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डॉ. जितेंद्र सिंह ने अहमदाबाद में जमीनी स्तर के नवाचार पर राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित किया

ग्रासरूट इनोवेटर्स को प्रोत्साहित करने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है और क्षेत्रीय असंतुलन कम हो सकता है : डॉ. जितेंद्र सिंह

Dr Jitendra Singh, BJP, Bharatiya Janata Party, Ahmedabad
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अहमदाबाद , 19 May 2026

Last updated on: May 20, 2026, 12:53 IST

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 'ग्रासरूट इनोवेटर्स' को बढ़ावा देने से भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है और समावेशी, नवाचार-आधारित विकास के माध्यम से क्षेत्रीय असंतुलन को कम किया जा सकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों को देश के आर्थिक परिवर्तन में सक्रिय हितधारक बनना चाहिए, क्योंकि उनके पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय कौशल और व्यावहारिक नवाचारों में आजीविका सृजन, विकेंद्रीकृत विकास और राष्ट्रीय विकास की अपार क्षमता है। गुजरात के अहमदाबाद स्थित साइंस सिटी में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला "ग्रासरूट इनोवेशन पाथवेज़ : फ्रॉम लोकल रेजिलिएंस टू नेशनल एडवांसमेंट्स" के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जमीनी स्तर के नवोन्मेषक भारत के "मूक राष्ट्र निर्माता" हैं, जिनका योगदान सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के बावजूद अक्सर औपचारिक संस्थागत प्रणालियों से बाहर ही रहता है।

उन्होंने कहा कि भारत में नवाचार महानगरों, प्रयोगशालाओं या विशिष्ट संस्थानों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका विस्तार गांवों, छोटे कस्बों और सामुदायिक इको-सिस्टम तक भी होना चाहिए। इस कार्यशाला का आयोजन नीति आयोग द्वारा राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन (एनआईएफ) और गुजरात विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (जीयूजेसीओएसटी) के सहयोग से किया गया है।

इस कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में गुजरात के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री ऋषिकेश पटेल, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व अध्यक्ष और नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत, नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) प्रो. विवेक कुमार सिंह, गुजरात के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव सुश्री पी. भारती, राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन के निदेशक डॉ. अरविंद रानाडे और देश भर के कई वैज्ञानिक, नीति निर्माता और नवप्रवर्तक उपस्थित थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत में सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार की अनूठी क्षमता है और कई नए विचार प्रत्यक्ष अनुभवों और स्थानीय चुनौतियों से उत्पन्न होते हैं। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के शुरुआती वर्षों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि डॉ. विक्रम साराभाई और अन्य अग्रदूतों ने न्यूनतम बुनियादी ढांचे के बावजूद असाधारण प्रतिबद्धता के साथ काम किया, जो भारत के मानव संसाधन की अंतर्निहित नवाचार क्षमता को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जमीनी स्तर के कई नवप्रवर्तकों के पास औपचारिक शैक्षणिक योग्यताएं नहीं होतीं, फिर भी वे व्यावहारिक अनुभव पर आधारित उल्लेखनीय रचनात्मकता और तकनीकी दक्षता प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों से उभर रहे स्टार्टअप छोटे शहरों और ग्रामीण भारत की बढ़ती नवाचार क्षमता को दर्शाते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जमीनी स्तर पर नवाचार मूल रूप से एक नीचे से ऊपर की ओर होने वाली प्रक्रिया है और उन्होंने स्थानीय नवोन्मेषकों को वैज्ञानिक संस्थानों, आधुनिक प्रौद्योगिकी, सत्यापन प्रणालियों और बाजार के अवसरों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नवोन्मेषकों के नवाचारों को व्यवहार्य उत्पादों और सामुदायिक समाधानों में परिणत करने के लिए मार्ग प्रशस्त करना एक बड़ी चुनौती है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जमीनी स्तर पर नवाचार को आर्थिक और विकासात्मक प्राथमिकता के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं और संतुलित क्षेत्रीय विकास के साथ ही भारत एक अग्रणी वैश्विक अर्थव्यवस्था के रूप में उभर सकता है। उन्होंने आगे कहा कि जमीनी स्तर पर नवाचार रोजगार सृजन, सामुदायिक उद्यमिता और विकासात्मक असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों और अनुसंधान संस्थानों, इनक्यूबेटरों और उद्योग सहित औपचारिक नवाचार इको-सिस्टम के बीच मजबूत समन्वय का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कई सरकारी योजनाएं और वैज्ञानिक कार्यक्रम अक्सर स्थानीय नवप्रवर्तकों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाते, क्योंकि वे जमीनी हकीकतों से कटे रहते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रौद्योगिकी के एकीकरण पर जोर देते हुए कहा कि पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को एआई और खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ मिलाकर स्थानीय उत्पादों और कौशलों के मूल्य और बाजार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने बाजरा आधारित उत्पादों और पारंपरिक क्षेत्रीय खाद्य पदार्थों से जुड़े सफल प्रयासों का उदाहरण दिया, जहां वैज्ञानिक सहयोग से स्थानीय समुदायों के लिए व्यावसायीकरण और आय के अवसरों में सुधार हुआ।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने "मन की बात" और पीएम विश्वकर्मा जैसी पहलों के माध्यम से जमीनी स्तर पर नवाचार और सामुदायिक भागीदारी को लगातार प्रोत्साहित किया है, जो पारंपरिक कौशल को संरक्षित करने के साथ-साथ उन्हें प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और आर्थिक अवसरों से जोड़ने में मदद कर रही हैं।

इस कार्यशाला में जमीनी स्तर पर नवाचार को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत सहायता, जमीनी स्तर के नवोन्मेषकों से सीखना, समुदाय आधारित नवाचार पहल और क्षेत्रीय एवं राज्य स्तरीय नवाचार पहलों पर तकनीकी सत्र शामिल हैं। कार्यशाला के दौरान होने वाली चर्चाओं में नीतिगत ढांचे, संस्थागत समन्वय, इनक्यूबेशन सहायता और जमीनी स्तर के नवाचार का देश भर में विस्तार करने के लिए उपयुक्त मॉडलों पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह की पहल एक मजबूत नवाचार इको-सिस्टम के निर्माण में मदद करेगी, जहां गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों के नवोन्मेषक भारत की विकास यात्रा में समान भागीदार बनेंगे और विकसित भारत @2047 की दिशा में सार्थक योगदान देंगे।

 

Tags: Dr Jitendra Singh , BJP , Bharatiya Janata Party , Ahmedabad

 

 

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