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जी. किशन रेड्डी ने एनएमईडीटी की गवर्निंग बॉडी की बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज में तेज़ी लाने का आह्वान किया

महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता पर ज़ोर, राज्यों से खोज परियोजनाओं और मंज़ूरियों में तेज़ी लाने का आग्रह

G Kishan Reddy, Dr Jitendra Singh, New Delhi
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नई दिल्ली , 25 Mar 2026

Last updated on: Mar 26, 2026, 11:06 IST

केंद्रीय कोयला और खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने नई दिल्ली के नेताजी नगर स्थित GPOA-3 में आयोजित 'राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास ट्रस्ट' (एनएमईडीटी) की 7वीं गवर्निंग बॉडी बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में परमाणु ऊर्जा विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी गरिमामयी उपस्थिति में शामिल हुए, और इसमें वित्त वर्ष 2025-26 के लिए एनएमईडीटी के प्रदर्शन की विस्तार से समीक्षा की गई।

केंद्रीय मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एनएमईडीटी को 'महत्वपूर्ण खनिजों' के अन्वेषण पर विशेष रणनीतिक ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इस क्षेत्र में 'आत्मनिर्भरता' हासिल करना भारत के आर्थिक विकास, ऊर्जा संक्रमण और तकनीकी प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे चल रही अन्वेषण परियोजनाओं में तेज़ी लाएं, स्वीकृतियों की प्रक्रिया को गति दें और आपसी समन्वय में सुधार करें, ताकि अन्वेषण से लेकर नीलामी तक की समय-सीमा को काफी हद तक कम किया जा सके।

उन्होंने खनिज खोज में दक्षता और सफलता दर को बढ़ाने के लिए उन्नत तकनीकों, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग(एआई/एमएल), ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण और आधुनिक 'बेनिफिसिएशन' (खनिज संवर्धन) तकनीकें शामिल हैं, को अपनाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। मंत्री महोदय ने 'स्टार्टअप इंडिया' की परिकल्पना के अनुरूप, अन्वेषण पारिस्थितिकी तंत्र में नए विचारों और अत्याधुनिक समाधानों को लाने के लिए स्टार्टअप्स, निजी अन्वेषण एजेंसियों  और नवाचार-संचालित संस्थानों को अधिक से अधिक शामिल करने पर भी ज़ोर दिया।

परमाणु ऊर्जा विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अन्वेषण परियोजनाओं के समय पर निष्पादन को सुनिश्चित करने के लिए मज़बूत समन्वय, निरंतर निगरानी और प्रभावी अनुवर्ती (फॉलोअप) तंत्रों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने परिणामों में तेज़ी लाने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों को एकीकृत करने और खनिज अन्वेषण की वैल्यू चेन में उन्नत तकनीकों का लाभ उठाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

मीटिंग के दौरान एनएमईडीटी की जिन मुख्य उपलब्धियों पर चर्चा हुई, वे इस प्रकार हैं:-

दायरे का विस्तार

2025 में खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में किए गए संशोधन के ज़रिए लाए गए सुधारों के तहत, नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (एनएमईटी) का नाम बदलकर 1 सितंबर 2025 से नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (एनएमईडीटी) कर दिया गया है। खोज गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता को मज़बूत करने के उद्देश्य से, पट्टेदारों द्वारा दिया जाने वाला योगदान रॉयल्टी के 2% से बढ़ाकर 3% कर दिया गया है।

एनएमईडीटी के दायरे का भी विस्तार किया गया है, जिसमें भारत के अपतटीय क्षेत्रों में खोज के लिए फंडिंग, और भारत के भीतर व बाहर खोज गतिविधियों तथा खदान विकास को शामिल किया गया है।

एनसीएमएमके तहत नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन फंडिंग पहलों की शुरुआत

एनएमईडीटी ने 14.11.2025 को ओवरबर्डन, टेलिंग्स, फ्लाई ऐश, रेड मड आदि से महत्वपूर्ण खनिजों की रिकवरी के लिए पायलट प्रोजेक्ट्स को फंडिंग देने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके तहत प्रति प्रोजेक्ट 20 करोड़ तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिसमें उद्योग भागीदारों का न्यूनतम 10% योगदान अनिवार्य होगा।

नॉन-फेरस मटीरियल्स टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर

(एनएफटीडीसी) के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया है, जिसका उद्देश्य विभिन्न स्रोतों से दुर्लभ पृथ्वी खनिजों को अलग करने के लिए एक पायलट लाइन स्थापित करना है।

टिकाऊ खनन और संसाधन दक्षता पहलें

एनएमईडीटी, खदानों के मुख, डंप, टेलिंग्स, अवशेषों और स्लैग से लिए गए नमूनों के भू-रासायनिक विश्लेषण के माध्यम से महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान करने के लिए विशेष अध्ययनों का समर्थन कर रहा है। खनिजों की पुनःप्राप्ति की क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए 'भारतीय खान ब्यूरो' को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। ये पहलें 'राष्ट्रीय टेलिंग्स नीति, 2025' के अनुरूप हैं और ये स्थिरता, संसाधन दक्षता तथा खनिजों के चक्रीय उपयोग को बढ़ावा देती हैं।

अन्वेषण में प्रौद्योगिकी का आधुनिकीकरण

एनएमईडीटी, डेटा की सटीकता और खोज की सफलता दर को बेहतर बनाने के लिए ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण, एआई/एमएल अनुप्रयोगों और आधुनिक संवर्धन तकनीकों जैसी उन्नत अन्वेषण प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दे रहा है; इस प्रकार यह भारत के खनिज अन्वेषण तंत्र का आधुनिकीकरण कर रहा है।

खोज कार्यों के लिए बढ़ी हुई वित्तीय सहायता

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान महत्वपूर्ण खनिजों की खोज के लिए कुल 76 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। अब तक,एनएमईडीटी की ओर से वित्तपोषित 45 ब्लॉकों की नीलामी की जा चुकी है, जिनमें महत्वपूर्ण खनिजों के 10 ब्लॉक शामिल हैं। कई सहायक पहलों के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

इन सुधारों का सामूहिक उद्देश्य भारत के खनिज खोज ढांचे को मजबूत करना, महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाना, निजी और स्टार्टअप भागीदारी को बढ़ावा देना, आधुनिक तकनीकों को अपनाना और देश में सतत खनिज विकास को आगे बढ़ाना है।

 

Tags: G Kishan Reddy , Dr Jitendra Singh , New Delhi

 

 

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