पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया ने आज डिप्टी कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर ग्रामीण रक्षा समितियों के सदस्यों से मुलाकात की। उन्होंने पंजाब से नशे के उन्मूलन को लेकर समिति सदस्यों के साथ विचार-विमर्श करते हुए जहाँ उन्हें नशा-विरोधी अभियान में और अधिक उत्साह से भाग लेने के लिए प्रेरित किया, वहीं उनसे आवश्यक सुझाव भी प्राप्त किए।
ग्रामीण रक्षा समिति के सदस्यों के साथ नशे पर अंकुश लगाने को लेकर हुई बैठक के दौरान राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि पड़ोसी देश द्वारा नशे और हथियारों की तस्करी के माध्यम से राज्य का माहौल खराब करने की साजिश रची जा रही है, जिसका मुंहतोड़ जवाब दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या को केवल सरकारी प्रयासों से समाप्त नहीं किया जा सकता; इसके लिए समाज के हर वर्ग—माता-पिता, शिक्षक, युवा, आम नागरिक और प्रशासन—को मिलकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
बैठक के दौरान राज्यपाल ने कहा कि ग्रामीण रक्षा समितियों की भूमिका नशा-विरोधी अभियान में अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्हें सशक्त होकर अपने-अपने गांवों की निगरानी करनी चाहिए। उन्होंने समिति सदस्यों से कहा कि वे अपने गांवों में पूरी तरह निगरानी रखें और यह भी ध्यान दें कि उनके गांव के युवा किस दिशा में जा रहे हैं, ताकि कोई भी युवा नशे के दलदल में न फंसे। इस अवसर पर उन्होंने इस अभियान को और अधिक प्रभावी ढंग से चलाने के लिए ग्रामीण रक्षा समितियों के सदस्यों से सुझाव भी लिए।
उन्होंने कहा कि बेरोज़गारी और खालीपन नशे की लत के मूल कारण हैं। यदि युवाओं को रोज़गार से जोड़ा जाए, तो वे इस बुराई से बच सकते हैं। इसलिए अधिक से अधिक रोज़गार के अवसर सृजित किए जाने चाहिए, ताकि हमारे बच्चे नशे की लत से दूर रह सकें।
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि पंजाब वीरों, संतों और शहीदों की धरती है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम, देश की रक्षा और अन्न उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि पंजाब की पुरानी शान और नेतृत्वकारी भूमिका को पुनः बहाल करने के लिए नशे के दुरुपयोग के विरुद्ध एक निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी।
इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव विवेक प्रताप सिंह, डिप्टी कमिश्नर दीपशिखा शर्मा, एस.एस.पी. भूपिंदर सिंह, ग्रामीण रक्षा समितियों के सदस्य आदि उपस्थित थे।