पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने शुक्रवार को विधासनभा हलका जालंधर कैंट के गांव जंडियाला सहित अन्य अनाज मंडियों को दौरा किया। उन्होंने किसानों की मंडियों में पड़ी गेहूं की खरीद को लेकर सरकार के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को अपने मंत्रियों और नेताओं पर हो रही ईडी की रेड की तो चिंता है, लेकिन किसानों और उनकी फसलों की कोई परवाह नहीं है। सीएम मान ने किसानों के हक में एक शब्द भी नहीं बोला है। सही मायने में यह सरकार की राजनीतिक कमजोरी है और उनकी खराब नीयत से पर्दा उठा रही है। केंद्र सरकार भी इसके लिए जिम्मेदार है।
उन्होंने चिंता जताई कि मंडियों में गेहूं की फसल के अंबार लग चुके हैं। बारदाने की भारी कमी है। ना तो इसकी खरीद हो रही है और न ही लिफ्टिंग ही करवाई जा रही है। मौसम भी खराब चल रहा है। तिरपाल तक का पुख्ता इंतजाम नहीं है। अगर बारिश हो जाए तो कौन जिम्मेदार होगा? फिर सरकार ही कहेगी कि यह खाने लायक नहीं है। एफसीआई नहीं उठाएगी। जिससे किसानों का भारी नुकसान होगा। लेकिन अगर साथ-साथ ही लिफ्टिंग करवाई जाएगी तो ऐसी नौबत ही नहीं आएगी।
सरकार के गेहूं खरीद को लेकर अपनाए जा रहे रवैये और खराब प्रबंधन को लेकर किसान परेशान हैं। वह 5-6 दिनों में मंडियों में आकर बैठे हैं। उनकी फसलों की खरीद नहीं हो रही है। 6-6 महीने की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने अपनी फसल को तैयार किया है। खराब मौसम के कराण दाना भी काला होने की खतरा बना हुआ है।बीते दिनों बेमौसम बारिश और औलावृष्टि के कारण पहले ही किसानों की फसलों को काफी नुकसान हो चुका है।
सरकार ने अभी तक किसी किसान को कोई मुआवजा तक नहीं दिया। सरकार को चाहिए कि वह अपने नेताओं की फिक्र छोडकर किसानों की चिंता करे। उनकी फसलों की लिफ्टिंग को तुरंत यकीनी बनाए। किसान अपनी मांगों और फसलों की खरीद ना होने के विरोध में रेल रोकने को मजबूर हो रहे हैं। सरकार और खरीद एजेंसियों को कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आ रहा है।
परगट सिंह ने कहा कि कांग्रेस की सरकारें भी रही हैं। कभी किसानों को उनकी फसल की खऱीद के लिए इंतजार नहीं करने पड़ा। यहां तक की कोविड के बीच भी फसलों की खरीद को यकीनी बनाया गया। लेकिन आम आदमी पार्टी को सिर्फ राघव च़ड्ढा की सिक्योरिटी की फिक्र है। आप सरकार को चड्ढा की जगह पंजाब के किसान की चिंता करनी चाहिए। परगट सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी पिछले समय से किसानों को तंग करती आ रही है और यही काम अब आम आदमी पार्टी किसानों के साथ कर रही है। दोनों ही पार्टियां किसान विरोधी हैं।