पंजाब के राज्यपाल तथा गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के चांसलर श्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार, संवेदनशील और नैतिक नागरिक तैयार करना है, जो समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दें। वे आज गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के 51वें दीक्षांत समारोह में 456 विद्यार्थियों को सम्मानित किए जाने के अवसर पर संबोधित कर रहे थे।
इनमें 03 विद्यार्थियों को 'चांसलर मेडल', 35 मेधावी विद्यार्थियों को 'मेमोरियल मेडल', 82 शोधार्थियों को पीएच.डी. तथा 336 विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर डिग्रियां प्रदान की गईं। इसके साथ ही न्यूयॉर्क (अमेरिका) के प्रसिद्ध अटॉर्नी-एट-लॉ सरदार जसप्रीत सिंह को मानद (ऑनर्स कॉज़ा) उपाधि से भी सम्मानित किया गया।
उन्होंने शिक्षा पूरी कर समाज में कदम रखने जा रहे विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा, शोध और जीवन मूल्यों का एक प्रकाश स्तंभ है, जिसने देश और दुनिया को अनगिनत प्रतिभाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रतिष्ठित संस्था, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1969 में श्री गुरु नानक देव जी के 500वें प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर की गई थी।
यह केवल एक विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं थी, बल्कि पंजाब और देश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और शैक्षिक विरासत को नई दिशा देने का एक राष्ट्रीय संकल्प था। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय को अपने इतिहास में अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. करमजीत सिंह को उच्च शिक्षा तथा अन्य क्षेत्रों में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए अनेक सम्मानों के साथ-साथ पंजाब रत्न पुरस्कार और डॉ. महिंदर सिंह रंधावा पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है, जो अत्यंत गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि पाँच दशकों से अधिक की अपनी गौरवशाली यात्रा में इस विश्वविद्यालय ने शिक्षा, शोध, खेल, संस्कृति और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर देश और विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।
इस स्मरणीय अवसर पर पंजाब के राज्यपाल एवं गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के चांसलर श्री गुलाब चंद कटारिया तथा कुलपति प्रो. करमजीत सिंह द्वारा न्यूयॉर्क (अमेरिका) के प्रसिद्ध अटॉर्नी-एट-लॉ सरदार जसप्रीत सिंह को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों तथा देश के शैक्षणिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की ओर से मानद (ऑनर्स कॉज़ा) उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया गया।
मंच पर उच्च शिक्षा मंत्री सरदार हरजोत सिंह बैंस, अतिरिक्त प्रधान सचिव श्री विवेक प्रताप सिंह, आई.ए.एस., डीन अकादमिक मामले प्रो. हरविंदर सिंह सैणी, रजिस्ट्रार प्रो. के.एस. चाहल के अलावा सीनेट एवं सिंडिकेट के सदस्य उपस्थित थे। इस अवसर पर अकादमिक परिषद के सदस्य, डीन, विभागाध्यक्ष, अध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी, उनके अभिभावक तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों के अलावा सांसद सरदार गुरजीत सिंह औजला, सांसद श्री राज कुमार चब्बेवाल, विधायक डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर, मेयर सरदार जतिंदर सिंह भाटिया तथा कार्यकारी एस.जी.पी.सी. सदस्य सरदार रजिंदर सिंह महिता भी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में माननीय राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह किसी भी शैक्षणिक संस्थान का सबसे बड़ा उत्सव होता है। उन्होंने कुलपति प्रो. करमजीत सिंह की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें इस बात की अत्यंत प्रसन्नता है कि सभी विद्यार्थियों को मंच पर बुलाकर मेडल और डिग्रियां प्रदान की गईं।
उन्होंने कहा कि हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि किसी विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को शिक्षा देना या उन्हें डिग्रियां प्रदान करना ही नहीं होती। विश्वविद्यालय राष्ट्र की आत्मा को आकार देते हैं और समाज की चेतना का भी निर्माण करते हैं।
वे समाज का मार्गदर्शन करते हैं, हमारी महान संस्कृति को सुरक्षित रखते हैं तथा नई पीढ़ी में वैज्ञानिक चेतना का विकास करते हैं। यही वे स्थान हैं, जहाँ लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिलती है, सामाजिक सद्भाव का ताना-बाना बुना जाता है तथा देश के आर्थिक विकास की मजबूत नींव रखी जाती है।
उन्होंने इस अवसर पर पंजाब के शिक्षा मंत्री सरदार हरजोत सिंह बैंस तथा समूचे पंजाबी समाज को शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब के प्रथम स्थान पर आने की बधाई देते हुए कहा कि आज जब हम वैश्विक स्तर पर देखते हैं तो भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में उभर रहा है। यह जनसांख्यिकीय लाभ हमारी सबसे बड़ी ताकत है। यदि हमारे विश्वविद्यालय उत्कृष्ट शिक्षा, उच्चस्तरीय शोध और नवाचार के वैश्विक केंद्र बन जाते हैं, तो वर्ष 2047 तक "विकसित भारत" बनाने का हमारा संकल्प निश्चित रूप से पूरा होगा।
