Wednesday, 22 July 2026

 

 

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बीसीजीसीएल और एमसीएल ने कोयले से अमोनियम नाइट्रेट प्लांट के लिए मेगा डील साइन की

G Kishan Reddy, Bharat Coal Gasification and Chemicals Limited, BCGCL, Mahanadi Coalfields Limited, MCL
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Armaan

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नई दिल्ली , 01 Apr 2026

Last updated on: Apr 02, 2026, 10:57 IST

भारत के कोयला गैसीकरण रोडमैप को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (बीसीजीसीएल) और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) के बीच ओडिशा के लखनपुर में प्रस्तावित कोल टू अमोनियम नाइट्रेट परियोजना के लिए एक ऐतिहासिक भूमि पट्टा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

यह हस्ताक्षर समारोह आज नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित हुआ। यह परियोजना, 2000 टीपीडी अमोनियम नाइट्रेट सुविधा के रूप में परिकल्पित, एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि यह भारत की पहली कोयला गैसीकरण परियोजना है, जिसमें भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) द्वारा विकसित स्वदेशी गैसीफिकेशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

यह ऊर्जा और रसायन क्षेत्र में स्वदेशी नवाचार, तकनीकी प्रगति और आयातित तकनीकों पर निर्भरता में कमी की दिशा में एक निर्णायक कदम को दर्शाता है। लगभग 350 एकड़ भूमि में फैली यह परियोजना, जो एमसीएल के अधीन है, कोयला मंत्रालय के हालिया प्रगतिशील नीतिगत सुधारों के माध्यम से संभव हुई है। ये सुधार कोल बेयरिंग एरिया (सीबीए) भूमि के उपयोग को कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए सक्षम बनाते हैं, जिससे भारत के प्रचुर कोयला संसाधनों के मूल्य संवर्धित उपयोग के नए मार्ग खुलते हैं और क्षेत्र के विविधीकरण को मजबूती मिलती है।

कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए, कोयला मंत्रालय ने अपनी समर्पित वित्तीय प्रोत्साहन योजना के तहत 1,350 करोड़ रुपये का वित्तीय समर्थन प्रदान किया है। यह परियोजना पहले से ही तेजी से प्रगति कर रही है, जिसमें प्रमुख एलएसटीके (लम्प सम टर्नकी) पैकेज एलएसटीके-1 और एलएसटीके-2 बीएचईएल को प्रदान किए गए हैं, जबकि एलएसटीके-3 और एलएसटीके-4 लार्सन एंड टुब्रो को दिए गए हैं।

साथ ही, साइट विकास कार्य, जिनमें बाउंड्री वॉल निर्माण और वृक्ष गणना शामिल हैं, समानांतर रूप से प्रगति पर हैं, जिससे समय-सीमा का पालन सुनिश्चित हो रहा है। भूमि पट्टा समझौते के हस्ताक्षर समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप सरकार कोयला क्षेत्र के रूपांतरण हेतु केंद्रित पहल कर रही है।

उन्होंने कहा कि भारत प्रचुर कोयला भंडारों से समृद्ध है और इस संसाधन का पारंपरिक उपयोग से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर कोयला गैसीकरण के माध्यम से उपयोग किया जाना आवश्यक है। उन्होंने जानकारी दी कि कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल ने 8,500 करोड़ रुपये के परिव्यय को स्वीकृति प्रदान की है, जिसमें 7 परियोजनाएं पहले ही अंतिम रूप ले चुकी हैं, जिनमें से 3 में भूमि पूजन भी सम्पन्न हो चुका है।

एमसीएल और बीसीजीसीएल के बीच लगभग 25,000 करोड़ रुपये के निवेश वाले इस समझौते को एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए उन्होंने कहा कि यह बीसीजीसीएल की पहली स्वदेशी परियोजना है और इस क्षेत्र में बढ़ती गति को दर्शाता है। मंत्री ने कहा कि कोयला गैसीकरण एक परिवर्तनकारी पहल सिद्ध होगी, जो आयात निर्भरता को कम करने तथा विदेशी मुद्रा की बचत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने सर्वोत्तम वैश्विक प्रौद्योगिकियों को अपनाने के साथ-साथ स्वदेशी क्षमताओं को सुदृढ़ करने पर बल दिया तथा सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने समग्र सरकारी दृष्टिकोण पर बल देते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी), भारी उद्योग मंत्रालय तथा वाणिज्य मंत्रालय की समन्वित भूमिका का उल्लेख किया और उद्योग, निवेशकों तथा अन्य हितधारकों से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

उन्होंने परियोजना को निर्धारित समय-सीमा से पूर्व पूर्ण करने पर भी बल दिया। कोयला मंत्रालय के सचिव श्री विक्रम देव दत्त ने इस अवसर पर कहा कि बीसीजीसीएल और एमसीएल के बीच भूमि पट्टा समझौते पर हस्ताक्षर देश में कोयला गैसीकरण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयासों को तीव्र करने तथा घरेलू क्षमताओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।

श्री दत्त ने बताया कि सभी प्रमुख आवश्यकताएं, जैसे वैधानिक स्वीकृतियां, लेटर ऑफ अवार्ड (एलओए) तथा निविदा प्रक्रियाएं, उन्नत चरण में हैं, जिससे परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने इसे प्रतिस्पर्धी लागत संरचना के साथ स्वदेशी विकास का एक संभावित मॉडल बताते हुए सभी हितधारकों से स्वामित्व की भावना के साथ कार्य करने, समय पर मुद्दों को उठाने तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर मंत्री ने बीसीजीसीएल की आधिकारिक वेबसाइट का भी उद्घाटन किया, जो पारदर्शिता, सुगमता तथा हितधारक सहभागिता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह मंच परियोजना अद्यतन तथा निविदाओं सहित प्रमुख जानकारी के प्रसार हेतु एक केंद्रीकृत माध्यम के रूप में कार्य करेगा। इस भूमि पट्टा समझौते से परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी आने तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर इसके पूर्ण होने की संभावना है।

लखनपुर में कोल टू अमोनियम नाइट्रेट परियोजना एक महत्वपूर्ण औद्योगिक पहल है, जो तकनीकी प्रगति, नीतिगत सुधारों तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों को परिलक्षित करती है तथा दीर्घकालिक औद्योगिक विकास और आर्थिक सुदृढ़ता में योगदान देगी। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य, जो परिवर्तित हो रही भू-राजनीतिक परिस्थितियों तथा आपूर्ति श्रृंखला की अनिश्चितताओं से चिह्नित है, में ऐसी पहलों का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

यह परियोजना विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें नवाचार, संसाधन दक्षता तथा सतत औद्योगिक विकास पर बल दिया गया है। यह भारत की आयात निर्भरता को कम करने, प्राकृतिक संसाधनों में मूल्य संवर्धन को बढ़ाने तथा एक सुदृढ़, भविष्य के लिए तैयार अर्थव्यवस्था के निर्माण की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है।

 

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