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राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने किया 51वें राष्ट्रीय नैदानिक मनोविज्ञान सम्मेलन का शुभारम्भ

स्वास्थ्य क्षेत्र में आशा और संभावनाओं के नए द्वार खोल रहा एआई : कविन्द्र गुप्ता

Kavinder Gupta, Greater Noida
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ग्रेटर नोएडा , 09 Apr 2026

Last updated on: Apr 10, 2026, 09:15 IST

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित 51वें राष्ट्रीय नैदानिक मनोविज्ञान सम्मेलन (एनएसीआईएसीपी-2026) का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर राज्यपाल बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। सम्मेलन की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राणा पी. सिंह ने की। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘मानसिक स्वास्थ्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका’ था।

राज्यपाल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और व्यक्तिगत बनाने की क्षमता रखती है, जिससे जरूरतमंद लोगों को समय पर सहायता और उपचार मिल सकता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान में एआई के उपयोग से रोगों की पहचान और उपचार की प्रक्रिया तेज, सटीक और अधिक प्रभावी हुई है।

श्री गुप्ता ने कहा कि आधुनिक समाज में तनाव, अवसाद, चिंता और अन्य मनोवैज्ञानिक विकार तेजी से बढ़ रहे हैं, जो सभी वर्गों को समान रूप से प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे समय में एआई स्वास्थ्य क्षेत्र में आशा और नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। फिलहाल कई डिजिटल प्लेटफॉर्म और एप्लिकेशन विकसित किए जा चुके हैं, जो व्यक्ति की भावनाओं, व्यवहार और भाषा के आधार पर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की शुरुआती अवस्था की पहचान कर सकते हैं।

ये तकनीकें भविष्य में और भी अधिक कारगर साबित होंगी। राज्यपाल ने कहा कि भारत सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने टेली-मानस जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख किया, जो देश के दूरदराज और वंचित क्षेत्रों तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में सहायक हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और सामूहिक जिम्मेदारी का भी मुद्दा है।

श्री गुप्ता ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मौजूदा स्वास्थ्य योजनाओं के साथ अधिक प्रभावी ढंग से एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि प्रत्येक व्यक्ति के लिए समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को समाप्त करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के महत्त्व पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि जहां मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की कमी है, उन क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकें जागरूकता फैलाने और सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग न्यूरोफीडबैक, ब्रेन इमेजिंग और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है, जिससे मानसिक विकारों को बेहतर ढंग से समझने और नए उपचार विकसित करने में मदद मिल रही है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल एक सहायक उपकरण है और यह मानवीय संवेदनशीलता, सहानुभूति और व्यक्तिगत स्पर्श का पूर्ण विकल्प नहीं बन सकता, जो मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। राज्यपाल ने एआई आधारित समाधानों को अपनाते समय डेटा गोपनीयता, नैतिकता और सुरक्षा जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

उन्होंने कहा कि यदि एआई का सही दिशा में और मानवीय मूल्यों के अनुरूप उपयोग किया जाए तो यह मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुदृढ़, सुलभ और प्रभावी बनाने में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है। कुलपति प्रोफेसर राणा पी. सिंह ने सम्मेलन के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। इससे पूर्व, सम्मेलन के संयोजक एवं मनोविज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. आनंद पी. सिंह ने राज्यपाल का स्वागत किया।

कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर माधव गोविंद, गौरी शंकर कलोइया, आशा श्रीवास्तव, डॉ. निशी मिश्रा और डॉ. आलोक मिश्रा ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। इंडियन एसोसिएशन ऑफ क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट के पूर्व अध्यक्ष एवं संस्थापक सदस्य डॉ. मनोरंजन सहाय ने सम्मेलन के महत्त्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर राज्यपाल ने प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया।

 

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