पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता बलबीर सिंह सिद्धू ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को छठे वेतन आयोग के बकाये और महंगाई भत्ते की लंबित किस्तें 6 प्रतिशत ब्याज सहित देने के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए इसे कर्मचारियों की बड़ी जीत बताया।
श्री सिद्धू ने आज यहां प्रेस को जारी एक बयान में कहा कि अदालत ने रोज़-रोज़ खजाना भरा होने की बात कहने वाली भगवंत मान सरकार को आईना दिखा दिया है। उन्होंने कहा कि माननीय अदालत की यह टिप्पणी बेहद गंभीर है कि *“वित्तीय संकट का बहाना बनाकर कर्मचारियों के अधिकारों को कुचलना सरकार की घोर गैर-जिम्मेदारी, लापरवाही और कठोरता है।”*
उन्होंने आगे कहा कि यह बेहद दुखद है कि लगभग 35,000 कर्मचारी और पेंशनर अपने हक की कमाई की किस्तों का इंतजार करते-करते इस दुनिया से चले गए। यह आंकड़ा सरकार की नाकामी का जीता-जागता सबूत है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने पंजाब की किसी भी सरकार के प्रशासनिक ढांचे में कर्मचारियों की अहम भूमिका की सराहना करते हुए कहा, *“कर्मचारी राज्य की रीढ़ की हड्डी होते हैं।
चाहे स्वास्थ्य विभाग हो, शिक्षा हो या कोई अन्य प्रशासनिक इकाई, इन कर्मचारियों की दिन-रात की मेहनत से ही राज्य चलता है। हर सरकार का यह कर्तव्य है कि वह उनके अधिकार समय पर दे, न कि उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर करे।”*
श्री सिद्धू ने कहा कि अदालत द्वारा लगाया गया 6 प्रतिशत ब्याज इस बात की पुष्टि करता है कि सरकार ने कर्मचारियों के साथ गंभीर अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को बिना किसी और देरी के इस फैसले को तुरंत लागू करना चाहिए और बकाया राशि तुरंत कर्मचारियों के खातों में जमा कराई जानी चाहिए।
कांग्रेसी नेता ने कहा कि उनकी पार्टी और वह स्वयं हमेशा कर्मचारियों के साथ खड़े रहे हैं और आगे भी खड़े रहेंगे।