बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को रबी मौसम के दौरान मार्च में आई आंधी-तूफान, असामयिक बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को बड़ी राहत देते हुए कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत 3.96 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 200 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि हस्तांतरित की।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऑनलाइन माध्यम से यह राशि किसानों के खातों में भेजी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों को लगातार प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी फसलों को भारी नुकसान होता है। ऐसे समय में सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और अपने संसाधनों से हरसंभव सहायता उपलब्ध करा रही है।
उन्होंने कहा कि कृषि इनपुट अनुदान योजना केवल आर्थिक मदद का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों में आत्मविश्वास और स्थिरता बनाए रखने का भी महत्वपूर्ण प्रयास है। सीएम सम्राट चौधरी ने बताया कि मार्च 2026 में आई प्राकृतिक आपदा से राज्य के 13 जिलों सहरसा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, मधेपुरा, अररिया, बेगूसराय, पूर्णिया, दरभंगा, किशनगंज, खगड़िया, मधुबनी, सुपौल और भागलपुर में 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति की रिपोर्ट प्राप्त हुई थी।
प्रभावित किसानों को त्वरित राहत प्रदान करने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने 200 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए, जबकि कृषि विभाग के अनुरोध पर अतिरिक्त 60.71 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी गई। इस प्रकार किसानों की सहायता के लिए कुल 260.71 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के सशक्तीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में किसान सम्मान निधि की राशि किसानों को उपलब्ध कराई गई है तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ भी किसानों को सीधे मिल रहा है। उन्होंने किसानों से अधिकाधिक संख्या में इन योजनाओं से जुड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को सुरक्षित बनाने और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए निरंतर प्रयासरत है। यह सहायता राशि प्रभावित किसानों को दोबारा खेती शुरू करने और आर्थिक रूप से सशक्त बनने में मददगार साबित होगी।