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शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र की समीक्षा की, वैज्ञानिक फसल नुकसान आकलन और किसान राहत पर जोर दिया

विकसित कृषि संकल्प अभियान, रीजनल कॉन्फ्रेंसेज़ और फसलवार रोडमैप के जरिए खेत-स्तर तक वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने की व्यापक तैयारी

Shivraj Singh Chouhan
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5 Dariya News

नई दिल्ली , 20 Mar 2026

Last updated on: Mar 20, 2026, 18:35 IST

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि भवन, नई दिल्ली में देश के कृषि क्षेत्र की समग्र स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में हाल के दिनों में कई राज्यों में हुई अतिवृष्टि, तेज बारिश, ओलावृष्टि और अन्य प्रतिकूल मौसमीय परिस्थितियों के कारण किसानों को हुए संभावित नुकसान, उनकी तत्काल जरूरतों, बीमा दावों की प्रक्रिया तथा राहत व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई।

समीक्षा के बाद मीडिया से बातचीत में श्री चौहान ने स्पष्ट कहा कि हमारा फोकस केवल उत्पादन पर नहीं बल्कि फसल-क्षति के वैज्ञानिक आकलन, बीमे के सही क्लेम और किसानों की त्वरित सहायता पर भी है। केंद्रीय कृषि मंत्री के निर्देश पर यह समीक्षा बैठक ऐसे समय में आयोजित की गई, जब कई राज्यों में मौसम की अनिश्चितता, फसल-क्षति की आशंका और किसानों की त्वरित सहायता की आवश्यकता प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं ताकि नीति, राहत और मोदी सरकार की विभिन्न योजनाओं की पहुंच तीनों स्तरों पर समन्वित रूप से सुनिश्चित की जा सके।

फसल-क्षति का वैज्ञानिक आकलन और बीमा क्लेम पर विशेष ज़ोर

श्री चौहान ने बैठक में उपस्थित केंद्रीय कृषि सचिव, कृषि आयुक्त तथा सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को जहां भी सहायता की आवश्यकता हो, वहां राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाकर शीघ्र क्रॉप कटिंग प्रयोग, नुकसान का वैज्ञानिक आकलन और त्वरित राहत सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में तेज बारिश, ओलावृष्टि या मौसम की अन्य प्रतिकूल स्थितियों से नुकसान हुआ है, वहां फील्ड स्तर पर समयबद्ध कार्रवाई अनिवार्य है ताकि किसी भी किसान को राहत के लिए इंतजार न करना पड़े।

श्री चौहान ने सभी अधिकारियों को कहा कि राज्यों के साथ तुरंत संवाद करें, संपर्क करें, ताकि ढंग से क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट हो सके, नुकसान का आकलन किया जा सके, और अगर नुकसान किसान को हुआ है तो ठीक ढंग से, वैज्ञानिक तरीके से उनके बीमे के क्लेम बन जाएं ताकि हम अपने किसान भाई और बहनों की मदद कर सकें।उन्होंने यह भी बताया कि मौसम विभाग ने आगे दो और पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना जताई है, इसीलिए किसानों को क्या सलाह दी जाए, इस पर भी व्यापक स्तर पर चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

प्रतिकूल मौसम, मौसम पूर्वानुमान और जोखिम प्रबंधन

बैठक में मौसम पूर्वानुमान और फसलों की ताज़ा स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई ताकि आने वाले दिनों में संभावित मौसम जोखिमों के अनुसार तैयारी की जा सके। श्री चौहान ने कहा कि कृषि विभाग, राज्यों और संबद्ध संस्थाओं को मिलकर ऐसी कार्ययोजना बनानी चाहिए, जिससे किसान को समय पर सलाह, सहायता और सुरक्षा मिले।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि क्षेत्र का लक्ष्य केवल उत्पादन नहीं, बल्कि किसान की सुरक्षा, आय स्थिरता और समय पर सहायता होना चाहिए, और फसल-स्थिति, मौसमीय जोखिम, प्रोक्योरमेंट रेडीनेस तथा राहत तंत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाना आवश्यक है।

दलहन आत्मनिर्भरता मिशन, MSP और बंपर उत्पादन की खरीदी

श्री चौहान ने बताया कि आने वाले दिनों में गेहूं और धान की सरकारी खरीद प्रारंभ होने जा रही है और इस बार रबी फसलों का उत्पादन बंपर रहा है जिससे देश के पास गेहूं, धान और चावल की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि हम गेहूं-धान भी खरीदेंगे लेकिन उसके साथ-साथ दलहन की फसलों पर भी हमारा फोकस बहुत ज्यादा है। तुअर, मसूर, उड़द – किसान जितना बेचना चाहेंगे, हम उतना खरीदेंगे। 

