Friday, 05 June 2026

 

 

खास खबरें यवेट कूपर ने नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की डेल्सी रोड्रिगेज ने नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की नरेन्द्र मोदी ने अहमदाबाद, गुजरात में आयोजित प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप का उद्घाटन किया सर्बानंद सोनोवाल ने कोलकाता में सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की प्रदेश में सभी पात्र परिवारों को दी जाएगी आवास सुविधा : नायब सिंह सैनी नायब सिंह सैनी ने मार्च 2027 तक 12 फुट की हर सड़क को 18 फुट चौड़ा करने के निर्देश दिए नायब सिंह सैनी ने सभी विभागों को अपने 5 साल का रोडमैप एआई टूल पर अपलोड करने के दिए निर्देश हरियाणा के विभिन्न बोर्डों एवं आयोगों के नवनियुक्त अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सदस्यों ने पंचकूला में ग्रहण किया पदभार गौरव गौतम ने हरियाणा के 23 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सीनियर व जूनियर प्रशिक्षकों के नियुक्ति पत्र सौंपे प्रो. असीम कुमार घोष ने युवाओं से रोजगार सृजक बनकर ‘विकसित भारत’ के निर्माण में योगदान देने का किया आह्वान हरियाणा में नियमों के सरलीकरण से बढ़ी कारोबारी सुगमता पीएम सूर्य घर योजना में हरियाणा को राष्ट्रीय स्तर पर मिले तीन प्रतिष्ठित पुरस्कार शाहपुर में ‘‘ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं रिसर्च संस्थान व आटोमेटेड व्हीकल टेस्टिंग स्टेशन’’ स्थापना के लिए जमीन की रजिस्टरी हुई : अनिल विज गुरुग्रामवासियों के लिए बड़ी सौगात प्रदेश के सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों में शुरू होंगे नए रोजगारोन्मुखी कोर्स : महीपाल ढांडा राज्य सरकार प्रदेश के सरकारी अस्पतालों को अत्याधुनिक सुविधाएं देने के लिए उठा रही है कदम : आरती सिंह राव नांगल चौधरी में 11.65 करोड़ की लागत से बनेगा अत्याधुनिक कम्युनिटी हेल्थ सेंटर : आरती सिंह राव मुख्य सचिव को हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन के चीफ कमिश्नर का अतिरिक्त प्रभार सांसद तनमनजीत सिंह ढेसी ने ब्रिटेन में हत्या मामले के बाद सिखों को निशाना बनाने पर कट्टर दक्षिणपंथी पार्टियों की कड़ी आलोचना की नरेंद्र मोदी ने जेन फ्रेजर से मुलाकात कर भारत की विकास प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की हर व्यक्ति साइक्लिंग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाए : विधायक रुपिंदर सिंह हैप्पी

 

जैवलिन थ्रो : युद्ध के लिए इस्तेमाल होने वाला भाला किस तरह ओलंपिक खेल का हिस्सा बन गया?

Sports News, Javelin Throw, Javelin Throwerr, Neeraj Chopra
Listen to this article

Web Admin

Web Admin

5 Dariya News

नई दिल्ली , 04 Dec 2025

Last updated on: Dec 05, 2025, 13:45 IST

मौजूदा समय में जैवलिन बेहद लोकप्रिय खेल है। टोक्यो ओलंपिक में नीरज चोपड़ा के गोल्ड जीतने के बाद भारत में भी जैवलिन की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। इस खेल को लेकर युवाओं में वैश्विक स्तर पर क्रेज है। ताकत और तकनीक से परिपूर्ण इस खेल का इतिहास बेहद पुराना है और शुरुआती समय में जैवलिन अपने मौजूदा रूप में नहीं था।  

जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) की शुरुआत लगभग 2700-2800 साल पहले ग्रीस (पूर्व में यूनान) में हुई थी। भाला फेंक का इजाद खेल के रूप में नहीं बल्कि युद्ध और शिकार के लिए किया गया था। बाद में यह खेल का हिस्सा बना। प्राचीन काल में भाला मुख्य हथियार के रूप में प्रयोग किया जाता था। 

होमर के महाकाव्य इलियड में ट्रोजन युद्ध के दौरान योद्धा दुश्मन की तरफ भाले फेंकते हुए दिखाए गए हैं। हमारे पौराणिक ग्रंथों में भी भाला का जिक्र है। पुराने समय में भाला 2-3 मीटर लंबा होता था और लकड़ी या लोहे का होता था। भाले का इस्तेमाल युद्ध क्षेत्र से निकलकर धीरे-धीरे खेल के मैदान में होने लगा। 

खेल के लिए शुरुआत में इस्तेमाल होने वाले भाले की लंबाई 2.3 से 2.5 मीटर होती थी और बीच में चमड़े की पतली रस्सी लपेटी जाती थी। एथलीट इस रस्सी को उंगली में फंसाकर भाला फेंकते थे, जिससे भाले को घूमने की गति मिलती थी और वह ज्यादा दूर तक जाता था। यह तकनीक आज भी इस्तेमाल होती है। 

मध्यकाल और पुनर्जागरण मध्ययुग में यूरोप के कई देशों में भाला फेंकना लोकप्रिय खेल बना रहा। आयरलैंड, स्कॉटलैंड, जर्मनी, स्वीडन और फिनलैंड में ग्रामीण इलाकों में लोग लकड़ी के भाले फेंककर प्रतियोगिताएं करते थे। फिनलैंड में इसे राष्ट्रीय खेल के तौर पर माना जाता था। खेल के रूप में 708 बीसी में प्राचीन ओलंपिक खेलों में जैवलिन थ्रो को शामिल किया गया था। 

1896 में जब आधुनिक ओलंपिक की शुरुआत हुई। उस समय ओलंपिक में जितने भी खेल शामिल थे, उसमें भाला फेंक भी अहम खेल के रूप में शामिल किया गया। उस समय एथलीट भाले को जिस तरह चाहें फेंक सकते थे। तब सिर्फ पुरुषों के लिए यह खेल आयोजित होता था। 1912 के स्टॉकहोम ओलंपिक तक दोनों हाथों से फेंकने की स्पर्धा भी थी, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया। 

महिलाओं की जैवलिन स्पर्धा पहली बार 1932 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में शामिल की गई। भाले के डिजाइन में बदलाव 1950 तक भाला पूरी तरह ठोस लकड़ी का होता था। 1953 में अमेरिकी एथलीट बड हेल्ड ने खोखला धातु का भाला बनाया, जिससे वह बहुत दूर तक जा सकता था। 1986 में पूर्वी जर्मनी के उवे होन ने 104.80 मीटर तक भाला फेंक दिया था, जो स्टेडियम की सीमा से बाहर जा रहा था। 

सुरक्षा कारणों से 1986 (पुरुष) और 1999 (महिला) में भाले का डिजाइन बदल दिया गया। अब भाले को नीचे की तरफ गिरने की तकनीक से बनाया गया है। जैवलिन थ्रो लगातार लोकप्रियता के साथ-साथ बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इससे एक खेल के रूप में इसकी प्रतिष्ठा और रोमांच में भी इजाफा हो रहा है।

 

Tags: Sports News , Javelin Throw , Javelin Throwerr , Neeraj Chopra

 

 

related news

 

 

 

Photo Gallery

 

 

Video Gallery

 

 

5 Dariya News RNI Code: PUNMUL/2011/49000
© 2011-2026 | 5 Dariya News | All Rights Reserved
Powered by: CDS PVT LTD