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पल्लवी देहुरी: राष्ट्रीय स्तर की धावक को मजबूरी में बनना पड़ा बस ड्राइवर

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5 Dariya News

क्योंझर , 19 Jun 2026

Last updated on: Jun 20, 2026, 13:14 IST

हर एथलीट का सपना होता है कि वह अपने खेल में कड़ी मेहनत करे और सबसे बड़ी सफलता हासिल करे। कई एथलीट ऐसे भी हैं जिन्हें प्रतिभा के बावजूद पारिवारिक परिस्थितियों और बाध्यताओं की वजह से खेल के क्षेत्र में आगे जाने का मौका नहीं मिलता, और देश का प्रतिनिधित्व करने की जगह वह अपने परिवार का भरण-पोषण करने में लग जाते हैं। पल्लवी देहुरी की कहानी भी ऐसी है। 

पल्लवी देहुरी का सपना दौड़ में वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना और पदक जीतना था, लेकिन पारिवारिक मजबूरियों की वजह से फिलहाल वह ओडिशा में 'अम्मा बस' में ड्राइवर (चालक) के तौर पर कार्य कर रही हैं। हालांकि, देहुरी ने अभी भी देश के लिए खेलने का सपना अभी भी नहीं छोड़ा है। मीडिया से बातचीत के दौरान पल्लवी देहुरी ने कहा, "मैं असम से संबंध रखती हूं। 

फिलहाल मैं भुवनेश्वर, ओडिशा में रहती हूं। पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। परिवार को देखने वाला कोई नहीं था, इसलिए मुझे खेल छोड़कर ड्राइवरी को चुनना पड़ा, ताकि मैं अपने परिवार को मदद कर सकूं।"पल्लवी ने कहा कि भविष्य में अगर मुझे फिर मौका मिलता है, तो मैं फिर से एथलेटिक्स में आना चाहूंगी और देश का प्रतिनिधित्व करना चाहूंगी। फिलहाल, मुझे अभी अभ्यास का समय नहीं मिलता। 

स्नातक तक शिक्षा हासिल करने वाली पल्लवी से पूछा गया कि महिलाएं ड्राइविंग में नहीं आती हैं, आप ड्राइवर बन गई हैं, लड़कियों को क्या संदेश देना चाहेंगी? इसके जवाब में पल्लवी ने कहा कि लड़कियों को हिम्मत करते हुए आगे बढ़ना चाहिए और अपने और परिवार के लिए कुछ करना चाहिए। लड़कियों को किसी से अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए और खुद को बेहतर समझना चाहिए। पल्लवी देहुरी एक राष्ट्रीय स्तर की धावक रही हैं। वह 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ में हिस्सा लिया करती थीं। वह स्वर्ण और रजत पदक जीत चुकी हैं। 

 

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