उन्होंने स्पष्ट किया कि दलहन की खरीदी राज्य सरकारों के अलावा नेफेड और सीसीएफ जैसी एजेंसियों के माध्यम से भी की जाएगी ताकि न्यूनतम समर्थन मूल्य के नीचे बिक्री की स्थिति न बने और किसानों को उचित भाव मिल सके। श्री चौहान ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए तुअर, उड़द तथा मसूर जैसी प्रमुख दलहन फसलों के उत्पादन विस्तार, क्षेत्र वृद्धि और MSP आधारित खरीद व्यवस्था को और सशक्त बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि इस मिशन का उद्देश्य देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना, आयात निर्भरता कम करना और किसानों को अधिक लाभ पहुंचाना है और इसके लिए जमीनी स्तर पर ठोस कार्ययोजना बनाई जा रही है।

क्वांटिटी के साथ क्वालिटी पर भी फोकस, प्रीमियम वैल्यू के लिए अभियान

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने स्पष्ट किया कि अब कृषि नीति का फोकस केवल क्वांटिटी तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि क्वालिटी सुधार पर भी समान रूप से जोर दिया जाएगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के ‘सरबती’ जैसे उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं को बाजार में 400 रुपये से अधिक का प्रीमियम मिल जाता है, इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि बेहतर किस्मों, बायोफोर्टिफाइड और उच्च गुणवत्ता वाले अनाज के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए ताकि MSP से ऊपर भी किसानों को बेहतर दाम मिल सकें।

उन्होंने कहा कि हम उत्पादन तो बढ़ाएंगे ही, लेकिन क्वांटिटी के साथ-साथ क्वालिटी भी कैसे इंप्रूव करें, इस पर भी अभियान चलाएंगे। बेहतर किस्में और फोर्टिफाइड किस्में किसानों के लिए ज्यादा रेट दिला सकती हैं, इसलिए हमें किस्म-चयन और गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान देना होगा।

विकसित कृषि संकल्प अभियान, रीजनल कॉन्फ्रेंसेज़ और फसलवार रोडमैप

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने आगामी विकसित कृषि संकल्प अभियान की तैयारियों की भी समीक्षा की जिससे पिछली बार की तरह इस बार भी देशव्यापी स्तर पर किसानों तक वैज्ञानिक सलाह, उन्नत तकनीक और क्षेत्र-विशिष्ट कृषि मार्गदर्शन पहुंचाने के लिए चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल औपचारिक कार्यक्रम न रहकर खेत-स्तर पर उपयोगी परिणाम देने वाला होना चाहिए ताकि बोनी से पहले किसान सही फसल, सही किस्म और सही कृषि पद्धति का चयन कर सकें।

श्री चौहान ने बताया कि पहले खरीफ की फसलों की तैयारी के लिए केवल एक बैठक दिल्ली में होती थी लेकिन अब इसकी जगह पांच जोनों–उत्तर, दक्षिण, पश्चिम, पूर्वी भारत और हिली स्टेट्स (उत्तर-पूर्व सहित) में रीजनल कॉन्फ्रेंसेज़ आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि 7 अप्रैल को जयपुर, 17 अप्रैल को लखनऊ और 24 अप्रैल को ओडिशा में तीन रीजनल कॉन्फ्रेंसेज़ तय की गई हैं जबकि दो और तिथियां जल्द तय की जाएंगी।

इन कॉन्फ्रेंसेज़ में केवल अधिकारी ही नहीं बल्कि उस क्षेत्र के ICAR के जिम्मेदार वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, सफल किसान, किसान उत्पादक संगठन तथा प्राइवेट सेक्टर के वे प्रतिनिधि भी भाग लेंगे, जिन्होंने रिसर्च, वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग में उत्कृष्ट कार्य किया है। उन्होंने कहा कि हम बीज से लेकर बाजार तक, पूरा वैल्यू चैन सोचकर रणनीति बना रहे हैं ताकि किसान को बीज से लेकर बाजार तक हर स्तर पर सहारा मिले।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने यह भी बताया कि हर प्रमुख फसल के लिए एक “फसल आधारित रोडमैप” और हर राज्य के लिए “राज्य-आधारित कृषि रोडमैप” तैयार किया जाएगा। सोयाबीन, मक्का, नारियल आदि फसलों पर पहले ही विस्तृत चर्चा शुरू की जा चुकी है जिसमें उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने, रोगों का मुकाबला करने और क्लीन प्लांटिंग मटीरियल उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

श्री चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और हम निरंतर इस दिशा में लगे हैं कि अपने किसानों की सेवा बेहतर से बेहतर कर सकें तथा उनके माध्यम से देश के उत्पादन और समृद्धि को नई ऊंचाई पर ले जाएं।

 

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