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भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के 79वें बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने सी. पी. राधाकृष्णन से भेंट की

“राजस्व सेवा अधिकारी राष्ट्र की वित्तीय शक्ति के संरक्षक हैं” : सी. पी. राधाकृष्णन

CP Radhakrishnan
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5 Dariya News

नई दिल्ली , 13 Mar 2026

Last updated on: Mar 14, 2026, 09:50 IST

"भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के 79वें बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने आज उपराष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन से भेंट की। प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने राजस्व सेवा के अधिकारियों को राष्ट्र की वित्तीय शक्ति का संरक्षक बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश भर में विकास कार्य तभी संभव हैं, जब करों के माध्यम से राजस्व प्राप्त हो।

उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कर की चोरी न हो, वहीं अधिकारियों को यह भी देखना चाहिए कि करदाताओं को किसी भी प्रकार की अनावश्यक असुविधा का सामना न करना पड़े। उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि अवैध आय की पहचान की जानी चाहिए, जबकि ईमानदारी और कानूनी तरीके से की गई कमाई की सराहना होनी चाहिए।

उन्होंने उल्लेख किया कि कर प्रशासन और भुगतान में प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग जैसे सुधारों के बावजूद, कुछ लोग अभी भी करों की चोरी के लिए सिस्टम में हेरफेर करने का प्रयास कर सकते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे मामलों का पता लगाना और यह सुनिश्चित करना कि देय कर का भुगतान किया जाए, कर अधिकारियों का कर्तव्य है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत तेजी से प्रगति कर रहा है, जहाँ बड़े पैमाने पर संपत्ति का सृजन हो रहा है, बुनियादी ढांचा मजबूत हो रहा है और ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में विकास आगे बढ़ रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि आर्थिक विकास के साथ जैसे-जैसे राजस्व बढ़ता है, राजस्व अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

ईमानदार करदाताओं को सच्चे देशभक्त बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके साथ हमेशा सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए। भारत की सुशासन की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कौटिल्य की शिक्षाओं  का उदाहरण दिया, जिन्होंने परामर्श दिया था कि कर संग्रहण मधुमक्खियों के कार्य की तरह होना चाहिए, जो फूलों को ताजा छोड़ते हुए केवल उचित मात्रा में ही रस एकत्र करती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि अत्यधिक टैक्स दरों के वे दिन अब बीत चुके हैं, जब व्यक्तिगत आय पर 90 प्रतिशत से अधिक की दर से कर लगाया जाता था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टैक्स प्रणाली पारदर्शी, निष्पक्ष और करदाता-अनुकूल होनी चाहिए, जबकि कर चोरी से पूरी सख्ती के साथ निपटा जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने 'सेवा तीर्थ' के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कहे उन शब्दों को भी याद किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “सेवा की भावना भारत की आत्मा और इसकी असली पहचान है।” उन्होंने उल्लेख किया कि 'सेवा तीर्थ' का नाम नागरिकों की सेवा के एक पवित्र स्थान के रूप में रखा गया है। 

साथ ही, उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से “सेवा परमो धर्म:” (सेवा ही परम कर्तव्य है) के मार्गदर्शक सिद्धांत का पालन करने का आह्वान किया। यह रेखांकित करते हुए कि आईआरएस अधिकारियों को भविष्य में डिजिटल लेनदेन, वैश्विक उद्यमों, क्रिप्टोकरेंसी और सीमा पार वित्तीय संरचनाओं जैसे जटिल मुद्दों से निपटना होगा, उन्होंने आजीवन सीखते रहने के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को सरकार के क्षमता विकास मंच, आईगॉट का पूरा उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आईआरएस अधिकारियों के पास एक विशेष कौशल है, जो उन्हें 2047 तक 'विकसित भारत' की ओर भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण शक्ति बनाता है। उन्होंने आगे कहा कि विकसित भारत का सपना केवल सरकार के प्रयासों द्वारा ही पूरा नहीं किया जा सकता, बल्कि यह अंततः नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से ही साकार होगा।

इस अवसर पर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष, श्री रवि अग्रवाल, सीबीडीटी के सदस्य (प्रशासन), श्री पंकज कुमार मिश्रा, प्रधान महानिदेशक–आयकर (प्रशिक्षण), सुश्री अनीता सिन्हा और राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी के महानिदेशक, श्री सिबिचेन के. मैथ्यू उपस्थित थे। उनके साथ 183 प्रशिक्षु अधिकारी भी मौजूद थे, जिनमें रॉयल भूटान सर्विस के दो अधिकारी भी शामिल थे।

 

Tags: CP Radhakrishnan , Chandrapuram Ponnusami Radhakrishnan , Vice President of India , BJP , Bharatiya Janata Party

 

 

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