युवा अकाली दल के प्रधान सरबजीत सिंह झिंजर ने 13 अप्रैल (बैसाखी) को आम आदमी पार्टी द्वारा प्रस्तावित इजलास पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि बेअदबी जैसे संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल ने वर्ष 2008 में ही इस मुद्दे पर गंभीर पहल करते हुए कानूनी ढांचा प्रस्तावित किया था, जिसमें IPC 295AA को शामिल करने और CrPC में संशोधन की बात कही गई थी।
इस प्रस्ताव में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान रखा गया था, लेकिन केंद्र सरकार की मंजूरी न मिलने के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। सरबजीत सिंह झिंजर ने आगे बताया कि 2015 में पंजाब विधानसभा ने इस कानून में संशोधन करते हुए सजा को 10 साल से बढ़ाकर उम्रकैद तक करने वाला बिल दोबारा पास किया, जिसमें प्रस्तावित IPC 295AA और प्रक्रिया संबंधी बदलाव शामिल थे।
हालांकि, यह बिल भी केंद्र की मंजूरी न मिलने के कारण लंबित रह गया। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने इसे इसलिए रोके रखा क्योंकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और ऐसा कानून किसी एक धर्म तक सीमित न होकर सभी धर्मों पर लागू होना चाहिए।
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सरबजीत सिंह झिंजर ने आरोप लगाया कि दोनों दलों ने इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया और अकाली दल द्वारा किए गए विकास कार्यों से ध्यान भटकाने की कोशिश की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की सरकारों के दौरान 597 बेअदबी की घटनाएं हुईं और कई मामलों में आरोपियों को मानसिक रूप से अस्थिर बताकर छोड़ दिया गया।
इसके अलावा, उन्होंने आम आदमी पार्टी पर बेअदबी मामलों में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जैसे धार्मिक संस्थानों में दखल देने की बात भी कही। अंत में सरबजीत सिंह झिंजर ने कहा कि अकाली दल धार्मिक मर्यादा और पंजाब के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस मुद्दे पर आगे भी मजबूती से अपनी आवाज उठाता रहेगा।