श्री कटारिया ने कहा कि उन्हें गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से विशेष अपेक्षाएँ हैं। उन्हें विश्वास है कि भविष्य में यह संस्थान न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया में उच्चस्तरीय शोध का अग्रणी केंद्र बनेगा तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.), डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य विज्ञान, कृषि नवाचार, भारतीय ज्ञान प्रणालियों, डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और वैश्विक शोध जैसे क्षेत्रों में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करेगा तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
सरदार जसप्रीत सिंह द्वारा अपनी विश्वविद्यालय, पंजाब और देश के लिए दिए जा रहे योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से विशेष रूप से कहा कि आज जब आप अपनी उपलब्धियों का उत्सव मना रहे हैं, तो एक क्षण रुककर उन लोगों को अवश्य याद करें, जिनके सहयोग से आपकी शैक्षणिक यात्रा संभव हो सकी। आपकी सफलता आपकी मेहनत का परिणाम है, लेकिन इसमें आपके माता-पिता का त्याग, आपके शिक्षकों का मार्गदर्शन और समाज का योगदान भी शामिल है।
इसलिए समाज के प्रति अपना दायित्व निभाना आपकी जिम्मेदारी है। चाहे आप एक ऐसे उद्यमी बनें जो रोजगार पैदा करे, एक ऐसे वैज्ञानिक बनें जो नवाचार को बढ़ावा दे, एक ऐसे लोकसेवक बनें जो जनता के लिए कार्य करे या समाज सेवा के लिए समर्पित व्यक्ति बनें, आपकी शिक्षा वंचित वर्गों के सशक्तिकरण का माध्यम बननी चाहिए।
उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वालों में छात्राओं की अधिक संख्या पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थी विकास की नींव होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थियों या बच्चों के जीवन की दिशा में किसी प्रकार का भटकाव आता है, तो इस पर उनके माता-पिता और शिक्षकों को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर सरदार हरजोत सिंह बैंस ने पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत की महान विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि आज पंजाब केवल शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि अनेक अन्य क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जहाँ गुरु नानक देव विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा में प्रथम स्थान पर है, वहीं पंजाब ने केरल को पीछे छोड़ते हुए स्कूल शिक्षा में भी पहला स्थान प्राप्त किया है।
उन्होंने कहा कि अब "उड़ता पंजाब" नहीं, बल्कि "पढ़ता पंजाब" है। मानद (ऑनर्स कॉज़ा) उपाधि प्राप्त करने के बाद सरदार जसप्रीत सिंह ने कहा कि हमारे कुलपति प्रो. करमजीत सिंह गुरु नानक देव विश्वविद्यालय को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे बीच होने वाली बातचीत के दौरान वे अक्सर विदेशों के विश्वविद्यालयों के साथ गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की शैक्षणिक साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी पंजाबी समुदाय हमेशा अपने देश और पंजाब की उन्नति के लिए चिंतनशील रहता है।
इससे पहले कुलपति प्रो. करमजीत सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की और विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के समय से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध, नवाचार तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहा है।
पंजाब, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में नशे के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए माननीय श्री गुलाब चंद कटारिया की सराहना करते हुए प्रो. करमजीत सिंह ने कहा कि गांवों के नियमित दौरों, जागरूकता मार्चों, पदयात्राओं तथा सामाजिक संपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने नशा-विरोधी अभियान में लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की। उनके नेतृत्व में "ड्रग-फ्री पंजाब" तथा "युद्ध नशों के विरुद्ध" जैसे अभियानों को नई गति मिली।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा श्री कटारिया नियमित रूप से लोक भवन में लोक-दरबार लगाकर नागरिकों की शिकायतों का समाधान करते हैं तथा जवाबदेह प्रशासन को प्रोत्साहित करते हैं। उच्च शिक्षा मंत्री सरदार हरजोत सिंह बैंस का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
