहिष्कार करने पर कड़ा संज्ञान लिया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव सहित छह अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाबतलब किया है। मुख्य न्यायाधीश एएम खान विलकर व कुलदीप सिंह की खंडपीठ ने दैनिक मिडिया में छपी खबर पर संज्ञान लेते हुए यह नोटिस जारी किए। जानकारी के अनुसार मजूर मोहम्मद जो कि नैला गांव, तीसा (चंबा) का रहने वाला है, का गांव के लोगों ने इसलिए बहिष्कार किया कि उसने कुछ लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने की कोशिश की थी।
जानकारी के अनुसार स्थानीय पंचायत के कुछ पदाधिकारियों ने नियमों में तबदीली कर गरीब विधवाओं की लड़की की शादी के लिए आने वाली राशि से अपनी ही बेटियों की शादी में इस्तेमाल की थी। यही नहीं, जो लोग जिंदा थे, उन्हें मरा दिखाकर व अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों को लाभ पहुंचाया गया। मजूर मोहम्मद का आरोप है कि पंचायत उपप्रधान ही इस कार्य को अंजाम देने वाला मुख्य आरोपी है, क्योंकि उसने शादी का प्रमाणपत्र जारी किया, जबकि वह इसके लिए अधिकृत नहीं था। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 19 मामलों में से 13 मामले फर्जी पाए गए थे। मंजूर मोहम्म्द के अनुसार उसको ज्यादा परेशानी अपने समुदाय के लोगों से है, जिन्होंने उसके द्वारा सरकारी फंड के दुरुपयोग करने के मामलों को आरटीआई के माध्यम से उजागर किया। यही नहीं, हरिजन बस्ती सुधार योजना के तहत मिलने वाले आपदा प्रबंधन में भी फंड का दुरुपयोग किया गया। भारत के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी कार्यकर्ता का सामाजिक बहिष्कार किया और उसके चाचा को बुरी तरह पीटा गया हो।