Wednesday, 22 July 2026

 

 

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पूरे प्रदेश में शोर है, सदन से सड़क तक लोग पूछ रहे हैं और सीएम कह रहे हैं उन्हें मालूम नहीं : जयराम ठाकुर

मुख्यमंत्री के मौन का मतलब क्या समझे प्रदेश, पूरा प्रदेश माँग रहा है सीएस मामले का जवाब

Jai Ram Thakur, Shimla
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Gurpreet Singh

Gurpreet Singh

5 Dariya News

शिमला , 31 Mar 2026

Last updated on: Mar 31, 2026, 16:53 IST

प्रदेश के मुख्य सचिव के मुद्दे पर चल रहे घमासान पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में शोर है, सोशल मीडिया में एक हफ़्ते से इसी विषय पर सबसे ज़्यादा बात हुई है, मुख्यमंत्री से लोग सिर्फ़ सवाल ही नहीं पूछ रहे बल्कि आरोप भी लगा रहा रहे हैं। दो बार सदन में ही बीजेपी के विधायक सतपाल सत्ती ने यह मुद्दा उठाया और सरकार से जवाब मांगा कि 118 का उल्लंघन हुआ है।  

बेनामी डील का आरोप लग रहा है। एसडीएम स्तर के अधिकारी ने विस्तृत जांच के बाद निर्णय दिया है। सबसे बड़े अधिकारी से जुड़ा मामला हैं इसलिए सदन को बताया जाए कि मामला क्या है? अब पत्रकारों से मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि उन्हें तो इस विषय की जानकारी नहीं हैं। 

मैं नहीं मानता कि उन्हें यह बात पता नहीं हैं। अजीब बात है। झूठ बोलने की सारी हदें पार हो गई हैं। सूबे के मुखिया को अपने सबसे बड़े ब्यूरोक्रेट के बारे में जानकारी नहीं हैं। कैसे सरकार चल रही है। आज सदन में फिर से भाजपा ने इस प्रकरण को उठाया गया, सरकार से जवाब मांगा गया, हर बात पर जवाब देने के लिए हाथ उठाने वाले मुख्यमंत्री ने जवाब तक नहीं दिया। 

आखिर इस खामोशी का क्या कारण हैं? मुख्यमंत्री की इस बेबसी का क्या कारण हैं? आख़िर वह कुछ बोलने की स्थिति में क्यों नहीं हैं? क्या कारण हैं कि इतने बड़े मामले में वह जानकारी न होने का बहाना बना रहे हैं? आख़िर वह कौन सा कारण हैं जो वे पूरे मामले में चुप्पी साधकर अपनी किरकिरी करवा रहे हैं? 

इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए क्योंकि आरोप सीएस पर पर है। जयराम ठाकुर ने कहा कि मीडिया के सवालों के जवाब को अनदेखा करके वह सच्चाई से मुँह नहीं मोड़ सकते हैं। उन्हें प्रदेश को जवाब देना होगा। मामले से जुड़े अधिकारियों से पूरे मामले की जांच करें और सख़्त से सख़्त कार्रवाई करें। 

इतने बड़े भ्रष्टाचार के आरोप पर मुख्यमंत्री की चुप्पी हैरान ही नहीं करती बल्कि कई सवाल भी खड़े करती है। मुख्यमंत्री की स्थिति बहुत ख़राब हो गई है। कई अधिकारी जो पहले की सरकारों में डाउटफुल इंटीग्रिटी के कराण हाशिए पर रहे, आज वही लोग प्राइम पोस्टिंग में हैं, वही सरकार चला रहे हैं। 

मुख्यमंत्री की स्थिति है कि वह न तो रेगुलर सीएस और डीजीपी की नियुक्ति कर पा रहे हैं और न ही अपने कार्यालय में चाहते हुए अधिकारियों के कमरे बदलवा पा रहे हैं। मुख्यमंत्री पूरी तरह कंप्रोमाइज़्ड हैं। इसलिए वह कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। 

क्योंकि जिन लोगों को किसी न किसी उलट धंधे में मुख्यमंत्री ने लोगों को लगा रखा है। जिसका भेद खुल जाने से वह भयभीत हैं। जब सुक्खू जी विपक्ष में थे तो एक सीएस के ऊपर आरोप लगा रह थे, भ्रष्ट बता रहे थे, जिसे हमारी सरकार ने हटाया लेकिन सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री ने उसे अपना प्रिंसिपल एडवाइजर लगा दिया। 

साढ़े तीन से वही सरकार चला रहे हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री के एडिशनल चार्ज पर काम कर रहे सीएस को शायद मुख्यमंत्री ने उनका पक्ष रखने के लिए अधिकृत किया होगा, बीजेपी का पक्ष रखने के लिए नहीं। आज सुक्खू सरकार के चहेते अधिकारी सिर फुटौव्वल पर उतर आए हैं। 

एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। हमें इस बात पर हैरानी नहीं होती क्योंकि हमने यह बात पहले ही कह दी थी कि मुख्यमंत्री ने जिन कामों में अधिकारियों को लगा रखा है वह आने वाले समय में असहाय हो जाएंगे। उनसे न कुछ करते बनेगा और न ही कुछ कहते। 

कुछ महीनें पहले ही एक एसपी अपने डीजीपी और सीएस पर आरोप लगा रहा था। डीजीपी एसपी पर आरोप लगा रहे थे। सीएम के निर्देशों के खिलाफ हाई कोर्ट जाता है। लेकिन मुख्यमंत्री उस अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं कर पाते हैं। मुख्यमंत्री की इतनी विवशता का कारण आखिर क्या है?

 

Tags: Jai Ram Thakur , Shimla

 

 

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