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कार्यस्थल पर उत्पीड़न रोकने को बनेगी महिला विधायकों की विशेष समिति, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने किया ऐलान

Devendra Fadnavis, BJP Maharashtra, Chief Minister of Maharashtra, Mumbai
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5 Dariya News

मुंबई , 24 Jun 2026

Last updated on: Jun 25, 2026, 12:44 IST

कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न की घटनाओं से निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को विधान परिषद में घोषणा की कि विधानसभा और विधान परिषद की महिला विधायकों की एक संयुक्त समिति गठित की जाएगी, जो कॉर्पोरेट कार्यस्थलों में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मौजूदा कानूनों और दिशा-निर्देशों की समीक्षा करेगी।

यह समिति वर्तमान कानूनी व्यवस्था का अध्ययन करेगी, हाल की घटनाओं की जांच करेगी और आवश्यक सुधारों की सिफारिश करेगी। राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि समिति की सिफारिशों को लागू कर महिलाओं के लिए कार्यस्थलों को अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा। यह फैसला परिषद सदस्य चित्रा वाघ द्वारा नासिक में महिला कर्मचारियों के यौन और मानसिक उत्पीड़न से जुड़े गंभीर आरोप उठाए जाने के बाद लिया गया।

इस मुद्दे पर नीलम गोर्हे और मनीषा कायंदे सहित कई विधायकों ने चर्चा में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम अपनी जांच लगभग पूरी कर चुकी है। शिकायतों के आधार पर अब तक नौ अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। पीड़िता की शुरुआती शिकायत पर कार्रवाई न करने वाले मैनेजर को भी आरोपी बनाया गया है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच में सामने आया है कि कुछ कर्मचारियों द्वारा महिलाओं को निशाना बनाकर उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोप हैं। एसआईटी को कंपनी की संस्थागत भूमिका का कोई प्रमाण नहीं मिला है। संबंधित कंपनी ने जांच में पूरा सहयोग दिया है और सरकार द्वारा तय किए जाने वाले सभी सुरक्षा उपाय लागू करने की बात कही है।

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ''किसी एक घटना के आधार पर देश की अग्रणी आईटी कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा। कॉर्पोरेट क्षेत्र ने भारत को वैश्विक पहचान दिलाई है और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।'' मुख्यमंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़ी अन्य शिकायतों पर भी तेजी से कार्रवाई की जाएगी।

विधायक मनीषा कायंदे द्वारा सोलापुर के एक सरकारी आईटीआई से जुड़ी शिकायत की तत्काल जांच कराई जाएगी। इसके अलावा पुणे के पास तालेगांव दाभाडे में स्थित एक विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनी के खिलाफ मिली शिकायत की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ 15 दिनों के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

बता दें कि अप्रैल और मई 2026 में नासिक में सामने आए एक चर्चित मामले के बाद यह कदम उठाया गया है। इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था। एनसीडब्ल्यू की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी, जिसकी अगुवाई सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस साधना जाधव कर रही थीं। इस कमेटी की जांच के दौरान कार्यस्थल के माहौल को 'बेहद विषाक्त' बताया था।

एनसीडब्ल्यू की 50 पन्नों की रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून के पालन में गंभीर खामियां, शिकायत निवारण तंत्र की विफलता और डर का माहौल होने की बात कही गई थी। पीड़िताओं ने आरोप लगाया था कि कुछ वरिष्ठ कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग कर महिला कर्मचारियों का पीछा करते थे, उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे और उनके धर्म के खिलाफ बोलने तथा धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाते थे।

नासिक पुलिस की 12 सदस्यीय एसआईटी ने इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ 1,500 पन्नों की चार्जशीट भी दाखिल की है। इनमें कंपनी से जुड़े कई लोगों का नाम शामिल है। सरकार द्वारा गठित की जाने वाली नई समिति यह भी जांच करेगी कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए लागू दिशानिर्देशों को कानूनी रूप से और अधिक सख्त कैसे बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

 

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