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पुस्तक मेले में सैन्य साहस और शौर्य की गाथा, सीडीएस अनिल चौहान रहे मौजूद

Military, Indian Army, General Anil Chauhan, Chief of Defence Staff
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5 Dariya News

नई दिल्ली , 12 Jan 2026

Last updated on: Jan 13, 2026, 13:09 IST

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान सोमवार को नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में पहुंचे। दरअसल, इस वर्ष पुस्तक मेले में सैन्य बलों के बलिदान, साहस और शौर्य को विस्तारपूर्वक दिखाया गया है। मेले के प्रमुख आकर्षणों में से एक ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा 75’ वाला थीम पवेलियन विशेष रूप से चर्चा में है। पुस्तक मेले में इंडियन आर्मी के टैंकों के मॉडल और विभिन्न हॉलों में वर्दीधारी सैन्य कर्मियों की उपस्थिति प्रमुख सेल्फी पॉइंट बन रही है। 

ये पवेलियन सभी आयु वर्ग के दर्शकों को आकर्षित करते हुए मेले को एक मजबूत विजुअल एक्सपीरियंस प्रदान कर रहे हैं। थीम पवेलियन का भ्रमण करते हुए जनरल अनिल चौहान ने इसकी संकल्पना और प्रस्तुति की सराहना की।गौरतलब है कि नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में अर्जुन टैंक, आईएनएस विक्रांत और एलसीए तेजस की प्रतिकृतियां लगाई गई हैं। इनके अलावा, यहां 21 परमवीर चक्र विजेताओं को श्रद्धांजलि देते हुए उनके चित्र भी प्रदर्शित किए गए हैं। 

वहीं, बड़गाम 1947 से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक के प्रमुख युद्धों और सैन्य अभियानों पर सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं। सीडीएस जनरल अनिल चौहान उस स्थान पर भी गए, जहां परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र प्रदर्शित किए गए हैं।राष्ट्रीय पुस्तक न्यास का कहना है कि नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में निशुल्क प्रवेश आगंतुकों को खासा आकर्षित कर रहा है। भारत मंडपम में आयोजित इस मेले में पुस्तक प्रेमियों की रिकॉर्ड उपस्थिति देखी जा रही है।

सुबह से ही छात्र, पाठक और युवा अपने दोस्तों एवं परिजनों के साथ बड़ी संख्या में परिसर में पहुंच रहे हैं, जिससे यह मेला पुस्तकों और विचारों के जीवंत सार्वजनिक उत्सव में परिवर्तित हो रहा है।सोमवार को पुस्तक मेले में आने वाले विशिष्ट अतिथियों में जनरल अनिल चौहान, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) व तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि शामिल रहे। 

पुस्तक मेले में पहुंची हेमा मालिनी कवि दास नारायण की कृष्ण भक्ति पर आधारित काव्य रचनाओं पर आयोजित दूसरे सत्र का हिस्सा बनीं। ‘कविवर दास नारायण के कृष्ण भक्ति पद’ विषयक इस कार्यक्रम में अरुण माहेश्वरी और विमलेश कांति वर्मा की उपस्थिति रही।हेमा मालिनी मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। उनका कहना था कि यह केवल एक पुस्तक का विमोचन नहीं, बल्कि भक्ति काव्य और आध्यात्मिक अनुभूति का उत्सव है। यह कृति उस समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाती है, जिसकी जड़ें सूरदास और मीराबाई जैसे महान कवियों में मिलती हैं।

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के अंतर्गत इंटरनेशनल इवेंट कॉर्नर में आयोजित एक पैनल चर्चा में कजाख प्रोफेसर एवं इतिहासकार डॉ सत्तार एफ. मजितोव ने इतिहास और सांस्कृतिक स्मृति के समन्वय पर अपने विचार साझा किए।मध्य एशियाई देश कजाखस्तान की स्वतंत्रता के 35 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उन्होंने राज्य के बहुआयामी विकास और स्थिरता के आधार के रूप में प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग पर प्रकाश डाला।

सत्र के एक अन्य भाग में कजाखस्तान और भारत के ऐतिहासिक संबंधों पर चर्चा हुई। डॉ. मजितोव ने श्रीनगर में दफन कजाख इतिहासकार मिर्जा मुहम्मद हैदर दुगलत का उदाहरण देते हुए दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक आदान-प्रदान को रेखांकित किया। इसके बाद एक अन्य विचारोत्तेजक सत्र में स्पेन और भारत के कवियों ने मंच साझा किया और स्पेनिश, बास्क, कैटलन, अस्तूरियन, बांग्ला और हिंदी भाषाओं के माध्यम से भाषायी विविधता का उत्सव मनाया।

यह काव्य संवाद प्रमुख रूप से महिलाओं की आवाज, उनकी स्वायत्तता और प्रेम की उनकी अवधारणा के इर्द-गिर्द रहा। वहीं मेले के तीसरे दिन किड्स एक्सप्रेस ने बच्चों को कहानियों, पात्रों और रचनात्मकता की दुनिया की सैर कराई। दिन भर विभिन्न रोचक और शिक्षाप्रद गतिविधियों में 2,500 से अधिक बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

 

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