उन्होंने इस अवसर पर अतिरिक्त प्रधान सचिव श्री विवेक प्रताप सिंह, आई.ए.एस. का स्वागत करते हुए उनके द्वारा निभाई जा रही सेवाओं की सराहना की। उन्होंने सरदार जसप्रीत सिंह का स्वागत करते हुए कहा कि रिचमंड हिल, न्यूयॉर्क (अमेरिका) के प्रसिद्ध अटॉर्नी-एट-लॉ सरदार जसप्रीत सिंह की उल्लेखनीय उपलब्धियों का सम्मान करना हमारे लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी आव्रजन कानून के क्षेत्र में 24 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले इस विशेषज्ञ ने दस हजार से अधिक आव्रजन मामलों का सफलतापूर्वक संचालन किया है तथा हजारों पंजाबी परिवारों को अमूल्य सहायता प्रदान की है। पंजाबी प्रवासी समुदाय और अमेरिकी कानूनी व्यवस्था के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में पहचान रखने वाले सरदार जसप्रीत सिंह ने आव्रजन नीति एवं सुधारों से संबंधित विचार-विमर्श में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उनकी उपलब्धियों में न्यू जर्सी गवर्निंग काउंसिल के लिए चयन, न्यू जर्सी ट्रांजिशन इंटरडिसिप्लिनरी एडवाइजरी टास्क फोर्स में नियुक्ति तथा वाशिंगटन डी.सी. में "बर्ज ग्लोबल पावर 100" में शामिल होना प्रमुख है। गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के एक विशिष्ट पूर्व छात्र के रूप में उन्होंने शिक्षा एवं शोध के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए सिख अध्ययन चेयर के लिए 5 करोड़ रुपये तथा पीएच.डी. छात्रवृत्तियों के लिए 20 लाख रुपये देने का वचन दिया है।
उन्होंने विश्वविद्यालय के एक विदेशी परिसर की स्थापना के लिए कैलिफोर्निया में भूमि भी दान की है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी के 500वें प्रकाश पर्व को समर्पित गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की स्थापना ज्ञान, चरित्र, दया और निस्वार्थ सेवा पर आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।
"नाम जपो, किरत करो और वंड छको" के शाश्वत सिद्धांतों के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय शिक्षा में उत्कृष्टता प्राप्त करने के साथ-साथ सामाजिक रूप से जिम्मेदार, नैतिक मूल्यों से युक्त तथा वैश्विक स्तर पर सक्षम नागरिक तैयार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विश्वविद्यालय ने अकादमिक क्षेत्र, शोध, नवाचार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, डिजिटल रूपांतरण, विद्यार्थी कल्याण, खेल तथा सामाजिक सहभागिता के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने 4.00 में से 3.85 के उत्कृष्ट अंक के साथ नैक की प्रतिष्ठित ए++ मान्यता को बरकरार रखा है। यह पंजाब का एकमात्र श्रेणी-1 (कैटेगरी-1) विश्वविद्यालय है, जिसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त है तथा इसे "यूनिवर्सिटी विद पोटेंशियल फॉर एक्सीलेंस" का दर्जा भी प्राप्त है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेंटर फॉर वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स ने इसे दुनिया के शीर्ष 10 प्रतिशत विश्वविद्यालयों में शामिल किया है।
डब्ल्यू.यू.आर.आई. रैंकिंग्स में इसने विश्वविद्यालय ब्रांड एवं प्रतिष्ठा श्रेणी में विश्व स्तर पर 78वां स्थान प्राप्त किया है, जो इसकी बढ़ती शैक्षणिक प्रतिष्ठा और सामाजिक प्रभाव को दर्शाता है। विश्वविद्यालय के खेल चिकित्सा एवं विज्ञान विभाग को खेल शिक्षा तथा वैज्ञानिक अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ संस्थान पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
प्रो. करमजीत सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए "पंजाबी-प्रथम शिक्षा, शोध एवं प्रशासन नीति–2026" को मंजूरी दी है। इसके तहत पंजाबी को अंग्रेजी के साथ शोध की भाषा के रूप में प्रयोग करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है तथा उच्च शिक्षा, प्रशासन और ज्ञान सृजन में इसकी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति हमारी प्रतिबद्धता भी समान रूप से मजबूत रही है। पंजाब सरकार के सहयोग से विश्वविद्यालय ने "युद्ध नशों के विरुद्ध" अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई तथा सामाजिक चुनौतियों के समाधान में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। शोध के क्षेत्र में भौतिक विज्ञान विभाग ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत क्वांटम प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला की स्थापना के लिए चयनित 23 प्रमुख संस्थानों में स्थान प्राप्त किया।
इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय ने जापान की होरिबा लिमिटेड से उद्योग-प्रायोजित शोध परियोजना प्राप्त कर शोध के क्षेत्र में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत किया। विश्वविद्यालय की निरंतर विकसित हो रही अंतरराष्ट्रीय पहचान का उल्लेख करते हुए उन्होंने जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र निशस्त्रीकरण अनुसंधान संस्थान के "कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सुरक्षा एवं नैतिकता" विषय पर आयोजित अंतरधार्मिक संवाद में विश्वविद्यालय की भागीदारी की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भी बड़े स्तर पर मनाया, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों में शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहित किया गया।समारोह के समापन अवसर पर प्रो. हरविंदर सिंह सैणी ने सभी का धन्यवाद किया।