प्रदेश कांग्रेस सरकार में ओहदे हासिल करने के लिए जंग तेज
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5 दरिया न्यूज (विजयेन्दर शर्मा)
धर्मशाला , 09 Jan 2013
Last updated on: Jan 09, 2013, 00:00 IST
प्रदेश कांग्रेस सरकार में ओहदे हासिल करने के लिए जंग तेज हो गई है। प्रशासनिक ट्रिब्यूनल इनमें सबसे बड़ा मुद्दा है, जिसके सर्किट बैंच मुख्यमंत्री ने धर्मशाला व मंडी में खोलने का ऐलान किया है। कांग्रेस के घोषणापत्र में भी यह शुमार है, जिसे सरकार ने नीतिगत दस्तावेज के तौर पर लागू किया है। इसके बाद स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष पद के लिए भी दावेदार जबरदस्त लॉबिंग में जुटे हैं। प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में चेयरमैन के लिए प्रदेश से ही सेवानिवृत्त न्यायाधीश या वरिष्ठ कानूनविद व सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों में तैनातगी को लेकर अलग से लॉबिंग चली है। अभी तक ट्रिब्यूनल के इतिहास में पंजाब, हरियाणा हाई कोर्ट से सेवानिवृत्त न्यायाधीश बक्शीष कौर ही प्रशासनिक ट्रिब्यूनल की चेयरमैन रहीं। इसके बाद इसकी कमान कभी वरिष्ठ कानूनविदों तो कभी सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ रही। इन्हीं में से सदस्य भी चुने जाते रहे। बहरहाल, अभी तक 16 बोर्ड व निगम और ऐसे हैं, जिनमें अध्यक्ष व उपाध्यक्षों के पद भरे जाने शेष हैं। किसी भी सरकार में इन तैनातियों पर मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार रहता है। यह पहला मौका है कि कांग्रेस में गुटबाजी के कारण इन तैनातियों पर भी दिल्ली से लॉबिंग चल रही है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह यह स्पष्ट कर चुके हैं कि इन तैनातियों को लेकर जो अफवाहें व अटकलें फैलाई गई हैं, वे निराधार हंै। जाहिर है शीतकालीन सत्र के बाद दावेदारों को न केवल संगठन से, बल्कि विधायकों को भी इनमें तैनातियां मिलने की उम्मीद जगी है। सबसे ज्यादा नजरें पूर्व सरकार के दौरान बंद किए गए प्रशासनिक ट्रिब्यूनल पर टिकी हैं। एचपीएमसी, एचपीटीडीसी व हिमुडा में पद हासिल करने के लिए भी नेता व विधायक ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ऐलान कर चुके हैं कि बजट सत्र के आसपास जहां दो मंत्री पद भरे जा सकते हैं, वहीं कुछ संसदीय सचिव भी तैनात हो सकते हैं। इन तैनातगियों को लेकर ही पार्टी के कुछ नेता शिकायत करने दिल्ली गए थे। दिलचस्प बात यह है कि मीडिया में जो रिपोर्ट्स आफ दि रिकार्ड नेताओं ने दी, वे सही नहीं निकली।