प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को एक-दूसरे से जोड़ने वाली 765 केवी की रांची-धर्मजयगढ़-सिपत पारेषण लाइन राष्ट्र को समर्पित की। रांची के धु्रवा स्थित प्रभात तारा में इस पारेषण संपर्क का ऑनलाइन उद्घाटन किया गया। श्री नरेंद्र मोदी ने एनटीपीसी के 3x660 मेगावॉट के उत्तरी कर्णपुरा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट पर कामकाज का शुभारंभ भी किया। झारखंड के राज्यपाल श्री सैयद अहमद, झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन, केंद्रीय संचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद, बिजली राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र प्रधान और सामाजिक न्याय व सशक्तीकरण राज्य मंत्री श्री सुदर्शन भगत इस मौके पर उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि अगर भारत को एक विकसित राष्ट्र के तौर पर उभरना है तो देश का कोई भी हिस्सा कमजोर और अल्प विकसित नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत अल्प विकसित रहा है, जबकि उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में संतुलित विकास होना चाहिए ताकि देशभर में आम जनता को समान रूप से विकास का लाभ मिल सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि खनिजों पर रॉयल्टी दरें बढ़ाने के लिए कैबिनेट द्वारा कल लिए गए निर्णय से झारखंड काफी लाभान्वित होगा। श्री नरेंद्र मोदी ने यह भी घोषणा की कि जगदीशपुर-फूलपुर-हल्दिया गैस पाइपलाइन का काम जल्द ही शुरू होगा, जो पूर्वी भारत के लिए ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत बन जाएगा।
उत्तरी कर्णपुरा सुपर थर्मल पावर संयंत्र पर काम का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे न केवल झारखंड, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में भी अंधेरा खत्म हो जाएगा। इस मौके पर अपने संबोधन में केंद्रीय बिजली राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल ने कहा कि वैसे तो झारखंड में एनटीपीसी परियोजना पर काम तकरीबन दस साल पहले ही शुरू हो गया था, लेकिन कोयला लिंकेज के अभाव और कई अन्य मुद्दों के चलते यह बिजली परियोजना पिछले दस वर्षों में शुरू नहीं हो पाई। श्री गोयल ने यह भी घोषणा की कि केंद्र सरकार राज्य के किसानों को अलग सहायक लाइन मुहैया कराने को इच्छुक है। झरिया कोलफील्ड में भूमि के नीचे लगी आग का जिक्र करते हुए श्री गोयल ने घोषणा की कि केंद्र सरकार इस आग को नियंत्रण में रखने के लिए 100 करोड़ रुपए देगी। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कोयले के विशाल स्टॉक के बावजूद झारखंड को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य को जल्द ही पर्याप्त मात्रा में बिजली की आपूर्ति शुरू हो जाएगी जिससे इस प्रदेश के हर क्षेत्र को लगातार बिजली आपूर्ति संभव हो पाएगी। इससे झारखंड के समग्र विकास का नया युग शुरू होगा।
765 किलोवाट की रांची- धर्मजयगढ़- सिपत अंतर-क्षेत्रीय पारेषण लाइन :- पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने 1600 सौ करोड़ रूपये की कुल लागत से 765 किलोवाट की रांची-धर्मजयगढ़ सिपत अंतर-क्षेत्रीय पारेषण लाइन को लागू किया है। 392 किलोमीटर की यह लाइन डीवीसी की उत्पादन परियोजनाओं से जुड़ी पारेषण योजना का हिस्सा है, ताकि पूर्वी क्षेत्र से भारत के पश्चिमी क्षेत्र को बिजली दी जा सके। 765 किलोवाट के दो नये उपकेन्द्र झारखंड के रांची तथा छत्तीसगढ़ के धर्मजयगढ़ में बनाये गये हैं। परियोजना के लाभों में पूर्वी क्षेत्र की अंतरक्षेत्रीय क्षमता को पश्चिमी क्षेत्र से जोड़ना है ताकि बिजली की उत्पादन उपलब्धता और प्रत्येक क्षेत्र में लोड की मांग के अनुसार पूर्वी तथा पश्चिमी क्षेत्र के बीच शेष बिजली का आदान-प्रदान हो सके। झारखंड में एनटीपीसी का उत्तरी कर्णपुरा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट : राज्य में अपने किस्म की पहली एनटीपीसी परियोजना पर्यावरण संगत तथा बिजली उत्पादन के लिए अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी पर आधारित है। एनटीपीसी में पहली बार निम्न इकाईयों में एयर फोल्ड कंडेशर्स चिन्हित किये गये हैं ताकि संस्थान बिजली इकाईयों की आवश्यकताओं को पूरा करने की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहें।
भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 6 मार्च 1999 को परियोजना का शिलान्यास किया था। कुछ तकनीकी कारणों से काम शुरू नहीं हो सका। बाद में विनिवेश संबंधी मंत्रिमंडल की समिति ने 30 फरवरी 2013 को उत्तर कर्णपुरा परियोजना को मंजूरी दी और सिद्धांत रूप में यह निर्णय किया गया कि परियोजना के लिए मूल कोल लिंकेज बहाल किया जाये। कोयला मंत्रालय ने मई 2013 में कोल लिंकेज बहाल किया और यह निर्धारित किया की 13वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कोयले की सप्लाई शुरू हो जायेगी। एनटीपीसी ने परियोजना कार्य शुरू करने संबंधी आवश्यक कदम उठाए हैं ताकि उत्तर कर्णपुरा परियोजना तेजी से लागू की जा सके। इसके लिए फरवरी 2014 में ईपीसी (इंजीनियरिंग उगाही तथा निर्माण) पैकेज भेल (बीएचईएल) को दिया गया। सभी इकाईयां सुपर क्रिटिकल टेक्नोलॉजी आधारित हैं यह टेक्नोलॉजी कारगर तथा बिजली उत्पादन के लिए पर्यावरण संगत है। एनटीपीसी अपने विभिन्न बिजली केन्द्रों से झारखंड को 298 मेगावाट बिजली की सप्लाई कर रही है। इसके अतिरिक्त ऊर्जा मंत्रालय ने झारखंड के लिए एनटीपीसी की नई तथा निर्माणाधीन परियोजनाओं से 354 मेगावाट का आवंटन किया है।