Tuesday, 21 July 2026

 

 

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पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग के दरवाज़े हर समय खुले हैं – पद्मश्री जतिंदर सिंह शंटी

कहा, पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध

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राजपुरा , 24 Feb 2026

Last updated on: Feb 25, 2026, 12:27 IST

पंजाब राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के मानवाधिकार आयोग के सदस्य पद्मश्री जतिंदर सिंह शंटी ने आज ज़ोर देकर कहा कि किसी भी प्रकार के पीड़ितों के मानवाधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाने के लिए मानवाधिकार आयोग के दरवाज़े हर समय खुले हैं। पद्मश्री जतिंदर सिंह शंटी राजपुरा में ह्यूमन राइट्स वॉच संस्था (रजि.) पंजाब के सूबा प्रधान अमरिंदर सिंह पुरी की अगुवाई में राजपुरा यूनिट द्वारा आयोजित मानवाधिकार जागरूकता और लोगों की शिकायतों के निवारण संबंधी जन-समेलन में शामिल हुए। 

इस अवसर पर यूनिट के प्रधान हरप्रीत सिंह चोजी और वरिष्ठ मीट प्रधान शिव कुमार भूरा ने श्री शंटी का स्वागत किया। आयोग सदस्य जतिंदर सिंह शंटी ने एडीसी शहरी विकास डॉ. इसमत विजे सिंह, एसडीएम नमन मार्कन , एसपी स्वरनजीत कौर, डीएसपी राजपुरा मनजीत सिंह, थाना सदर प्रभारी सहित अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में स्वास्थ्य विभाग, नगर परिषद, बिजली विभाग समेत अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर मानवाधिकारों के मद्देनज़र आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और मानवाधिकार स्थिति को और बेहतर बनाने के सुझाव भी मांगे।

उन्होंने प्राप्त शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए निर्देश भी जारी किए। एडीसी डॉ. इसमत विजे सिंह और एसपी स्वरनजीत कौर ने आश्वासन दिया कि आयोग के निर्देशों की पूरी तरह पालना की जाएगी। इस अवसर पर सदस्य के सचिव बलदेव सिंह, संस्था के सूबा सचिव गुरमीत सिंह बेदी, चरणजीत सिंह बेदी समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

लोगों के बड़े जुटे हुए जन-समूह को संबोधित करते हुए पद्मश्री जतिंदर सिंह शंटी ने कहा कि मानवाधिकार आयोग राज्य में मानवाधिकारों की रक्षा और किसी भी तरह के उल्लंघन के मामलों को गंभीरता से लेते हुए लगातार कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने लोगों को अपने मानवाधिकारों के प्रति जागरूक होने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी और अधिकारी जनता के दिए टैक्स से वेतन प्राप्त करते हैं, इसलिए यदि वे लोगों का काम नहीं करते तो लोग निराश न हों बल्कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें।

उन्होंने कहा कि आयोग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर नागरिक को संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों की पूरी सुरक्षा मिले और किसी भी प्रकार की बेइंसाफी न हो। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मानवाधिकारों का उल्लंघन किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जतिंदर सिंह शंटी ने इस जन-समेलन का आयोजन करने के लिए ह्यूमन राइट्स वॉच संस्था (रजि.) पंजाब की सराहना करते हुए कहा कि मानवता की भलाई के लिए ऐसे कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि आयोग द्वारा हर जिला में डिप्टी कमिश्नर की अगुवाई में 14-14 सदस्यों का कोर ग्रुप बनाया जा रहा है, जो मानवाधिकारों की रक्षा करने और आयोग से संबंधित शिकायतों व समस्याओं को ध्यान में लाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी मानवाधिकारों का हनन होता है तो इसके संबंध में लिखित शिकायत आयोग को दी जाए, जिस पर दो दिनों के भीतर अवश्य कार्रवाई होगी। इसके अलावा एक हेल्पलाइन नंबर 9855475547 भी जारी किया गया है, जिस पर कोई भी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।

पद्मश्री शंटी ने यह भी बताया कि पंजाब राज्य और चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग ने सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों को तीन व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें उचित शवगृह सुविधाएं और ऐंबुलेंस सेवाओं को बनाए रखना शामिल है। आयोग ने अस्पतालों को किसी भी हालत में शवों को रोकने से सख्ती से मना किया है, चाहे बिलों का भुगतान न हुआ हो। 

इसे मानव-मर्यादा और मेडिकल नैतिकता का गंभीर उल्लंघन बताया गया है। उन्होंने बताया कि अस्पतालों को मृत व्यक्तियों, विशेषकर लावारिस या आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मामलों में, मुफ्त या सहायता-प्राप्त अंतिम संस्कार/दफ़न की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। 

तीसरी सलाह में सफाई कर्मचारियों के लिए बीमा और सुरक्षा सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश शामिल हैं। इसके अलावा ऐंबुलेंस सेवाओं के लिए यह भी सलाह दी गई है कि 112 नंबर पर कॉल करने पर पुलिस पायलट ऐंबुलेंस को अस्पताल तक पहुँचा कर आएगी।

इस अवसर पर पद्मश्री शंटी ने कहा कि ऐसे कैंप लगाना आयोग को लोगों के और करीब ला रहा है, क्योंकि आयोग राज्य के हर कोने में लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और त्वरित हस्तक्षेप सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने चंडीगढ़ सेक्टर-32 अस्पताल के अपने हालिया दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई आपका इलाज नहीं करता, तो इस तरह की मेडिकल लापरवाही को आयोग बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा।

जतिंदर सिंह शंटी ने दिल्ली में अपनी संस्था द्वारा शहीद भगत सिंह के सिद्धांतों पर चलते हुए कोरोना काल और पिछले 30 वर्षों में लगभग 70 हज़ार मृत शरीरों के अंतिम संस्कार की सेवा का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हीं सेवाओं के चलते उन्हें राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री सम्मान मिला। उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने चांदनी चौक में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए जो बलिदान दिया, उसी की प्रेरणा से वे मानवाधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभा रहे हैं। 

उन्होंने 1947 और 1984 के संदर्भ में कहा कि उन नरसंहारों के दौरान मानवाधिकार आयोग की अनुपस्थिति के कारण लोगों को न्याय नहीं मिल सका।

 

 

 

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