Monday, 29 June 2026

 

 

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श्री अकाल तख्त के फैसले का सम्मान करते हुए भगवंत मान इस्तीफा दें और तख्त के समक्ष पेश हों : गुरजीत सिंह औजला

हजूर साहिब बोर्ड में सरकारी दखल बंद हो, धर्म और राजनीति को अलग रखा जाए

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अमृतसर , 25 Jun 2026

Last updated on: Jun 26, 2026, 09:49 IST

कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से श्री अकाल तख्त साहिब के पांच सिंह साहिबानों द्वारा 15 जून को सुनाए गए फैसले का सम्मान करते हुए अपने पद से इस्तीफा देने तथा अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होकर क्षमा याचना करने की मांग की है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार द्वारा तख्त श्री हजूर साहिब, नांदेड़ के प्रबंधकीय बोर्ड में कथित हस्तक्षेप की कोशिशों की भी कड़ी निंदा की।

एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए औजला ने कहा कि 15 जनवरी, 2026 को सामने आए विवादित वीडियो मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होकर दावा किया था कि उक्त वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तैयार किया गया है और उसका उनसे कोई संबंध नहीं है।

उन्होंने कहा कि उस समय सिंह साहिबानों ने निष्पक्ष रुख अपनाते हुए सरकार को किसी भी स्वतंत्र और विश्वसनीय एजेंसी से जांच करवाने की सलाह दी थी। औजला ने कहा कि मुख्यमंत्री को अपने दावे को साबित करने के लिए लगभग छह महीने का समय दिया गया, लेकिन इस दौरान ऐसी कोई जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई जिससे सिख संगत के मन में उठ रहे संदेह दूर हो सकें।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के युग में सच्चाई को लंबे समय तक छिपाया नहीं जा सकता और बार-बार बदलते तर्कों से ऐसे गंभीर मामलों का समाधान नहीं होता।उन्होंने आरोप लगाया कि श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष गलत जानकारी देकर भगवंत मान ने एक गंभीर धार्मिक अपराध किया है। औजला ने कहा कि सिंह साहिबानों ने उपलब्ध तकनीकी रिपोर्टों, तथ्यों और सिख समुदाय की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अपना फैसला सुनाया था।

सांसद ने आरोप लगाया कि फैसले को स्वीकार करने, गलती मानने और माफी मांगने की बजाय आम आदमी पार्टी के नेताओं, प्रवक्ताओं और मंत्रियों ने लगातार श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को चुनौती देने का प्रयास किया, जिससे उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता और कमजोर हुई है।उन्होंने कहा कि 19 जून को मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में भी यह दावा दोहराया गया कि विवादित वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं।

औजला ने कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तुत कुछ रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और बाद में सामने आई जानकारियों ने इन रिपोर्टों की निष्पक्षता पर बहस को और तेज कर दिया है।औजला ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख पंथ की सर्वोच्च संस्था है और उसके आदेशों का पालन करना प्रत्येक सिख का कर्तव्य है।

उन्होंने कहा कि फैसले पर बहस करने के बजाय उसका सम्मान किया जाना चाहिए क्योंकि निर्णय सुनाने का अधिकार केवल सिंह साहिबानों को है। उन्होंने कहा कि यदि भगवंत मान सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करते हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री का पद गुरु साहिब की कृपा से प्राप्त हुआ है, तो उन्हें उसी विनम्रता के साथ पंथ की सर्वोच्च संस्था के फैसले को भी स्वीकार करना चाहिए।

औजला ने कहा कि मुख्यमंत्री को पद से चिपके रहने की बजाय अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि धार्मिक संस्थाओं को चुनौती देना या उनके फैसलों को राजनीतिक चश्मे से देखना सिख समुदाय के हित में नहीं है।कांग्रेस सांसद ने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल द्वारा सिंह साहिबानों के खिलाफ कथित तौर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों की भी निंदा की।

उन्होंने कहा कि किसी भी फैसले से असहमति हो सकती है, लेकिन धार्मिक पदों और संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का प्रयोग किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। वीडियो मामले में गुरुग्राम पुलिस द्वारा पंजाब पुलिस के कुछ अधिकारियों को तलब किए जाने के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में औजला ने कहा कि कानून को अपना काम करने दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कानून की नजर में सभी व्यक्ति समान हैं और किसी को भी उसके पद या प्रभाव के आधार पर विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए। इस दौरान औजला ने तख्त श्री हजूर साहिब प्रबंधकीय बोर्ड से जुड़े 1956 के अधिनियम का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार बोर्ड में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ाने और नामित सदस्यों की संख्या में वृद्धि करने के लिए कानून में संशोधन करना चाहती है, जो सिख संस्थाओं की स्वायत्तता के लिए खतरा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में भी ऐसा प्रयास किया गया था, लेकिन सिख संगत और श्रद्धालुओं के तीव्र विरोध के कारण सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा था। उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि किसी सुधार की आवश्यकता हो तो वह सिख संस्थाओं, जत्थेदारों और पंथक प्रतिनिधियों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही किया जाना चाहिए।

औजला ने भाजपा नेतृत्व से भी अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक सौदेबाजी का विषय न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सिख भावनाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए। धर्म और राजनीति को अलग-अलग रखना समय की मांग है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि तख्त श्री हजूर साहिब प्रबंधकीय बोर्ड सहित सभी सिख संस्थाओं की स्वायत्तता, गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए वह हर लोकतांत्रिक और संवैधानिक मंच पर अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।कैप्शन: अमृतसर में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते लोकसभा सांसद गुरजीत सिंह औजला।

 

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