हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अनुदान सहायता के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) प्रस्तुत करने हेतु मानक प्रारूप लागू करने के लिए हरियाणा वित्तीय नियम, खंड-1 के नियम 8.14 (ख) में संशोधन को मंजूरी दी गई। वर्तमान में अनुदान प्राप्त करने वाले संस्थानों, स्थानीय निकायों, बोर्डों, निगमों और सहकारी समितियों को यह पुष्टि करने के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक है कि निधि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए किया गया है, जबकि मौजूदा नियमों के तहत कोई एकसमान प्रारूप निर्धारित नहीं था, जिसके कारण रिपोर्टिंग में भिन्नताएं पैदा हुई और एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं।
इस कमी को दूर करने के लिए मंत्रिमंडल ने नियमों में उपयोगिता प्रमाण पत्र का विस्तृत प्रारूप शामिल करने को मंजूरी दी। मानकीकृत प्रारूप को सरकारी अनुदान प्राप्त करने वाले सभी विभागों और संस्थाओं में एकरूपता लाने के लिए तैयार किया गया है और इसमें हरियाणा के प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं पात्रता) से प्राप्त सुझावों को भी शामिल किया गया है। संशोधित प्रावधान के तहत अनुदान स्वीकृत करने या निकालने के लिए जिम्मेदार अधिकारी को यह प्रमाणित करना होगा कि अनुदान से जुड़ी सभी शर्तें पूरी हो गई हैं।
उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रधान महालेखाकार के साथ सहमति से तय अंतराल पर निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत किया जाएगा। नियमों में सत्यापन तंत्र भी अनिवार्य किए गए हैं, जिनमें अभिलेखों का रखरखाव, सहायक दस्तावेजों की प्रस्तुति और निधियों के उचित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए लेखा परीक्षा या निरीक्षण शामिल हैं।
इस निर्णय से हरियाणा के विभिन्न विभागों और संस्थानों में सार्वजनिक धन के उपयोग में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।