जनजातीय जिला लाहुल-स्पीति में कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं। इन्हीं धरोहरों के कारण लाहुल-स्पीति विश्व भर में प्रसिद्ध है। लाहुल-स्पीति की स्पीति नदी के बायीं ओर 100 मीटर ऊंचे टीले पर बने की गोंपा के अस्तित्व पर इन दिनों खतरा मंडरा रहा है। लाहुल जिला में 15वीं शताब्दी में बने इस गोंपे के साथ लगते पिछले वर्ष भी बर्फबारी होने के कारण तीन मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। इन मकानों के क्षतिग्रस्त होने के कारण गोंपा को भी काफी नुकसान हो रहा है। की गोंपा के चारों ओर दरारें आ चुकी हैं। उल्लेखनीय है कि स्पीति में समुद्र तल से 13.668 फुट की ऊंचाई से बने इस गोंपे के साथ लगते एक टीले में भू-स्खलन भी शुरू हो गया है। भूस्खलन के होने से इस गोंपें के कई हिस्सों में भी दरारें आ गई हैं, जिससे कि इस ऐतिहासिक धरोहर के अस्तित्व पर खतरा मंडरा गया है। इस गोंपे के साथ बने सभी भवन एक दूसरे के साथ सटे हुए हैं, जिससे कि एक भी मकान को अगर कोई नुकसान पहुंचता है तो निश्चित तौर पर इस गोंपा पर भी खतरा बढ़ सकता है। खतरे की जद पर पहुंचे इस गोंपे के साथ कई ऐतिहासिक पन्ने भी जुड़े हैं। अगर इस गोंपें का अस्तित्व खत्म होता है तो एक ओर ऐतिहासिक धरोहर इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएगी। सैकड़ो साल पुराने इस गोंपे की नींव दरक ने की जानकारी प्रशासन को भी है, लेकिन प्रशासन भी इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। बताते चलें कि यह गोंपा भारत, तिब्बत और चीन के बौद्ध भिक्षुओं का अध्ययन का केंद्र भी रह चुका है। अब बौद्ध मठों का संरक्षण लाहुल के स्थानीय लोग ही कर रहें हैं। सरकारी तौर पर इन गोंपाओं को बचानें के कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। स्थानीय लोग भी कई बार इन गोंपाओं ऐतिहासिक धरोहरों को बचानें के लिए प्रशासन से मांग कर चुके हैं। लाहुल स्पीति के उपायुक्त एसएस गुलेरिया ने बताया कि लाहुल की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए प्रशासन द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। बहरहाल अगर प्रशासन ने जल्द कदम न उठाया तो उक्त गोंपा पूरी तरह से टूट जाएगा। इसके साथ ही लाहुल स्पीति की ऐतिहासिक धरोहर सिर्फ इतिहास बनकर ही रह जाएगी।